Agriculture Knowledge for Everyone

Postharvest

फसल अवशेष जलाना: कारण, प्रभाव और प्रबंधन Crop Residue Burning (CRB) or Burning of agricultural biomass residue has been identified as a major health hazard. Burning crop residue causes remarkable pollution problems in the atmosphere and huge nutritional loss and physical health deterioration to the soil. The burning of one tonne of paddy straw releases 3 kg particulate matter 60 kg CO, 2 kg SO2 and 199 kg ash. These gases affect human health due to general degradation in air quality resulting in aggravation of eye and skin diseases, and very fine particles can also causes chronic heart and lung diseases. The composition of nutrients in crop residue is highly rich, like one ton of paddy straw contains approximately 2.3 kg P2O5, 5.5 kg N, 25 kg K2O, 1.2 kg S, 50-70% of micro-nutrients absorbed by rice and 400 kg of carbon, which are lost due to burning of paddy straw only. India is an annual gross crop residue producer of 371 million tons (mt), of which paddy and wheat residues constitutes 51– 57% and 27–36% respectively. Apart from loss of nutrients, some of the soil properties like soil temperature, pH, moisture, available phosphorus and soil organic matter are greatly affected due to burning in the fields. The major impact of crop residue burning are...

Value added products of Mango विश्व के कुल आम उत्पादन में भारत का योगदान लगभग 44.5 प्रतिशत है। आम उत्पादन में भारत का प्रथम स्थान है तथा कुल फल उत्पादन का दुसरा स्थान है। आम के फल अपनी वृध्दि एवं विकास की हर अवस्था में उपयोगी है। आम स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिकता से भरपूर होता है। आम को कच्चा या पका दोनों तरह से उपयोग करते हैं। जहाँ कच्चे आम में विटामिन 'सी' प्रचुर मात्रा में होता है वही पके आम में (कैरोटिनॉयडस) का बहुत अच्छा सा्रोत है। आम कैल्शियम, फॉस्फोरस, लोहा आदि खनिज लवणों का अच्छा सा्रेत है। कच्चे और पके आम में प्रोटीन, वसा, काबोहाइड्रेट, नमी, खनिज लवण, कैल्शियम, लोहा, कैरोटीन, एस्कार्बिक एसिड, राइबोफ्लेविन आदि तत्व पाए जाते हैं। पके आम का स्केवैश बनाकर और कच्चे आम चटनी, आमचूर, पना, खटाई आदि उत्पाद बनाकर उपयोग कर सकते हैं। भारतीय पध्दति में सर्वदा ही अचार का एक विशिष्ट स्थान रहा है। अचार हमारे भोजन को भी पचाने में सहायता प्रदान करता है। आम के अलावा, नींबू, ऑवला, करैला, करौंदा, लसोड़ा, गाजर, मूली, गोभी, लहसुन, टमाटर आदि का भी आचार बना सकते है। अचार की मॉग देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी प्रचलित है। हमारे देश में निर्मित अचार एवं चटनी का निर्यात नियंतर बढता जा रहा है। बाजार में उपलब्ध अचारों...

Production Technique of Paddy’s Value-Added Product Puffed Rice (Murmura / Murra) धान (ओराइजा सताइवा एल) सबसे महत्वपूर्ण खाद्य  प्रधान फसलों में से एक है जो दुनिया के कई हिस्सों में पोषक तत्वों का एक प्रमुख स्रोत है धान दूसरी सबसे बड़ी अनाज की फसल है यह घास परिवार (ग्रैमिनेसी) का सदस्य है, जो स्टार्चयुक्त बीज का उत्पादन करता है। चावल इन्सान की दैनिक भोजन में अपनी कुल कलोरी का ६०-७०% और प्रोटीन का एक तिहाई हिस्से की पूर्ति करने में योगदान करता है, चावल हमारे दैनिक भोजन में न केवल आहार के रूप में लिया जाया है बल्कि इसके अलवा चावल का प्रयोग नाश्ते के रूप में खाद्य पदार्थो में जैसे की मुर्रा, पोहा, चिवडा, लाइ इत्यादि के रूप में भी करते आ रहे है मुख्य भोजन के रूप में यह भारत की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसलिए कृषि नीति बनाने में एक केंद्रीय स्थान रखता है तथा  धान कई तरह के औद्योगिक उत्पाद जैसे कि चावल, राइस ब्रान ऑयल, मुर्रा, पोहा, लाइ  इत्यादि जैसी खाद्य पदार्थों की पूर्ति के लिए भी एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है | चावल के मूल्य वर्धित उत्पाद: पफ्ड राईस (मुरमुरा / मुर्रा) पफ्ड राईस जिसे कुरमुरा, मुरमुरा, मुर्रा / मूरी के नाम से भी जाना जाता है, खाने में बहुत हल्का वजन और कुरकुरा होता है। खाने में...

