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मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन Tag

Soil Health Management through Waste Management भारत में बड़ी संख्या में फसलें उगाई जाती हैं जिसके चलते प्रतिवर्ष लगभग 100 मिलियन टन फसल अवशेष रीसाइक्लिंग के लिए उपलब्ध होते हैं। इन फसलों के आर्थिक भागों का उपयोग करने के बाद, कुछ फसलों को छोड़कर, अक्सर अवशेषों को जलाकर निपटाया जाता है जिससे इनका ज्यादातर भाग बर्बाद हो जाता है एवं वातावरण प्रदूषित होता है। यह फसल अवशेष पौधों के पोषक तत्वों (क्रमशः 0.5, 0.6 और 1.5 मिलियन टन के लगभग नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश) का एक बड़ा भंडार हैं। घरों तथा खेतों में जो कूड़ा करकट पैदा होता है उसे अगर ऐसे ही इधर-उधर पड़ा रहने दें तो वह एक गंदगी का ढेर बन जाता है, उस पर मक्खी - मच्छर बैठना शुरु कर देते हैं, बदबू आनी शुरू हो जाती है, बीमारियां फैलनी शुरू हो जाती हैं। इस कचरे का बायो - कंपोस्टिंग द्वारा कुशल सेल्युलोलाइटिक सूक्ष्मजीवों के साथ टीकाकरण करके, लाभकारी माइक्रोफ्लोरा (जैसे नाइट्रोजन फिक्सर और फॉस्फेट सॉल्युबलाइज़र) का विकास और संवर्धन कर मिट्टी के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों में सुधार किया जा सकता है, हवा एवं पानी के कटाव से मिट्टी की रक्षा की जा सकती है और वातावरण को शुद्ध रखा जा सकता है। बायो कंपोस्टिंग क्या है बायो कंपोस्टिंग जैविक/कार्बनिक खाद बनाने की एक ऐसी विधि है जिसमें सूक्ष्म...