Agriculture Knowledge for Everyone

Postharvest

Post harvest management of Baby Corn. बेबी कार्न को बाजार फसल के रूप में उगाया जा सकता है। कार्न के ताजेपन, नमी और गुणवत्ता को बनाये रखने के लिए छिलकों के साथ बेबी कार्न का विपणन करने की शिफारिस की जाती है। बेबी कार्न की विपणनीयता का निर्धारण करने में विपणन मानक मुख्य कारक होते हैं। बाजार के मानकों में नाशीजीवों या रोगो के कारण होने वाले नुकसान से मुक्त, सफेद से हल्के पीले तक के भिन्न रंग बेबी काॅर्न की बेलनाकार आकृति और आकार के आमाप शामिल होते हैं। उद्योग में बाजार/ डिब्बे बंदी के लिए इष्टतम आकार की आवश्यकता है। छिलका उतरे हुए बेबी कार्न 4.5 से 10 सेमी. लम्बे, और 7 से 17 मिमी. ब्यास के होने चाहिए। दाने का छोटा आकार, दानों की सीधी पंक्तियां नुकीले शिरे जैसी विशेषतायें हैं जिन्हें उच्च गुणवत्ता वाले बेबी काॅर्न के लिए बरीयता दी जाती है। शहरों के पास स्थित किसान लाभप्रद स्थिति में होते हैं क्योंकि वे होटलों में और बाजारों में सीधे बिक्री कर सकते हैं। लवण जल की घोल में संरक्षित किये गये प्रसंस्कृत/ डिब्बा बंद तथा शीशे के जारों में पैक बेबी कार्न उन किसानों के लिए एक अच्छा अवसर है जो परिनगरीय बाजारों से दूर है। ताजे के साथ ही प्रसंस्कृत बेबी कार्न के लिए निर्यात के ब्यापक अवसर...

Natural properties of mustard and value added products  सरसों का तेल अपनी कम संतृप्त फैटी एसिड सामग्री और ट्रांस वसा की अनुपस्थिति के कारण स्वास्थ्यप्रद तेलों में से एक है। यह आवश्यक फैटी एसिड ओमेगा 3 और ओमेगा 6 प्रदान करता है जो हृदय रोगों के जोखिम को कम करता है। सरसों के तेल में गुणकारी तत्त्व फाइटोन्यूट्रियंट्स जैसे फिनोलस, कैरोटीनोइड, फिटोस्टरोल, सेलेनियम, ग्लूकोसिनॉल्स, विटामिन सी और टोकोफेरॉल की की उपस्थिति के कारण इसकी गुणवता में अधिक वृद्धि होती है। भारतीय सरसों को मिट्टी से भारी धातुओं और अन्य खनिजों (जैसे कैडमियम, आर्सेनिक और सीसा) को शामिल करने की प्रवृत्ति के लिए जाना जाता है। इस संपत्ति का उपयोग उच्च-सेलेनियम सरसों को विकसित करने के लिए किया गया है जो कैंसर के उपचार के लिए उपयोगी माना गया है। तेल के अलावा, हरी पत्ते वाले हिस्से भी आवश्यक खनिजों का उत्कृष्ट स्रोत है, जिसका उपयोग भोजन पकाने के प्रयोजनों के लिए किया जाता है। यह अचार और सलादों में भी प्रयोग किया जाता है। पंजाब, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, पत्तियों को साग के रूप में उपयोग किया जाता है। गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस, लोहे की कमी और कैंसर को रोकने के लिए आहार में सरसों के पत्तों को शामिल करना जाना अनिवार्य है। सरसों के बीज भारत भर में मसाला के रूप में उपयोग...

Sorting and Grading of fruits and vegetables for increasing the income of farmers. फलों एवं सब्जियों में गुणवत्ता की श्रेणी को मापने के लिए उनकी छंटाई एवं वर्गीकरण किया जाता है। यह उनकी उपयोगिता एवं मूल्यवर्धन को स्थापित करने में मदद करता है। छंटाई एवं वर्गीकरण ताजे फलों एवं सब्जियों में बाजारीकरण के लिए एक बहुमूल्य साधन है। यदि कि‍सान अपने कृषि‍ उत्पाद का पंजीकरण करवाना चाहता हो तो भी शुद्ध वर्गीकरण मापक की आवश्यकता होती है।  कृषि उत्पाद वर्गीकरण एवं विपणन एक्ट 1937 योजना के अन्तर्गत डाइरेक्टोरेट आफ मार्केटिंग एण्ड इन्सपेक्सन (डीएमआई) भारत मेंं कृषि उत्पाद के वर्गीकरण का प्रमाणीकरण करता हैं छंटाई एवं वर्गीककरण का महत्व छंटाई एवं वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य उत्‍पाद  को विभिन्न वर्गों जैसे ए, बी और सी इत्यादि में पृथक करना है। अत्याधिक परिपक्व फल एव सब्जियाँ को  खाद्य प्रसंस्करण के लिए छटांई करना। जो फल एव सब्जियाँ मनुष्य उपयोग के लिए योग्य नही हैं, उनका प्रयोग पशु-आहार के लिए पृथक करना है। संदर आकार व रगं रूप के फलों एवं सब्जियों को अलग करके अधि‍क कीमत पर बेचा जा सकता है। पूर्ण पक चुके फलों एवं सब्जियों को अलग करके थोडी कम कीमत पर बेचकर उनके खराब होने से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। छंटाई एवं वर्गीकरण के लिए फलों एवं सब्जियों को प्राथमिक विशेषतायें जैसे रंग, आकार, पकाव इत्यादि का प्रयोग किया जाता है। छंटाई एवं...

