Crop Cultivation

अरबी की उन्नत खेती  अरबी को विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसेः - कच्चु, तारो, झूइयाँ आदि। अरबी के सम्पूर्ण भाग जैसे कन्द, तना और पत्तियों को सब्जी के रूप में उपयोग किया जाता है। इसमें स्टार्च, कार्बोहाइट्रेट, कैल्सियम, फास्फोरस, पोटैशियम तथा सोडियम बहुतायत मात्रा में पाया जाता है इसके साथ ही बहुत से सूक्ष्म तत्व भी पाये जाते हैं जो मनुष्य  के शरीर के लिए आवश्यक होते हैं। जुलाई - सितम्बर माह में अरबी को एक पूरक सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है जब बाजार में बहुत सारी सब्जियों की उपलब्धता कम होती है। इस प्रकार किसान अरबी की खेती कर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। अरबी के लि‍ए जलवायु...

गेंदे की उन्नत खेती की संपूर्ण जानकारी  गेंदे (मेरिगोल्ड) की खेती हमारे देश में लगभग हर क्षेत्र में की जाती है| यह बहुत महत्तवपूर्ण फूल की फसल है| क्योंकि इसका उपयोग व्यापक रूप से धार्मिक और सामाजिक कार्यों में किया जाता है| इसके प्रमुख उत्पादक राज्य महांराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, आंध्रा प्रदेश, तामिलनाडू और मध्य प्रदेश है| गेंदे की खेती व्यवसायिक रूप से केरोटीन पिगमेंट प्राप्त करने के लिए भी की जाती है| इसका उपयोग विभिन्न खाद्य पदार्थों में पीले रंग के लिए किया जाता है| गेंदा के फूल से प्राप्त तेल का उपयोग इत्र तथा अन्य सौन्दर्य प्रसाधन बनाने में किया जाता है| साथ ही यह औषधीय गुण के रूप में पहचान...

सब्जी फसलों की गुणवत्तापूर्वक पौध उत्पादन तकनीकियाँ  पिछ्ले दो दशकों से हमारे देश में सब्जी उत्पादन में बड़ी तेजी से प्रगति हुई है। सब्जी उत्पादन की बढ़ोत्तरी में उन्नतशील प्रजातियों, संकर प्रजातियों तथा उन्नत उत्पादन तकनीकों का विशेष योगदान रहा है।विभिन्न जलवायु तथा मिट्टी के प्रकारों की उपलब्धता के कारण हम अपने देश में दुनिया की लगभग सभी प्रकार की सब्जियां उगाने में सक्षम है। इन सब्जियों में बहुत सी महत्वपूर्ण सब्जी फसलों को पहले पौधशाला में बीज बोकर पौध तैयार की जाती है तथा फिर तैयार पौध की खेत में रोपायी करके खेती की जाती है। सब्जी पौधशाला एक ऐसा स्थान है जहां पर सब्जियों की पौध तैयार की जाती है तथा...

गेहूँ उत्पादन की आधुनिक सस्य तकनिकी  देश में लगभग 3.02 करोड़ हेक्टेअर क्षेत्रफल से 9.68 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हो रहा है। देश की बढ़ती आबादी की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु वर्ष 2030 के अन्त तक 28.4 करोड़ टन गेहूँ की आवश्यकता होगी। इसे हमे प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण, भूमि, जल एवं श्रमिक कमी तथा उत्पादन अवयवों के बढ़ते मूल्य के सापेक्ष प्राप्त करनी होगी। उत्तर प्रदेश के वर्ष 2001-02 से वर्ष 2016-17 के गेहूँ उत्पादन एवं उत्पादकता के आंकड़ो से स्पष्ट है, कि इसमें एक ठहराव सा आ गया है। जिसको हम मुख्य रूप से उन्नतशील बीज, पोषक तत्व, नाशीजीव, खरपतवार एवं जल प्रबन्ध को एक साथ समायोजित कर ही...

वैज्ञानिक खेती के उन्‍नत तरीकों को अपनाकर गेहूं का उत्पादन बढ़ाऐं  भारत में गेहूँ की खेती करीब 27 मिलियन हेक्टेयर में होती हैं, विगत 40 वर्षों में देश में गेहूँ उत्पादन में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की हैं और भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा गेहूँ उत्पादक देश बन गया हैं। बढ़ती हुई जनसंख्या को ध्यान में रखकर इस बात का अनुमान लगाया जा रहा हैं की अन्न की मांग प्रतिवर्ष 2% बढ़ेगी। इस मांग को पूरा करने के लिए उत्पादकता को बढ़ाना होगा, क्योंकि क्षेत्रफल के बढ़ने की संभावना नहीं के बराबर हैं। राजस्थान में गेहूँ का उत्पादन एवं उसका लाभांश, खेती की लागत के अनुरूप नहीं हैं। उन्नत तकनीको के प्रयोग...

टमाटर की वैज्ञानि‍क खेती Tomato is an inexpensively most important crop worldwide. Tomato is a popular vegetable of Bihar with an area of 46.27 thousand ha, production of 1011MT and productivity of 21.85ton/ha. In India also, the high nutritive value of tomato has helped this vegetable to be in regular consumption list, either as table purpose, culinary purposes or as processed products. As a major vegetable growing region, the state of Bihar significantly contributes to the total tomato production in India. It has prominent place in human food. A brief account of its cultivation is given below. Varieties of Tomato: Varieties     Year    Breeding  Institutes Azad T-2 1984 Pedigree Selection CSAUAT, Kanpur, Uttar Pradesh Kaliyanpur Angoorlata 1994 Selection CSAUAT, Kanpur, Uttar Pradesh Azad T-6 1996 Selection CSAUAT, Kanpur,...

मेथी की उत्पादन तकनीक India is the world’s largest producers, consumers and exporter of seed spices. Among all the states of India, Gujarat and Rajasthan together contribute more than 80 per cent of the total seed spices production in the country and thus, both the states together are known as “seed spices bowl” of India.  In India, fenugreek occupies the third place in area after coriander and cumin and fourth place in production among all the minor spices grown. Fenugreek is a multipurpose crop, every part of which is consumed in one or the other form. Its fresh tender leaves and pods are eaten as fried vegetables being rich in iron, calcium, protein...

फल फसलों मे अनि‍यमि‍त फलन की समस्‍या में पैक्लोबुट्राजोल का अनुप्रयोग Biennial fruits bearing or Irregular bearing or Alternate bearing is serious problems in fruit crops leading to considerable decline in their fruits production potentials. Alternate bearing means "a condition at which high or optimum fruit production in on year or higher and certain year bear little or no fruit (off-year). Flower initiation is very important because it is the first step towards attaining fruit. Recent trials have clearly shown that while the extent (quantity) of flowering affects yields, time of flower emergence has a significant influence on time of fruit maturity. Early flowering clearly resulted in early fruit maturity, therefore, one method to...