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Crop disease
आरती बैरवा*, संजीव शर्मा, ई.पी. वेंकटासलम, प्रियंक हनुमान महात्रे, कैलाश चन्द्र नागा
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Management of cyst nematode in Potato
आलू सब्जियों की मुख्य फसल है और भारत में आलू की खेती एक प्रमुख फसल के रूप में की जाती है। आलू के प्रमुख कीटों में कवचधारी सूत्रकृमि का बहुत महत्व है। जिसे पुटी कृमि या सुनहरे सूत्रकृमि या पोटेटो सिस्ट नेमॅाटोड नाम से भी जाना जाता है। यह भारत सहित दुनिया भर के कई देशों में आलू के उत्पादन निरोधक खतरनाक कीटों में से एक हैं।
एक उपयुक्त परपोषी पौधे के अभाव में यह मिट्टी में लंबे समय तक जीवित रहते हैं । आज के समय में आलू के घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्य के लिए यह एक गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
वर्ष 1961 में यूके के डा. एफ. जी. डब्ल्यू. जोन्स तमिलनाडू के उदागमंडलम, नीलगिरि जिले में भ्रमण पर आए थे। उस दौरान उन्हें तमिलनाडू के विजयनगरम क्षेत्र में आलू की पीली फसल दिखाई दी तथा पौधे की जड़ो पर गोल सुनहरे रंग की सिस्ट मिले। इस तरह जोन्स को कवचधारी सूत्रकृमि के होने का पता चला।
इसके बाद तमिलनाडू की कोडाईकनाल पहाड़ियों में (1983) तथा तमिलनाडू की सीमा से जुड़े केरल के पश्चिमी घाट के आलू के कई खेतों में कवचधारी सूत्रकृमि के व्यापक प्रसार के बारे में जानकारी मिली। अतः नीलगिरि और कोडाईकनाल की पहाड़ियों से कवचधारी सूत्रकृमि के नए क्षेत्रों में प्रसार...