02 Jul बदलते पर्यावरण का खेती पर प्रभाव
Impact of changing environment on agriculture भारत में खेती का बडा भाग मौसमी बरसात पर ही निर्भर हैं। बदलते मौसम के कारण खेती को नुकसान हो रहा है। देश में फसल उत्पादन में उतार-चढ़ाव का कारण बहुत कम या अत्यधिक वर्षा, अत्यधिक नमी, असामान्य तापमान, रोग व कीट प्रकोप, बेमौसम बारिश, बाढ़ व सूखा और ओलेे आदि मुख्य हैं। पिछले कुछ सालों से मौसम चक्र ने हमें चौंकाने का जो सिलसिला शुरू किया है जैसे की अतिवृष्टि और अनावृष्टि, ये तो हमारे लिए और खेती के लिए मुसीबत बन गया हैं। पिछले वर्ष की अपर्याप्त मानसूनी बारिश से जो दुष्प्रभाव पैदा हुये है, वे बीते दिनों में और बढ़ गये हैं। जलवायु परिवर्तन जैसे तापमान में वृद्धि के परिणामस्वरूप आने वाले बाढ़ व सूखा आदि से खेती का नुकसान और बढ़ेगा। किसान को जहां खरीफ फसल की बुवाई के दौरान सूखे ने परेशानी में डाला था वहीं, इस बेमौसम बरसात से रबी की फसल में उन्हें बुरी तरह तबाह कर दिया। अध्ययनों के आधार पर कृषि वैज्ञानिको ने पाया की प्रत्येक 1º सेल्सियस तापमान बढ़ने पर गेहू का उत्पादन 4-5 करोड़ टन कम हो जाएगा। इसी प्रकार 2º सेल्सियस तापमान बढ़ने से धन का उत्पादन 0.75 टन प्रति हेक्टेयर कम हो जाएगा। कृषि विभाग के अनुसार गेहू की पैदावार का अनुमान 82 मिलियन टन रह जाएगा।...