Indigenous Turmeric Processing Methods छत्तीसगढ़ में हल्दी की फसल कि खेती विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग समय में की जाती है। इस फसल के लगभग 50% उत्पादक किसान आदिवासी होते हैं और आम तौर पर अपने बड़ियो में स्वदेशी तरीकों के माध्यम से फसल उत्पादन करते हैं। वार्षिक रिपोर्ट, 2015-16 के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य का पुरे भारत में हल्दी उत्पादन के क्षेत्र में लगभग 11.80 प्रतिशत योगदान रहा है। राज्य में हल्दी का उत्पादन 9, 747 हेक्टेयर भूमि से लगभग 83,470 लाख टन का था तथा साल दर साल राज्य का उत्पादन क्षेत्र बढ़ रहा है,   हल्दी उत्पादन के मुख्य जिले धमतरी, कोरबा, जगदलपुर, सरगुजा, जशपुर, कोंडगाँव, बालोद, सूरजपुर और बलरामपुर है। किए गए सर्वेक्षण के अनुसार हल्दी उत्पादक क्षेत्र में हल्‍दी प्रसंस्करण के लिए तीन तरीकों का प्रयोग किया जाता है। गोबर के साथ हल्दी को उबालना गोबर के बिना हल्दी को उबलकर 2-3 सेमी आकार कि मोटाई में काटकर धुप में सुखाना गोबर के बिना हल्दी को उबालना- वाणिज्यिक विधि 1. हल्‍दी प्रसंस्करण की परंपरागत विधि गोबर के साथ हल्दी को उबालना पारंपरिक पद्धति में, साफ धुली हुई हल्दी प्रकन्दको पर्याप्त पानी के साथ तांबे, जस्ता लोहा या मिट्टी के बर्तन में उबाला जाता है। कुछ जगहों परहल्दी प्रकन्द को उबालने के लिए गोबर का घोल एक माध्यम के रूप में उपयोग किया जाता...

Scientific method to prepare the preserved product of palm fruits खजूर पामी कुल के अंतर्गत फोनिक्स जाति की कई उपजातियों को प्राय: खजूर नाम दिया जाता है। इनमें फोनिक्स डैक्टिलिफेरा और फोनिक्स सिल्वेस्ट्रिस विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। खजूर भारत में अनेक जगह उगाया जाता है। खजूर की खेती भारत मे हरियाणा, पंजाब, गुजरात पश्चिमी राजस्थान के बीकनेर, बाड्मेर, जेसलमेर, जोधपुर, श्री गंगानगर, चूरु व नागोर जिलो मे होती है। खजूर का पेड़ विश्व के सबसे सुन्दर सजावटी पेड़ों में से एक माना जाता है और इसे सड़कों राजमार्गो और मुख्य रास्तों पर शोभा के लिए भी लगाया जाता है। खजूर के ताजे पके फल को खजूर, पिंड खजूर तमर या खुर्मा और पके, सूखे फल को छुहारा, खारिक अथवा डेट कहते हैं। खजूर विश्व के सबसे पौष्टिक फलों में से एक है। सदियों से यह मध्यपूर्व एशिया और उत्तरी अफ्रीका के रेगिस्तानी इलाकों का प्रमुख भोजन बना हुआ है क्योंकि वहाँ इसके सिवा और कुछ उत्पन्न नहीं होता। यह ताज़ा और सूखा, दोनों तरह के फलों में गिना जा सकता है। पेड़ पर पके खजूर ज़्यादा स्वादिष्ट होते हैं। लेकिन जल्दी खराब हो जाने की वजह से इसे धूप में सुखाया जाता है। ताज़े खजूर के मुकाबले सूखे खजूर में रेशों की मात्रा अधिक होती है। इसके सेवन से ग्लुकोज और फ्रुक्टोज के रूप में नैसर्गिक...