 Cryopreservation – long term conservation of plant genetic resources दुनिया भर में लगभग 3,00,000 उच्च पौधों की प्रजातियां  हैं, लेकिन इनमें से सैंकड़ों फसलें खतरनाक दर से विलुप्त होती जा रही हैं । इंटरनेशनल यूनियन फॉर कन्ज़र्वेशन ऑफ़ नेचर (आई यू सी एन) ने 3,078 पौधों की क़िस्मों को गंभीर रूप से संकटग्रस्त और 4,861 को लुप्तप्राय में सूचीबद्ध किया है और इनकी संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। मानव जाति द्वारा उपयोग किए जाने वाले पौधों की बात करें, तो लगभग 30,000 खाद्य पौधों की प्रजातियों की पहचान की गई है, जिनमें से 7,000 से अधिक पौधों की प्रजातियों का उपयोग मानवता के इतिहास में खाद्य जरूरतों  को पूरा करने के लिए किया गया है। परिणामस्वरूप अन्य कई प्रजातियां उपेक्षित और अल्पविकसित होने के कारण प्रलेखित होने से पहले ही विलुप्त होती जा रही हैं। पादप आनुवंशिक विविधता के विलोपन की खतरनाक दर को ध्यान में रखते हुए, इन संसाधनों को विलुप्त होने से बचाने के लिए इनके संरक्षण के निरंतर प्रयास करना अनिवार्य हो गया है। कई पौधों की प्रजातियों के बीजों को पारंपरिक बीज भंडारण तकनीकों द्वारा लगभग 5% नमी तक सुखाने और फिर उन्हें जीन बैंक में कम तापमान (-18ºC)पर रखने से प्रभावी रूप से संरक्षित किया जाता रहा है। बीज जो इस तरह से संग्रहित किए जा सकते हैं...

 Post Harvest Management  Value Addition and Uses of Medicinal Plants 1. ऑंवला ऑंवला युफोरबिएसी परिवार का पौधा हैं । यह भारतीय मूल का एक महत्पूर्ण फल है । महर्षि चरक ने इस फल को जीवन दात्री अथवा अमृतफल के समान लाभकारी माना है।  प्रति इकाई उच्च उत्पादकता 15-20 टन/हे विभिन्न प्रकार की भूमि ऊसर, बीहड़, शुष्क, अर्धशुष्क हेतु उपयुक्ता, एवं पोषक तत्वों जैसे विटामिन, खनिज, फिनॉल, टेनिन गुणों से भरपूर तथा विभिन्न रूपों में उपयोग के कारण ऑंवलो 21 वी सदी का प्रमुख फल है।  बनारसी कम फलत देने वाली, फ्रांसिस एवं नरेन्द्र ऑंवलो-6 औसत फलत देने वाली, कंचन एवं नरेन्द्र ऑंवलो-7 अत्यधिक फलत देने वाली किस्में हैं। औषधीय उपयोग -   एक चम्मच ऑंवले के रस को यदि शहद के साथ मिला कर सेवन किया जाय तो इससे कई प्रकार के विकार जैसे क्षय रोग, दमा, खून का बहना, स्कर्वी, मधुमेह, खून की कमी, स्मरण शक्ति की दुर्बलता, कैंसर, मस्तिष्क विकार, एन्फ्जलुएन्जा, ठंडक, समय से पेहले बुढ़ापा, बालों का झड़ना एवं सफेद होने से बचा जा सकता है । एक चम्मच ताजे ऑंवले का रस, एक कप करेले के रस में मिश्रित करके दो महीने तक प्रात:काल सेवन किया जाय तो इन्सुलिन का श्राव बढ़ जाता है। इस प्रकार यह मधुमेह रोग को नियंत्रित करके शरीर को स्वस्थ्य करता है। साथ ही रक्त की कमी, सामान्य दुर्बलता...

