Agriculture Knowledge for Everyone

बटन मशरूम Tag

बटन मशरूम (Button Mushroom) की खेती में अच्छी पैदावार के लिए कम्पोस्ट की गुणवत्ता बहुत मायने रखती है। अगर कम्पोस्ट ठीक तरह से तैयार नहीं है, तो स्पॉन की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है और आगे चलकर उत्पादन भी कम हो सकता है। अच्छा बटन मशरूम कम्पोस्ट बनाने के लिए गेहूं का भूसा, खाद, चोकर, नाइट्रोजन स्रोत, जिप्सम और पानी जैसे कच्चे माल का सही अनुपात जरूरी है। इसके साथ कम्पोस्ट की नमी, तापमान, हवा का आवागमन और समय-समय पर पलटाई पर भी ध्यान देना पड़ता है। बटन मशरूम कम्पोस्ट तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सामग्री बटन मशरूम कम्पोस्ट बनाने के लिए जरूरी सामग्री कम्पोस्ट बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री की मात्रा आपकी composting method और कच्चे माल की गुणवत्ता के अनुसार बदल सकती है। छोटे स्तर पर शुरुआत करने वाले किसान नीचे दी गई सामग्री को एक सामान्य आधार के रूप में देख सकते हैं। सामग्री सामान्य मात्रा भूमिका गेहूं का भूसा 100 kg कम्पोस्ट का मुख्य आधार मुर्गी की खाद 35–40 kg नाइट्रोजन और पोषक तत्व गेहूं का चोकर 5–10 kg अतिरिक्त पोषण यूरिया लगभग 1–1.5 kg नाइट्रोजन स्रोत जिप्सम लगभग 3–4 kg कम्पोस्ट की संरचना और aeration में मदद पानी आवश्यकतानुसार उचित नमी बनाए रखने के लिए ध्यान दें: ऊपर दी गई मात्रा एक सामान्य उदाहरण है। अलग-अलग composting systems में formulation अलग हो सकती है। व्यावसायिक उत्पादन के लिए स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय, KVK या mushroom training centre...

मशरूम की खेती: अतिरिक्त आय का साधन मशरुम एक प्रोटीनयुक्त खाद्य फसल है। इसमें शुष्क भार के आधार पर 28 से 30 प्रतिशत तक उच्च श्रेणी का प्रोटीन होता है। मशरुम खाने से प्रोटीन की कमी से होने वाले रोगों का बचाव होता है। प्रोटीन के अतिरिक्त इसमें विटामिन-सी एवं विटामिन-बी काॅम्प्लेक्स ग्रुप में थाइमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, फोलिक एसिड़ तथा कोबालएमिन (बी- 12) है जो कि गर्भवती महिलाओं व बच्चों के लिये आवश्यक है। इसमें लवण जैसे सोडियम, पोटेशियम, फाॅस्फोरस व लोहा प्रचुर मात्रा में होते हैं। मशरुम खाने से खुन की कमी के ‘एनिमिक’ रोगियों को लाभ होता है। सोडियम तथा पोटेशियम का अनुपात अधिक होने के कारण यह उच्च रक्तचाप को भी दूर करता है। मशरुम एक कम कैलोरी देने वाला भोजन है, इसलिये यह मोटापा दूर करने के लिये भी उपयोगी है। इसमें शर्करा तथा स्टार्च नहीं होने के कारण इसे ‘‘डिलाइट आफ डाइबिटिक” कहा जाता है। यह मधुमेह रोगियों के लिये एक वरदान है। इसमें काॅलेस्ट्राॅल बिल्कुल नहीं होता तथा अर्गोस्ट्राॅल होता है जो कि पाचन क्रिया के दौरान विटामिन-डी में बदल जाता है। अतः यह हृदय रोगियों के लिये भी अच्छा भोजन है। राजस्थान में मशरुम की 2 प्रजातियों की खेती आसानी से व्यवसायिक स्तर पर की जाती है। इन प्रजातियों की खेती का उपयुक्त समय निम्नानुसार हैः- सफेद बटन...

Production technique of Compost for Button Mushroom Cultivation बटन पशरूम की खेती एक विशेष विधि से तैयार की गई कम्‍पोस्‍ट खाद पर की जाती है। इस कम्‍पोस्‍ट को साधारण अथवा निर्जीवीकरण विधियों से बनाया जाता है। साधारण विधि से कम्‍पोस्‍ट बनाने की तकनीक (Simple method of making compost) साधारण विधि से कम्‍पोस्‍ट बनाने में 20 से 25 दिन का समय लगता है 100 सेंमी लम्‍बी, 50 सेंमी चौडी तथा 15 सेंमी ऊची 15 पेटियों के लिए इस विधि से कम्‍पेस्‍ट बनाने के लिए सामग्री: धान या गेहूं का 10-12 सेंमी लम्‍बाई में कटा हुआ भूसा - 250 किलोग्राम धान या गेहूं की भूसी - 20-25 किलोग्राम अमोनियम सल्‍फेट या कैल्शियम अमोनियम नाईट्रेट - 4 किलोग्राम यूरिया - 3 किलोग्राम जिप्‍सम - 20 किलोग्राम मैलाथियॉन - 10 मिलि लिटर जिस स्‍थान पर कम्‍पोस्‍ट तैयार करनी हो वहां पर गेहूं के भूसे की 8 से 10 इंच मोटी तह बिछाकर उसे पानी से अच्‍छी तरह से भिगो दें। पानी में भीगोने के लगभग 16 से 18 घंटे बाद उसमें जिप्‍सम तथा कीटनाशक को छोडकर बाकी सभी सामग्री अच्‍छी तरह से मिला दें। फिर उस सारी सामग्री का एक मीटर चौडा, एक मीटर ऊचा तथा समायोजित लम्‍बाई का ढेर बना दें। इस ढेर को प्रत्‍येक 3-4 दिन के अन्‍तराल पर हवा लगाने के लिए फर्श पर खोलकर बिछा दें तथा आधा घंटे...

Appropriate time of sowing of Mushroom बटन खुम्‍बी (Button Mushroom) बटन खुम्‍बी उगानें का समय अक्‍तूबर से मार्च है । इसके बीज की मात्रा कम्‍पोस्‍ट के भार का 2% होती है। October to March is the suitable time for Button Mushroom cultivation in North India. Generally 2 % spawn of the compost is used. धानपुआल खुम्‍बी (Paddy Straw Mushroom) उत्‍तरी भारत में धान पुआल खुम्‍बी उगानें का उचित समय मई के मध्‍य से सितम्‍बर का मध्‍य है । इसके बीज की मात्रा कम्‍पोस्‍ट के भार का 2.5% होती है। Mid of May to Mid of September is suitable for Paddy Straw Mushroom cultivation in Northern India. ढींगरी खुम्‍बी (Oyster Mushroom) ढींगरी खुम्‍बी उगानें का समय अक्‍तूबर से अप्रैल है । इसके बीज की मात्रा गीले भूसे के भार का 5 से 7 प्रतिशत होती है। Dhingri is grown from October to April in most parts of India. ...