16 Jul भारत में कीटनाशी तथा रोगनाशी दवाओ का परिदृश्य
Pesticides and Insecticides scenario in India भारत में सत्तर के दशक में हरित क्रांती के पश्चात सघन खेती का दौर शुरू हुआ जिसने फसलो की संकर किस्मो की बुआई की जाने लगी। इन संकर किस्मो मेंं कीट तथा रोगो के प्रति सहिष्णुता कम होने से इन पर कीट तथा रोगो का असर ज्यादा होता है अतः इन पर कीटनाशी तथा रोगनाशी दवाओ का ज्यादा बार छिडकाव करना पडता है तथा ज्यादा बार इस्तेमाल करना पडता है । इसके अलावा कीटो में कीट नाशियो के प्रति प्रतिबंधक शक्ती निर्माण होती है। इसलिए फसलो पर हर बार नयी कीटनाशी तथा रोगनाशी दवाओ का ज्यादा बार छिडकाव करना पडता है तथा ज्यादा बार इस्तेमाल करना पडता है। भारत में कीटनाशी दवाओ का उत्पादन १३९ ००० मेट्रिक टन प्रति वर्ष है जिसने से २१९ मेट्रिक टन कीटनाशी दवाये तकनिकी ग्रेड कि है ,जब कि आज बाजार में ४००० दवाये उपलब्ध है। भारत में कीटनाशी दवाओ का इस्तेमाल ४१.८३३ मेट्रिक टन है । भारत में निर्मित कुल कीटनाशी तथा रोगनाशी दवाओ का ५० प्रतिशत हिस्सा देश में ही इस्तेमाल होता है तथा बाकी निर्यात होता है। टाटा स्ट्रॅटेजी नामक संस्था द्वारा किये गये एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत मे निर्मित कुल दवाओ मे से ६० प्रतिशत कीटनाशी दवाये है , फफूंदनाशी दवाये १८ प्रतिशत , खरपतवार दवाये १६ प्रतिशत...