Crop Cultivation

ब्रोकली की वैज्ञानिक विधि से खेती  ब्रोकोली की खेती ठीक गोभी वर्गीय सब्जियों की तरह की जाती है। इसके बीज व पौधे देखने में लगभग फूल गोभी की तरह ही होते हैं। ब्रोकोली का खाने वाला भाग छोटी छोटी बहुत सारी हरे फूल कलिकाओं का गुच्छा होता है, जो फूल खिलने से पहले पौधों से काट लिया जाता है और यह खाने के काम आता है। फूल गोभी में जहां एक पौधे से एक फूल मिलता है वहां ब्रोकोली के पौधे से एक मुख्य गुच्छा काटने के बाद भी , पौधे से कुछ शाखायें निकलती हैं तथा इन शाखाओं से बाद में ब्रोकोली के छोटे गुच्छे बेचने अथवा खाने के लिये प्राप्त...

ताजे एवं पौष्टिक सब्जीयों का बेहतर विकल्प: गृह वाटिका  आधुनिक युग में लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा जागरूक हुए हैं। सभी लोग रोजाना के भोजन में पौष्टिक एवं ताजी सब्जियों को अधिक महत्व देने लगे हैं। इसके लिए गृह वाटिका एकमात्र ऐसा विकल्प है जिससे परिवार के लिए ताजी एवं पौष्टिक सब्जियाेे को वर्ष भर उगाया जा सकता है। गृह वाटिका से ना सिर्फ सब्जियां उपलब्ध होती हैं अपितु घर की शोभा भी बढ़ती है तथा लोगों में सब्जी उगाने की कला का भी सृजन होता है। नगरो एवं महानगरों में जमीन की कमी होने के कारण छत या छज्जे ऊपर गमलों में भी सब्जियां उगाई जा सकती हैं। गृह वाटिका से...

ग्रीनहाउस में खीरे की उन्नतशील खेती  साधारणत:खीरा उष्ण मौसम की फसल है। वृध्दि की अवस्था के समय पाले से इसको अत्यधिक हानि होती है। फलों की उचित वृध्दि व विकास के लिए 15-200c का तापक्रम उचित होता है। आजकल विदेशों मे उपलब्ध किस्मों को सर्दी के मौसम मे भी ग्रीन हाउस या पोली हाउस मे सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। इस प्रकार के ग्रीनहाउस या पॉलीहाउस को ठण्डा या गर्म करने के आवष्यकता नही होती है तथा पॉली हाउस में एक वर्ष मे खीरे की तीन फसले पैदा करके अत्यधिक लाभ लिया जा सकता है। पौध तैयार करना ग्रीन हाउस नर्सरी में खीरे की वर्ष भर पौध तैयार की जा सकती है। बीजों...

बंद गोभी की उन्नत खेती बंद गोभी या पात गोभी का वानस्पतिक नाम ब्रैसिका ओलिरेसिया वेरायटी कैपिटाटा एवं उत्पत्ति स्थान उत्तरी यूरोप एवं भूमध्य सागर का उत्तरी तट हैं | बंद गोभी का प्रयोग यूनानियों एवं रोमवासियों द्वारा प्राचीन काल (2500-2000 ई.पू.) से किया जा रहा है | यूरोप में इसका उल्लेख नवीं शताब्दी में मिलता है | यहाँ से ही यह शक भारत में आया | इसका सर्वाधिक उत्पादन पशिचम बंगाल में होता है | इसके अतिरिक्त उडीसा, बिहार, आसाम, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, आदि अन्य राज्यों में इसका उत्पादन किया जाता है | किस्म का नाम विशेषताएं (अ) अगैती किस्मे 1. कोपेनहेगेन मार्केट 90 दिन में परिपक्वता 2. गोल्डन एकर 60-65 दिन में परिपक्वता 3. प्राइड ऑफ इंडिया 70-90...

ऑफ-सीज़न में प्‍लास्‍टि‍क लो टनल में लता वाली सब्‍जीयों (कुकुरबिट्स) की खेती  India is the second largest producer of vegetables in the world next to China. Presently the total vegetable production of India is approximately 169.1 million metric tonnes from a total area of 10.1 million ha under vegetable crops, but the productivity and quality of most of the vegetable crops is very poor due to several biotic and abiotic stress conditions under open field cultivation. Production of vegetables under protected structures such as low tunnel provides the best way to increase the productivity and quality of vegetables, especially cucurbits. Row covers or low tunnels are flexible transparent covering that are installed...

बैंगन की स्वस्थ पौद उगाना : एक पारिस्थितिकी अनुकूल दृष्टिकोण Brinjal is the most common growing vegetables by small and marginal farmers In India, it is one of the most common, popular and principal vegetable crops grown throughout the country except higher altitudes. It is a versatile crop adapted to different agro-climatic regions and can be grown throughout the year. It is a perennial but grown commercially as an annual crop. A number of cultivars are grown in India, consumer preference being dependent upon fruit colour, size and shape.It is a transplanted crop and raising of healthy seedling is very difficult by the farmers as the seedlings suffers from diseases and pest...

पॉलीहाउस में चप्पन कद्दू उत्पादन की वैज्ञानिक विधि  पर्वतीय क्षेत्रों की भोगोलिक परिस्थितियां और यहां का मौसम फसलोत्पादन का समय सीमित कर देता है, जिससे किसानों को कम आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। चप्पन कद्दू या समर स्क्वेश, कम गर्म तथा पाला रहित स्थान में षीघ्र उगने वाली एक व्यवसायिक फसल है। जिसकी खेती पॉलीहाउस तकनीकी से वर्ष भर या बेमौसम में की जा सकती है। साधारणतया यह फसल गर्मियों की है लेकिन इसकी मॉग बाजार में हमेशा होती रहती है। इसलिए यदि पाँलीहाउस में वैज्ञानिक विधि द्वारा इसे उगाया जाय तो वर्श भर फल प्राप्त होते रहेंगे। चप्पन कद्दू का छिलका अन्य कद्दू वर्गीय फसलों के विपरीत पकने पर कड़ा एवं...

सहजन: पौष्टिकता से भरपूर बहुउद्देशीय वृक्ष सहजन का वैज्ञानिक नाम मोरिंगा ओलीफेरा है. इसे अंग्र्रेजी में ड्रमस्टिक, मराठी में शेवगा, तमिल में मुरूंगई, मलयालम में मुरिन्गन्गा और तेलगु में मुनगावया इत्यादि नामो से जानते हैं. सहजन एक बहु उपयोगी पेड़ है, यह मोरिंगासी परिवार का सदस्य है. यह परंपारागत रूप से घरो के पिछवाड़े या बगीचों में लगाया जाता है. इसका पेड़ सामान्यत १० से १२ मीटर ऊँचा होता है. यह तेजी से बढ़ने वाला, गहरी जड़ो वाला सूखा सहनशील पौधा है. यह सदाबहार, माध्यम आकर का पर्णपाती वृक्ष्य है. इसका तना सफ़ेद भूरे रंग का होता है और मोटी छाल से ढाका रहता है. इसकी उत्पत्ति भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान...