16 Dec राजस्थान में शुष्क क्षेत्रीय फलों के रोग एवं निदान
Disease management in dry arid regional Fruits of Rajasthan राजस्थान में विभिन्न प्रकार के शुष्क क्षेत्रीय फल उगाये जाते हैं। जिनमें अनेक प्रकार के रोग लगते हैं जिससे इन फलों की गुणवत्ता तथा उपज दोनों प्रभावित होती हैं। इसलिए इन फलो के मुख्य रोगो का निदान करना अत्यंत आवश्यक है, जो निम्न प्रकार है : अ) बेर के मुख्य रोग 1. बेर में छाछया रोग इस रोग में सबसे पहले पौधों की टहनियों, पत्तियों एवं फलों पर सफ़ेद चूर्ण जैसी फफूंद दिखायी देती है जो बाद में पूरे फल पर फैल जाती है। रोग संक्रमित फल आकार में छोटे रह जाते हैं। निदान : इस रोग के लक्षण नजर आने पर 0.1 प्रतिशत केराथेन का 10-15 दिनों के अंतराल पर 3 बार छिड़काव करना चाहिए। केराथेन का एक छिड़काव सितम्बर माह के शुरू में रोग से बचाव के रूप में छिड़काव करना लाभप्रद होता है। इसके अतिरिक्त गंधक के चूर्ण का भुरकाव 15-20 दिनों के अंतराल पर करने से व्याधि नियंत्रित की जा सकती है। 2. बेर में आल्टरनेरिया फल सड़न: इस रोग में गहरे भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। रोगी फल छोटे रह जाते हैं। रोग ग्रसित फल शीघ्र टूट कर गिर जाते हैं जिससे उपज में भारी कमी हो जाती हैं। निदान : इसके नियंत्रण के लिए मेंकोजेब के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव लक्षण दिखाई देते ही करना...