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Crop disease

माहू यानी Aphid एक छोटा रस चूसने वाला कीट है, जो कई तरह की फसलों, सब्जियों, फलों और बागवानी पौधों को नुकसान पहुंचा सकता है। यह कीट अक्सर पौधे की कोमल पत्तियों, नई शाखाओं और पत्तियों की निचली सतह पर समूह में दिखाई देता है। माहू का आकार बहुत छोटा होता है, लेकिन अनुकूल मौसम मिलने पर इसकी संख्या तेजी से बढ़ सकती है। अधिक प्रकोप होने पर पौधों की नई बढ़वार कमजोर हो जाती है, पत्तियां मुड़ने लगती हैं और फसल की सामान्य वृद्धि प्रभावित हो सकती है। कुछ माहू प्रजातियां पौधों में वायरस रोग भी फैला सकती हैं। पौधे की पत्ती और कोमल हिस्सों पर दिखाई देने वाला माहू कीट का प्रकोप। पौधे की कोमल पत्तियों और तनों पर समूह में दिखाई देने वाले माहू कीट। माहू कीट क्या है? माहू एक नरम शरीर वाला छोटा कीट है, जिसे अंग्रेजी में Aphid कहा जाता है। इसकी अलग-अलग प्रजातियों का रंग हरा, पीला, काला, भूरा, लाल या गुलाबी हो सकता है। यह कीट अपने मुंह के विशेष अंगों की सहायता से पौधे का रस चूसता है। सामान्यतः माहू नई पत्तियों, कोमल तनों, नई शाखाओं और फूलों की कलियों के आसपास पाए जाते हैं। कुछ परिस्थितियों में माहू के पंख वाले रूप भी दिखाई देते हैं। ये एक पौधे से दूसरे पौधे तक फैलने में मदद करते...

गेहूँ और जौ में Spot Blotch रोग की पहचान करें। जानिए Symptoms, Causes, रोग का फैलाव और Wheat & Barley Spot Blotch का प्रभावी Disease Management....

गेहूँ का सेहूँ रोग, जिसे सीड गॉल, ईयर कॉकल या कॉकल रोग भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण सूत्रकृमि-जनित रोग है। इसका प्रमुख कारक Anguina tritici नामक गेहूँ का सीड-गॉल सूत्रकृमि है। रोग में सामान्य दानों के स्थान पर काले या भूरे रंग की सूखी हुई गॉल (मिनियाँ/सेहूँ) बन जाती हैं। संक्रमित खेत में पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है और दाने की गुणवत्ता तथा उपज दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। भारत में यह रोग विशेष रूप से पुराने अथवा स्वयं-सहेजे गए बीज के लगातार उपयोग वाले क्षेत्रों में समस्या बन सकता है। [1–4] रोग के नाम और टुंडू रोग संबंध स्थानीय स्तर पर इस रोग के लिए सेहूँ, धानक, कॉकल तथा ईयर कॉकल जैसे नाम प्रयुक्त होते हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से ‘टुंडू/येलो स्लाइम’ रोग को केवल Anguina tritici का पर्याय मानना उचित नहीं है। Anguina tritici के साथ Rathayibacter tritici जैसे जीवाणु की सहभागिता होने पर टुंडू या येलो-स्लाइम लक्षण विकसित हो सकते हैं। इसलिए खेत में रोग की पहचान करते समय सूत्रकृमि और जीवाणु-सम्बन्धी लक्षणों में अंतर करना उपयोगी है। [1] रोग का कारक [caption id="attachment_11856" align="aligncenter" width="300"] Anguina Tritici microscopic view[/caption] इस रोग का प्रमुख कारक Anguina tritici है। इसके द्वितीय अवस्था के किशोर (J2) संक्रमण की दृष्टि से महत्वपूर्ण अवस्था हैं। संक्रमित गॉल सूखने की अवस्था में लंबे...

आलू पुटी कृमि (पीसीएन) एक महत्वपूर्ण कीट है जो दुनिया भर में आलू (सोलनम ट्यूबरोसम) की फसलों को प्रभावित करता है इसमें दो प्रजातियां शामिल हैं: ग्लोबोडेरा रोस्टोचिएन्सिस (पैथोटाइप Ro1 से Ro5) और ग्लोबोडेरा पैलिडा (पैथोटाइप Pa1 से Pa3)।...

एक कीटनाशक एनायनिक, कैटायनिक या नॉनआयनिक सर्फेक्टेंट की उपस्थिति में बहुत अलग तरह से व्यवहार कर सकता है। इस कारण से, आपको इनमें से किसी एक एडिटिव को चुनते समय लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए। गलत सर्फेक्टेंट का चयन प्रभावकारिता को कम कर सकता है और उपचारित पौधों या सतहों को नुकसान पहुंचा सकता है।...

Knowledge gained from RNAi, CRISPR/Cas9, and metabolic engineering offers sustainable solutions for managing Sclerotinia stem rot disease. Integrating these methods with traditional practices such as crop rotation and resistant germplasm source development (breeding programs) can provide durable resistance while reducing costs and environmental impacts....