28 Jul जलवायु परिवर्तन के दौर में खाद्य सुरक्षाः मोटा अनाज एक उम्मीद
Food Security in the Age of Climate Change through Coarse Cereals जलवायु परिवर्तन का भारत जैसे उभरते देशों की खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। यह खाद्य उपलब्धता, खाद्य पहुंच, खाद्य उपयोग और खाद्य प्रणाली स्थिरता को प्रभावित करता है जो खाद्य सुरक्षा के चार आयाम है। वर्तमान स्थिति में विश्व में हर तरफ जलवायु परिवर्तन के कारण मुख्य खाद्य फसलों की उत्पादकता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञ बारिश की बढ़ती अनियमतता और फसलों के पकाव के समय अत्यधिक तापमान के प्रतिकूल प्रभाव से फसलों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है। मोटे अनाज वाली फसलों में अन्य खाद्य फसलों के मुकाबले सूखे और अधिक तापमान को सहन करने की क्षमता होती है। इसी वजह से जलवायु परिवर्तन का सबसे कम प्रकोप मोटे अनाज वाली फसलों में है और इनको आगामी दशकों में मूल भोजन के रूप में देखा जा रहा है। सामान्यतः मोटे अनाज वाली फसलों को सुपरफूड कहा जा सकता है। मोटे अनाज वाली फसलों को अक्सर कम लागत पर उगाया जाता है व इनमे रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग भी काफी कम मात्रा में होता है, जो टिकाऊ खेती का एक बड़ा स्तम्भ है। गेहूं और आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों में ग्लूटेन की मात्रा ज्यादा होती हैं। गेहूं की अधिक खपत...