04 May मृदा स्वास्थ्य: लाभकारी एवं टिकाऊ कृषि का एक अभिन्न अंग
Soil Health- an integral part of the beneficial and sustainable agriculture. भारत की लगभग दो तिहाई आबादी की जीविका का मूल आधार कृषि है। शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण कृषि योग्य जमीन दिन प्रतिदिन घटती जा रही है, साथ ही साथ इसकी गुणवत्ता में उल्लेखनीय कमी आती जा रही है। बीसवी श्ादी के उत्तरार्ध में देश मेे हरित क्रांति से कृषि उपज में गुणात्मक बढ़ोत्तरी हुई। जिसके मूल में अधिक उपज देने वाली किस्में, रासायनिक उर्वरक एवं व्यापक पैमाने पर पाक-संरक्षक उपायों का अपनाये जाना था। जिसके दुष्परिणाम कृषि उत्पादन की कमी के रूप में बाद के दशकों में दिखाई देने लगे। जिसका एक प्रमुख कारण मृदा गुणवत्ता में आई उत्तरोतर कमी को भी माना गया। जिसके अनिगिनत वैज्ञानिक सन्दर्भ उपलब्ध है। अतः मृदा स्वास्थ्य को अक्षुण्ण रखना आधुनिक कृषि की सबसे बड़ी एवं विषम चुनातियों में से एक है । मृदा स्वास्थ्य क्या है मृदा अथवा जमीन को अभी तक एक निर्जीव संसाधन माना जाता रहा है। परन्तु तथ्य इसके एकदम विपरीत है। मृदा एक जीवंत निकाय है। जिसके परिभाषित जैविक, रासायनिक और भौतिक गुणधर्म होते है। इनमे से किसी भी एक गुणधर्म में परिवर्तन अथवा बदलाब मृदा के मूलभूत स्वरुप में, उसके स्वभाव में उल्लेखनीय परिवर्तन कर देते है। फलतः मृदा की उर्वरता में खासी कमी देखने को मिलती है। उदाहरण के तौर पर,...