Soil & Fertilizers

पौधों की स्वस्थ वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जानें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक, आयरन, बोरॉन और अन्य पोषक तत्वों के कार्य तथा उनकी कमी के प्रमुख लक्षण।...

अच्छी फसल के लिए किसान बीज, पानी और खाद पर काफी ध्यान देता है। लेकिन इन सबके साथ एक चीज और उतनी ही जरूरी है—खेत की मिट्टी की स्थिति जानना। मिट्टी में कौन-सा पोषक तत्व कम है, कौन-सा पर्याप्त है और मिट्टी का pH कैसा है, इसकी जानकारी बिना जांच के आसानी से नहीं मिलती।कई बार किसान फसल कमजोर दिखाई देने पर ज्यादा खाद डाल देते हैं। लेकिन हर बार फसल की समस्या खाद की कमी के कारण हो, यह जरूरी नहीं है। समस्या मिट्टी के pH, पानी की निकासी, लवणता या किसी खास पोषक तत्व की कमी के कारण भी हो सकती है।इसीलिए Soil Testing यानी मिट्टी की जांच...

भूमिका मृदा स्वास्थ्य कृषि उत्पादन की आधारशिला है। स्वस्थ मिट्टी ही लंबे समय तक टिकाऊ उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और कम लागत वाली खेती सुनिश्चित करती है। आज की कृषि व्यवस्था में केवल अधिक उत्पादन के लक्ष्य के कारण नाइट्रोजन (यूरिया) का अत्यधिक उपयोग हो रहा है, जिससे मिट्टी में पोषक असंतुलन, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी और जैविक सक्रियता में गिरावट देखी जा रही है। भारत सरकार किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराने के लिए भारी उर्वरक सब्सिडी (Fertilizer Subsidy) प्रदान करती है। हालांकि, उर्वरकों के असंतुलित और अत्यधिक उपयोग के कारण यह सब्सिडी अब सरकार के खजाने पर एक बड़ा बोझ बनती जा रही है। संतुलित पोषक प्रबंधन का उद्देश्य...

A goat produces approximately 1-1.5 kilograms of manure per day. A small farm of 50 goats can produce 1500-2250 kilograms of manure per month. Small farmers can prepare it themselves, further reducing costs. Given the growing demand for natural fertilizers in the current market, this is an attractive business option....

Holistic approach of integrated nutrient management for agricultural development in Bihar बिहार, भारत का एक प्रमुख कृषि प्रधान राज्य है, जिसकी अर्थव्यवस्था और आजीविका का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के लगातार क्षय के बीच, कृषि उत्पादन को बढ़ाने और टिकाऊ बनाने के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) की आवश्यकता बढ़ गई है। यह दृष्टिकोण मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न पोषक स्रोतों के संतुलित और कुशल उपयोग पर आधारित है। समेकित पोषक तत्व प्रबंधन का महत्व मृदा की उर्वरता बनाए रखना: मृदा की उत्पादकता लंबे समय तक बनाए रखना। पोषक तत्वों की आपूर्ति में संतुलन: जैविक, अजैविक और प्राकृतिक स्रोतों...

Importance of soil organic carbon in increasing crop productivity मृदा कार्बनिक पदार्थ का एक मापनीय घटक है। एसओसी (SOC) का मतलब है "मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ के रूप में संग्रहीत कार्बन, जैसे कि विघटित पौधे और पशु पदार्थ"।  कार्बनिक पदार्थ अधिकांश मृदा के द्रव्यमान का केवल 2-10% हिस्सा बनाते हैं और कृषि मृदा के भौतिक, रासायनिक और जैविक कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्बनिक पदार्थ पोषक तत्वों के प्रतिधारण और परिवर्तन, मृदा संरचना, नमी प्रतिधारण और उपलब्धता, प्रदूषकों के विघटन और कार्बन पृथक्करण में योगदान देते हैं। कार्बनिक पदार्थ कोई भी जीवित या मृत पशु और वनस्पति पदार्थ है। इसमें जीवित पौधों की जड़ें और जानवर, अपघटन के विभिन्न चरणों में पौधे...

सूक्ष्म शैवाल और बैक्टीरिया: पर्यावरण-अनुकूल सब्जी उत्पादन के लिए एक अदभुत जोड़ी Contemporary agriculture's reliance on chemical fertilizers has led to significant environmental pollution and degradation of soil fertility. As an alternative, microalgae and plant growth-promoting bacteria (PGPB) have emerged as potential biofertilizers due to their ability to enhance soil fertility through the production of bioactive compounds, such as phytohormones, amino acids, and carotenoids, and their capacity to suppress plant pathogens. Traditionally, agricultural treatments have focused on single-species applications of either microalgae or bacteria. However, recent experimental evidence highlights that a symbiotic relationship between microalgae and bacteria can positively influence each other's physiological and metabolic processes. This synergistic interaction is particularly promising...