Nutritious preservation and processing in tomatoes टमाटर एक सब्जी की फसल है। यह आमतौर पर ताजे रूप में या कई पकाए गए व्यंजनों में एक घटक के रूप में उपयोग किया जाता है। ताजा टमाटर सलाद और सब्जी के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। जो आर्थिक मूल्य के अलावा, मानव पोषण के लिए अच्छा है क्योंकि यह विटामिन सी, ए, के और  पोटेशियम और लाइकोपीन और कैरोटीन जैसे कैरोटीनॉइड का स्रोत है जो एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करते हैं। भारत  में अधिकांशतय फसल काटने के बाद फसल उपरांत अज्ञानता के कारन प्रसंस्करण की तकनीकों को नहीं अपनाया जाता है। जिस वजह से 15-25  प्रतिशत उत्पादित टमाटर खेत में ही खराब हो जाते है और किसानो को अच्छा लाभ नहीं मिल पता। बाजार के भाव में भी बदलाव होता रहता है जिस वजह से उचित कीमत उठा पाना किसानो के लिए संभव नहीं है। अगर किसान प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के तरीको को अपनाता है तो उचित लाभ कमा सकता है। अत: कि‍सान को टमाटर के मूल्य संवर्धन पर अधिक ध्यान देना चाहि‍ए ताकि टमाटर की खेती से अधि‍क मुनाफा प्राप्‍त कि‍या जा सके।  टमाटर विकारी प्रकृति के होने के कारण कम समय तक सुरक्षित रहते है तथा जल्‍दी सड-गल कर खराब हो जाते हैं। इनको लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के...

धान के मूल्य वर्धित उत्पाद पोहा (फ्लेक्ड राइस) की उत्पादन तकनीक Paddy (Oryza sativa) is second largest major cereal crop which produces starchy seeds.  Rice is a source of nourishment for more than half of the world’s population. iT is one of the leading food crops of the world. The paddy is converted into edible form of the rice for which the paddy undergoes several post harvest operations.   Rice flakes are prepared from paddy. It is also popularly known as "Poha". It is a fast moving consumer item and generally eaten as breakfast item. It can be fried with spices and chilly to make hot and tasty food item or milk / curd is mixed with it and then eaten. Flaked rice is a thin crispy snack. It is mainly used as Breakfast cereal. It has high content of fiber & calorific value. It can easily be soaked in cold or hot water.  Fig. 1: Raw material paddy grain and its value added product flaked rice (poha) Processing methods of flaked rice The process of product (flaked rice in two different size ) development is depicted in the flow diagram shows the steps involved in process for preparation of flaked rice. Raw paddy was soaked in the water for 24 to 30 hours at a room temperature to increases its...

Mushroom production, product and dishes. मशरूम विशेष प्रकार की फफूंदों का फलनकाय है, जिसे फुटु, छत्तरी, भिभौरा, छाती, कुकुरमुत्ता, ढिगरी आदि नामों से जाना जाता है, जो पौष्टिक, रोगरोधक, स्वादिष्ट तथा विशेष महक के कारण आधुनिक युग का एक महत्वपूर्ण खाद्य आहार है। बिना पत्तियों के, बिना कलिका व बिना फूल के भी फल बनाने की अदभूत क्षमता रखता है।  मशरूम का प्रयोग भोजन के रूप में, टॉनिक के रूप में व औषधि के रूप में होता है। भारत जैसे देश में जहॉ की अधिकांश आबादी शाकाहारी है उस स्थिति में खुम्बी का महत्व पोषण की दृष्टि से और भी अधिक बढ़ जाता है। मौसम की अनुकूलता एवं सघन वनों के कारण भारतवर्ष में मशरूम खेतों में, मेड़ों में, वनों में प्राकृतिक रूप से विभिन्न प्रकार के माध्यमों में निकलते है। ग्रामीण जन खाद्य मशरूम का बड़े चाव से उपयोग करते है। आज अनेक प्रकार के मशरूम को न केवल प्रयोगशाला में उगाया जा रहा है, वरन उनकी व्यावसायिक खेती कर उनका निर्यात एवं आयात कर कृषि अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। मशरूम का प्रयोग सब्जी के रूप में किया जाता है। व्यवसायिक रूप से तीन प्रकार की खुम्बी उगाई जाती है। बटन खुम्बी, ढींगरी खुम्बी तथा धान पुआल या पैडी स्ट्रा खुम्बी। व्यावसायिक स्तर पर उत्पादित आयस्टर एवं पैरा मशरूम की...