Resource Management

Modern irrigation management in the garden सिचाई की विभिन्न विधियों में टपक या बूंद-बूंद सिंचाई, माइक्रोस्प्रिंकलर, माइक्रोजैट आदि कुछ आधुनिक सिंचाई विधियाँ हैं, परन्तु फलदार बगीचों में टपक सिंचाई अंत्यत लाभकारी सिद्ध हुई है | टपक या बूंद-बूंद सिंचाई एक ऐसी सिंचाई विधि है जिसमें पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में, कम अंतराल पर, प्लास्टिक की नालियों द्वारा सीधा पौधों की जड़ों तक पहुँचाया जाता है | परम्परागत सतही सिंचाई द्वारा जल का उचित उपयोग नहीं हो पाता, क्योंकि अधिकतर पानी, जोकि पौधों को मिलना चाहिए, जमीन में रिस कर या वाष्पीकरण द्वारा व्यर्थ चला जाता है | अतः उपलब्ध जल का सही रिसाव कम हो कम हो और अधिक से अधिक पानी पौधे...

पादप उपचार (फाइटो रिमीडीएशन) - अपशिष्ट जल के कृषि में उपयोग करने के लिए एक समाधान  भारत के लिए अपशिष्ट जल का प्रबंधन विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में एक चुनौती बन गया है क्योंकि बुनियादी ढांचे के विकास ने जनसंख्या वृद्धि, औद्योगीकरण और शहरीकरण के साथ तालमेल नहीं बैठा पाया। परिणाम स्वरूप शहर की आवश्यकता पूरी करने में मीठे जल के संसाधनों पर भारी दबाव आ गया है। साथ ही जो अपशिष्ट जल उत्पन्न हो रहा है (जो की लगभग 70-80% ताजे पानी की आपूर्ति अपशिष्ट के रूप में वापस आता है ) जिससे निपटना और इसका प्रबंधन मुश्किल काम है। इस परिदृश्य के  निहितार्थ घरेलू , औद्योगिक और कृषि क्षेत्र...

जल संरक्षण के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाना - ड्रिप सिंचाई प्रणाली पर एक केस स्टडी Irrigation plays an important role in harvesting the desirable level of yield and supplementing the use efficiency of other inputs. Globally, irrigation water is becoming highly scarce due to over exploitation of water bodies for meeting the demand of increasing population. India, despite having the largest area under irrigation in the world, it suffers from severe shortage of water. The coverage of irrigation is about 47 percent of the gross cropped area.  The main reason for low coverage under irrigation is the low water use efficiency of existing conventional method of irrigations like flooding, which is widely practiced...

Cloud seeding: An instant solution to combat drought बादल पानी या बर्फ के क्रिस्टल की छोटी बूंदों के विन्यास हैं। वायुमंडलीय जल वाष्प के ठंडा होने पर या संघनन द्वारा बादल बनते हैं। वर्षा की कमी के कारण, दुनिया के कई हिस्सों में अक्सर पानी की आपूर्ति की कमी और जल संसाधनों पर तनाव की समस्या का सामना करना पड़ता है। नदियों में बढ़ते प्रदूषण से पानी की कमी हो जाती है और पीने योग्य पानी की लागत बढ़ जाती है। क्लाउड सीडिंग तकनीक का उपयोग वर्षा वृद्धि और जल संसाधन बहाली के लिए सूखे की समस्या को कम करने में मदद करने के लिए एक उपकरण के रूप में किया जा...

Subsurface Drainage Technology for Reclamation of Waterlogged Saline Vertisols पहले देश मे सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध न होने के कारण देश में फसल की उत्पादकता उसकी संभावित उपज से बहुत कम थी । उत्‍पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से देश के अलग अलग हिस्सों में नहरों का विस्तृत जाल बिछाकर सिंचाई का प्रबंध किया गया। हालाँकि यह पानी क्षेत्र मे प्रचलित फसल की जरूरत पूरी करने के लिए दिया गया था लेकिन ज्यादा पैमाने पे पानी की उपलब्धता को देखकर किसानों ने ज्यादा पानी लगने वाली फसलें जैसे गन्ना, केला इत्यादि को लगाना चालू किया। शुरू के कुछ वर्षों में किसानो को इससे बहुत लाभ  हुआ। सिंचाई की इस व्‍यवस्‍था के साथ...

Smart Water Management: A boon for agriculture पानी की बढ़ती मांग दुनिया के सामने एक चुनौती है, खासकर सबसे शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जहां पानी की कमी और पानी का तनाव महत्वपूर्ण समस्याएं हैं। पानी की कमी की स्थिति एक जगह पर तब होती है जब प्रति व्यक्ति प्रति दिन पानी की उपलब्धता 1000 घन मीटर से कम हो जाती है। भारत केे 2025 तक जल-तनावग्रस्त देश बनने की आशंका है, जिसके परिणामस्वरूप हमारे पास प्रति दिन प्रति व्यक्ति 1700 घन मीटर से कम पानी होगा। भारत में, कृषि पानी का प्रमुख उपभोक्ता (80%) है और कृषि उत्पादन के लिए पानी का उपयोग करते समय पानी के अतिरिक्त नुकसान की मात्रा...

स्वस्थानी नमी संरक्षण: स्मार्ट कृषि की दिशा में एक कदम Nowadays, there is a need to consider and take a note of the water management in agriculture. Ground water level is declining rapidly and surface water is also under dwindling situations due to increased evapo-transpiration as a result of global warming and disturbed rainfall pattern. Agriculture, being totally dependent on irrigation and rainfall being the sole scarce source of water, has led to multiple problems in the past several decades. It can be well illustrated through the meteorological data of ICAR-Indian Institute of Wheat & Barley Research, Karnal that there has been a reduction in the number of rainy days by 22%...

Management practices to Protect the rabi crops from untimely, excessive rain पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि रबी फसल के समय असामयिक वर्षा या अधिक वर्षा के कारण फसलों को भारी नुकसान पहुंचता है। इन परिस्थितियों में फसल को बचाने के लिए निम्नलिखित तुरंत एवं दूरगामी प्रबंधन की अवश्यकता होती है इन प्रबंधन क्रि‍याओं को किसान भाई अपनी जरूरत, परिस्थितियों एवं सोहलियत के अनुसार अपनाकर रबी फसलों को बचा सकतेे है या नुकसान को कम कर सकते है । खेत समतलीकरणः- असमतल खेत के विभिन्न भागों में पानी की कमी अथवा पानी की अधिकता होना दोनों ही स्थितियों में ये फसलों को नुकसान पंहुचाता है। खेतों के उंचा-नीचा होने के...