25 Sep Improved Varieties of Chickpea (gram
भारत में बोई जाने वाली चनें की उन्नत किस्में: Varieties Institute Yield (q/ha) Characters देशी किस्में पूसा 09 Pusa 209 भा.कृ.अ.सं. 22-30 पंजाब, हरयाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, उ.प्रदेश, प.बंगाल तथा बिहार के सिंचित व बारानी क्षेत्रों के लिए उत्तम किस्म है। पूसा 212 Pusa 212 भा.कृ.अ.सं. 18-28 मध्य भारत यानि राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश के बारानी क्षेत्रों के लिए सर्वोत्तम एक उकठा (wilt resistent) रोग रोधी किस्म है। पूसा 240 Pusa 240 भा.कृ.अ.सं. उ.प्रदेश, प.बंगाल तथा बिहार के सिंचित व बारानी क्षेत्रों के लिए उत्तम किस्म है। पूसा 244 Pusa 244 भा.कृ.अ.सं. 18-26 मध्य भारत के राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश राज्यों के लिए अच्छी किस्म है । यह उकठा (wilt) तथा तना गलन (stemrot) रोधी, बडे दाने बाली किस्म है। पूसा 256 Pusa 256 भा.कृ.अ.सं. 22-30 समस्त भारत के सिंचित व बारानी क्षेत्रों तथा सामान्य या देरी से बुआई के लिए उत्तम किस्म है । इसके दाने बहुत बडे होते हैं। पूसा 261 Pusa 261 भा.कृ.अ.सं. 18-27 पंजाब, हरयाणा, राजस्थान, उ.प्रदेश, तथा बिहार के लिए देर से बुआई व अंत: फसलों के लिए उत्तम किस्म है। यह अंगमारी रोगावरोधी, सुनहरे पीले दाने वाली, अर्धचंद्राकार व मध्यम लम्बी किस्म है। पूसा 267 Pusa 267 भा.कृ.अ.सं. 25-30 पंजाब, हरयाणा, राजस्थान, उ.प्रदेश, तथा बिहार के लिए उत्तम किस्म है। यह काबुली चने की उकठा रोग के लिए सहनशील किस्म है। पूसा 362 Pusa 362 भा.कृ.अ.सं. 40 उत्तरी भारत के राज्यों पंजाब, हरयाणा, राजस्थान, उ.प्रदेश के सिंचित व बारानी क्षेत्रों के लिए समय से अथवा देर से बुआई के लिए उपयुक्त उत्तम किस्म है । यह बहुत बडे दानों वाली...