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कृषि‍ कार्य Tag

Agricultural Weather Forecasting and Crop Management किसी भी क्षेत्र का कृषि उत्पादन उस क्षेत्र विशेष में पाये जाने वाले बहुत से जैविक, अजैविक, भौतिक, सामाजिक व आर्थिक कारकों पर निर्भर करता है। मुख्यत: जैविक व अजैविक कारकों में मुख्य रूप से मौसमी तत्व, मिट्टी का स्वास्थय, जल संसाधन, फसलों के प्रकार व विभिन्न प्रजातियाँ, फसलों में होने वाली बीमारियाँ, कीट इत्यादि का प्रकोप आते है। सामाजिक व आर्थिक कारकों में कृषि प्रबन्धन को प्रभावित करने वाले कारक जैसे: कृषि लागत, संसाधनों का उपयोग, श्रमिकों की उपलब्धता, उर्वरक, रसायन, सिंचाई के जल की उपलब्धता, सरकारी नीतियाँ इत्यादि आते है। इन सभी उत्पादन के लिए जिम्मेदार कारकों में मौसमी कारक सबसे ऊपर आते है। मौसमी कारक फसल उत्पादन को दो तिहाई तक प्रभावित कर सकता है, अत: सतत उत्पादन लेने के लिए मौसमी कारकों की जानकारी अति आवश्यक है। इन कारकों की जानकारी यदि किसानों को पहले से ही मिल जाये तो किसान अपनी फसल में इन कारकों से होने वाले दुष्प्रभाव को कम कर सकता है। मौसम पूर्वानुमान मौसम के वर्तमान ओर पिछले मौसम की स्थिति का मूल्यांकन करके भविष्य में संभावित मौसम के बारे में पहले ही बता देने को ही मौसम पूर्वानुमान कहते है। यह वातावरण के अध्ययन में एक बहुत उपयोगी परिमाण है। यह भविष्य में किसानों, योजनाकारों, नीति निर्माताओं तथा कृषि वैज्ञानिकों के...

Major agricultural activities in fruit crops in July जुलाई का महीना फल वाली फसलों व अन्य फसलों के लिए महत्वपूर्ण महीनों में से एक है क्योकि, जुलाई का महीना जिसे आषाढ़-श्रावण भी कहते है। एक लम्बी गर्मी या सूखे मौसम के पश्चात तपती हुई धरती को ठंडा करने के लिए मानसून लेकर आता है व पेड़-पौधों को प्रकृति के आशीर्वाद स्वरुप वर्षा जल की प्राप्ति होती है। वर्षा के पश्चात सारा खेत-खलिहान हरियाली से भर उठता है। फल वाली फसलों में अनेक कृषि कार्य जुलाई के महीने में किये जाते है, जैसे- अनेक फल पौधों की रोपाई, बीजू पौधों के बीज की बुवाई, जल निकास की व्यवस्था, उर्वरक प्रबंध, खरपतवार नियंत्रण, अंतर्वर्ती फसलों की बुवाई, फल पौधों में कटिंग, बडिंग, कलम बांधने का काम, बरसात के मौसम में लगने वाले कीट व रोगो का नियंत्रण आदि कार्य किये जाते है, जिनका विवरण इस प्रकार से है- फल पौधों की रोपाई फल पौधों के नये बाग़ लगाने के लिए उचित दूरी पर उचित आकर के गड्ढे मई-जून के महीने में खोद लिए जाते हैं। इनमें बरसात के ठीक पहले दीमक के प्रकोप से बचने हेतु प्रत्येक गड्ढे में 200 ग्राम क्लोरवीर की धुल डालें। जो फल पौधे कलिकायन द्वारा तैयार किये जाते हैं वे लगभग एक साल में रोपाई योग्य हो जाते हैं। पौधे लगाने के...

Agricultural work to be carried out in the month of August धान फसल: गैर बासमती धान की अधि‍क उपज वाली कि‍स्‍मों में रोपाई के 25 से 30 दि‍न बाद 30 कि‍लो नाइट्रोजन यानि‍ 65 कि‍लो यूरि‍या प्रति‍ हैक्‍टेअर तथा बासमती कि‍स्‍मों मे 15 कि‍लोग्राम नाइट्रोजन (33 कि‍ग्रा यूरि‍या) प्रति‍ हैक्‍टेयर की टापॅ ड्रेसि‍ंग कर दें। इतनी ही मात्रा से दूसरी व अन्‍ति‍म टॉप ड्रेसि‍ंग रोपाई के 50-55 दि‍न बादे करें  ध्‍यान रखे की टॉप ड्रेसि‍ंग करते समय खेत मे पानी 2-3 सेमी से अधि‍क ना हो। धान के तना छेदक कीट की रोकथाम के लि‍ए, जब खेत में 4.5 सेंमी पानी हो, प्रति‍ हैक्‍टेयर 20 कि‍ग्रा कार्बोफयूरान दवा का प्रयोग करें अथवा क्‍लोरोपायरीफास 20 ईसी दवा 1.5 लि‍टर प्रति‍ हैक्‍टेयर की दर से 60 लीटर पानी मे घोलकर छि‍डकाव करें। सब्‍जि‍यॉं : गोभी की पूसा शरद,पूसा हाईब्रि‍ड 2 प्रजाति‍ की नर्सरी तैयार करें। अगेती गाजर जैसे पूसा वृष्‍टि‍ कि‍स्‍म की बुआई आरम्‍भ कर सकते हैं। कद्दू वर्गीय सब्‍जि‍यों में मचान बनाकर उस पर बेल चढाने से उपज में वृद्धि‍ होगी व स्‍वस्‍थ्‍य फल बनेंगें। बैंगन में थि‍रम 3 ग्राम या कैप्‍टान 3 ग्राम या कार्बेन्‍डाजि‍म 2 ग्राम प्रति‍ कि‍लोग्राम बीज की दर से उपचारि‍त करके बुआई करने से फोमाप्‍सि‍सं अंगमारी व फल वि‍गलन की रोकथाम करें। फल फसलें:   तराई क्षेत्रों में आम के पौधों पर गांठ बनाने वाले कीडे गॉल...