Processing of Chironji Seeds (charoli seeds ) and  evaluation of Chironji Decortication Machine developed by IGKV चिरौंजी (Buchnania lanzan) का पेड एनाकार्डिशी कुल के अंतर्गत आता है| इसे चारोली के नाम से भी जाना जाता है| इसका उपयोग भारतीय पकवानों में किया जाता है तथा यह प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज, फाईबर, विटामिन और सुक्ष्म पोषक तत्वों की समृध स्रोत है| चारोली का वृक्ष अधिकतर सूखे पर्वतीय प्रदेशों में पाया जाता है| दक्षिण भारत, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश आदि स्थानों पर यह वृक्ष विशेष रूप से पाए जाते है| छत्तीसगढ़ में बस्तर से लेकर कांकेर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा, महासमुंद, सरगुजा आदि क्षेत्रो के वनों में चिरौंजी के पेड़ प्राकृतिक रूप से विद्यमान है|  बस्तर संभाग के जंगल चिरौंजी का सबसे बड़ा क्षेत्र है| बस्तर वनक्षेत्र के आदिवासी चिरौंजी के महत्व व मूल्य से अनजान है वे चिरौंजी के फल को खाकर इसके कीमती गुठली को यूं ही फेंक देते है या नगरों कस्बों के चतुर व्यापारियो के हाथों औंने पौंने दामो में गुठली बेंच देते है| राज्य सरकार इस वनक्षेत्र में प्राकृतिक रूप से सदियों से लगे पेड़ो द्वारा प्राप्त हो रहे चिरौंजी के गुठलियों के संग्रहण एवम विपणन पर ध्यान देकर वनक्षेत्र में बसे आदिवासियों को उचित कीमत दिला सकती है| उचित प्रसंस्करण की विधि ज्ञात ना होने के कारण आज भी क्षेत्र के  आदिवासी चिरौंजी गुठली का प्रसंस्करण...

Value Addition Techniques, Restrictions and Solutions in Vegetables वैश्विक स्तर पर सब्जियों के उत्पादन और विविध सब्जी-उत्पाद के कारोबार में व्यापक वृद्धि हुई है। बढ़ती आय,घटते परिवहन लागत, नई उन्नत प्रसंस्करण तकनीक और वैश्वीकरण ने इस विकास के लिए प्रेरित किया है। लेकिन यह वृद्धि, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और प्रसंस्करण के धीमी विकास से मेल नहीं करता है। क्षय को कम करने, विस्तार और विविधीकरण के लिए प्रोसेसिंग सबसे प्रभावी उपाय है। प्रसंस्करण गतिविधियां, ताजा उपज के लिए बाजार के अवसरों में वृद्धि करते हुए मूल्य वृद्धि करते हैं तथा पोस्टहर्स्ट हानियों को कम करते हैं। प्रसंस्करण, खेती की आय में वृद्धि, ग्रामीण रोजगार सृजन और विदेशी मुद्रा उत्पन्न करके कृषि उत्पादन प्रणालियों की व्यवहार्यता, लाभप्रदता और स्थिरता में सुधार लाता है। भारत विश्व में सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है (163 मिलियन टन i.e.विश्व उत्पादन का 14%) (एनएचबी 2014) परंतु फलों और सब्जियों का प्रसंस्करण विकसित देशों में की तुलना में बहुत कम है जबकि वैल्यू एडिशन 7% है (चीन में >20% और यूनाइटेड किंगडम में 88%)। प्रसंस्करण (मूल्यवर्धन सहित) में जीडीपी, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और उद्यमियों के लिए व्यवसाय के अवसरों में योगदान करने की जबरदस्त क्षमता है। भाविष्य में 35% मूल्य-वृद्धि और 10% प्रोसेसिंग के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामना किए जाने वाले विभिन्न चरणों और...

कट फ्लावर की कटाई के बाद देखभाल या हैंडलिंग कैसे करें।  In agriculture, post harvest handling is the stage of crop production immediately following harvest, including cooling, cleaning, sorting and packing. Post-harvest treatment largely determines final quality, whether a crop is sold for fresh consumption, or used as an ingredient in a processed food product. The most important goals of post-harvest handling are to keep the product cool, to avoid moisture loss and slow down undesirable chemical changes, and avoiding physical damage such as bruising. Initial post-harvest storage conditions are critical to maintain quality. Each crop has an optimum range for storage temperature and humidity. Also, certain crops cannot be effectively stored together, as unwanted chemical interactions can result. Various methods of high-speed cooling, and sophisticated refrigerated and atmosphere-controlled environments, are employed to prolong freshness, particularly in large-scale operations.  Vase Life of cut flowers:   A fresh flower is still a living specimen even though it has been cut from the plant. The vase life of cut flowers decline due to the following reasons. Inability of stems to absorb water due to blockage Excessive water loss from the cut flower A short supply of carbohydrate to support respiration Diseases Ethylene gas Room temperature and humidity Preservatives are used to extend the vase life of cut flowers. Floral preservatives are very effective in maintaining quality...