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रोग प्रबंधन Tag

Phytopathogen detection strategies and their role in disease management फसल के उत्पादनमें भारी नुकसान को कम करने के लिए पादप रोगजनको का पता लगाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उचित एवं तात्कालिक पादप रोगजनको का पता एवं निदान करने से फसलो मे होने वाले नुकसान में गुणात्मक एवं मात्रात्मक कमी लायी जा सकती है l पादप रोग जनको की प्रारंभिक पहचानसे फसल सुरक्षा उपायों को अधिक उपयुक्त और लक्षित अनुप्रयोगी बनाया जा सकता है l यहाँ, पादप रोगजनको के लिए पारंपरिक और आधुनिक पहचान विधियोको संक्षेप में प्रस्तुत किया है l रोगग्रस्त पौधे के नमूने में संक्रामक रोगज़नक़ों का पता लगाने और निदान के लिए कई विधियो को विकसित किया गया हैl कई वर्षों में इन तरीकों ने पौधों पर संक्रमण के लक्षणों की पारंपरिक बीमारी की पहचान से लेकर न्यूक्लिक एसिड- और प्रोटीन-आधारित अति सटीक विधियां विकसितकी गयी हैं। कॉलोनी की गिनती और कल्चर विधि जीवित रोगज़नक़ की उपस्थिति की पुष्टि करने के लिए एकपारम्परिक विधि है।हालांकि यह तकनीक श्रम और समय लेती है, परन्तु सटीक और पुष्टिकरण परिणाम प्रदान करती है। जांच विधियो का उपयोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष पहचान तकनीकों द्वारा किया जा सकता है।आण्विक और सीरोलॉजिकल तकनीकों द्वारा रोगज़नक़ की प्रत्यक्ष पहचान क्रमशः डीएनए और प्रोटीन से  पता लगाया जाता है।जबकि अप्रत्यक्ष पहचान में कई मापदंडों कोजैसे कि तापमान परिवर्तन, रूपात्मक परिवर्तन और...

Convent।onal methods of crop pest and disease management फसलों में बीमारीयों तथा कीडों के प्रकोप से उत्‍पादन मे सार्थक कमी होती है। इनके प्रबंधन के लि‍ए रासायनि‍क दवाओं का बहुतायत से प्रयोग कि‍या जाता है परन्‍तू परम्‍परागत तरीके अपनाकर भी फसलों में कीट पतंगों का प्रभावी नि‍यंत्रण कि‍या जा सकता है। इससे रसायनों के अवशिष्ट कूप्ररभाव से बचा जा सकता है।   एक किलो लहसुन कूचल कर 2.5 लीटर पानी में, मिट्टी के बर्तन में तथा 200-250 ग्राम तम्बाकू 2.5 लीटर पानी में मिट्टी के बर्तन में अलग अलग सडायें । सात दिनों के बाद दोनों को छान कर आपस में मिला दें तथा 100 ग्राम सर्फ़ और 95 लीटर पानी में मिलाकर गंधी कीट के खिलाफ प्रयोग करें । आवश्यकतानुसार इसी अनुपात में मिलकर छिड़काव करें । 50 ग्राम लाल सुखा मिर्च पाउडर 13 लीटर पानी में रात को भिगो लें तथा सुबह छान कर धूप में माहू के नियंत्रण के लिए प्रयोग करें । 20 ग्राम हींग 50 लीटर पानी में घोल कर लाल मकड़ी तथा सफ़ेद मक्खी के नियंत्रण के लिए प्रयोग करें । 20 ग्राम कपूर 50 लीटर पानी में घोल कर लाल मकड़ी के नियंत्रण के लिए प्रयोग करें । मक्के के खुखड़ी को मिट्टी के बर्तन (छेदे हुए) में रखकर धक दें तथा इसे दीमक वाली जगह पर मिट्टी में गाड़ दें...