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मि‍त्र कीट Tag

खेती में लाभकारी कीटों का आर्थिक महत्व Some insects are beneficial to agriculture, while many are destructive. About a third of the world's crop production depends directly or indirectly on insect pollination. About 80% of flowering plants on Earth are pollinated by insects. Examples of pollinators are bees (75-80%), butterflies, flies, beetles, thrips, etc. कीट पृथ्वी पर सबसे प्रमुख प्रजातियों में से एक हैं। दुनिया में कीटों की प्रजातियां बहुत तेजी से घट रही हैं, अगर कीट प्रजातियों के विलुप्त होने को नहीं रोका जा सका तो मानव जाति के अस्तित्व के लिए विनाशकारी परिणाम होंगे। सभी कीट हानिकारक नहीं होते, कुछ कीट खेेेती के लिए फायदेमंद होते हैं, जबकि कई विनाशकारी होते हैं। जब तक उनका जनसंख्या घनत्व निश्चित सीमा (ETL) को पार नहीं कर जाता उनसे होने वाले नुकसान की तुलना में लाभ अधिक हैं। दोनों कारणों से, कीटों का बहुत आर्थिक महत्व है और इसका अध्ययन कीट विज्ञान विभाग में एक महत्वपूर्ण विषय है। फोरेंसिक अध्ययन में भी कीट का उपयोग किया जाता है। कीट साक्ष्य अक्सर सबसे सटीक और कभी-कभी मृत्यु के बाद बीता हुआ समय निर्धारित करने का एकमात्र तरीका होता है। कीटों के लाभकारी प्रभाव औद्योगिक महत्व, औषधीय और अनुसंधान के कीट कई कीट जैसे मधुमक्खियाँ, रेशम-कीट और लाख कीट विभिन्न उत्पादों के उत्पादन के लिए जिम्मेदार हैं, जो मनुष्य...

Farmers benefit from the use of organic agents in crops किसान की आय दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु किसान भाईयों को अपनी फसलों पर होने वाले रासायनों एवं कीट नाशकों पर अत्यधिक खर्च को कम कर के लाभ प्राप्त किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में फसलों को कीटों, रोगों एवं खरपतवारों आदि से प्रति वर्ष 7 से 25 प्रतिशत की क्षति होती है। प्रदेश में 33 प्रतिशत क्षति खरपतवारों द्वारा, 26 प्रतिशत रोगों द्वारा, 20 प्रतिशत कीटों द्वारा, 7 प्रतिशत भण्डारण के कीटों द्वारा, 6 प्रतिशत चूहों द्वारा तथा 8 प्रतिशत अन्य कारकों से होती है। इस क्षति को रोकने के लिए कृषि रक्षा रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है प्रदेश में कीटनाशकों की (टेक्निकल ग्रेड) औसत खपत 256 ग्राम प्रति हे0 है, जो देश के औसत खपत (टेक्निकल ग्रेड) 380 ग्राम प्रति हेक्टेयर से कम है। इस औसत खपत में 58.7 प्रतिशत फफॅूदनाशक तथा 3.3 प्रतिशत चूहानाशक एवं धूम्रक सम्मिलित है। रसायनिक कृषि रक्षा रसायनों के प्रयोग से जहॉ कीटों, रोगों एवं खरपतवारों में सहनशक्ति पैदा हो रही है वहीं कीटों के प्राकृतिक शत्रु (मित्र कीट) प्रभावित हो रहे है, वहीं कीटनाशको के अवशेष खाद्य पदार्थों, मिट्टी, जल एवं वायु को प्रदूषित कर रहे है। रसायनिक कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए जैविक कीटनाशी/ जैविक एजेन्ट एवं...

मृदा स्वास्थ्य में केंचुओं की भूमिका  An incredible diversity of organisms make up the soil food web. They range in size from the tiniest one-celled bacteria, algae, fungi, and protozoa, to the more complex nematodes and micro-arthropods, to the visible earthworms, insects, small vertebrates, and plants. As these organisms eat, grow, and move through the soil, they make it possible to have clean water, clean air, healthy plants, and moderated water flow. The soil food web, earthworms need the least introduction. Most people become familiar with these soft, slimy, invertebrates at a young age. Earthworms are hermaphrodites, meaning that they exhibit both male and female characteristics. They are major decomposers of dead and decomposing organic matter, and derive their nutrition from the bacteria and fungi that grow upon these materials. They fragment organic matter and make major contributions to recycling the nutrients it contains. Earthworms occur in most temperate soils and many tropical soils. They are divided into 23 families, more than 700 genera, and more than 7,000 species. They range from an inch to two yards in length and are found seasonally at all depths in the soil. In terms of biomass and overall activity, earthworms dominate the world of soil invertebrates, including arthropods. Beneficial function of Earthworms in soil Earthworms dramatically alter soil structure,...

ट्राइकोडर्मा: टिकाऊ कृषि के लिए पर्यावरण के अनुकूल कवक The novel technologies in all areas of agriculture have improved agricultural production, but some modern practices affect the environment. The recent challenge faced by advanced farming is to achieve higher yields in environment-friendly manner. Thus, there is an immediate need to find eco-friendly solutions such as wider application of biocontrol agents. Among various types of species being used as biocontrol agents, including fungi and bacteria, fungal genus Trichoderma produces different kinds of enzymes which play a major role in biocontrol activity like degradation of cell wall, tolerance to biotic or abiotic stresses, hyphal growth etc. Many research has proved that the bio agents bring the disease suppression with no environmental hazards. Fungi in genus Trichoderma sp. have been known since 1920s for their capability to function as biocontrol agents (BCA) against plant pathogens. Trichoderma fungus are known not only for the control of plant disease but also for their capability to enhance plant growth and development, elevated reproductive ability, capacity to modify the rhizosphere. Trichoderma is capable to grow under adverse conditions, competence in the use of nutrients, strong aggressiveness against phytopathogenic fungi and efficacy in supporting plant growth and enhanced defense mechanisms. Trichoderma can work as biocontrol agents in several ways :- It may grow faster...

Biopesticides: An Eco-friendly Tool for Crop Production जैव-कीटनाशक पारिभाषिक शब्द उन यौगिकों को परिभाषित करता है जो कि व्यापक रासायनिक कीटनाशकों के बजाय विशिष्ट जैविक प्रभाव के माध्यम से कृषि कीटों का प्रबंधन करने के लिए उपयोग किये जाते है। यह जैव नियंत्रण घटकों - यानी प्राकृतिक जीवों या प्राकृतिक सामग्री (जैसे कि जानवरों, पौधों, बैक्टीरिया, या कुछ खनिजों) से उत्पन्न पदार्थों को संदर्भित करता है, जिनमें उनके जीन या चयापचय पदार्थ शामिल हैं, जो कि कीटनाशकों को नियंत्रित करने के लिए उपयोग मे लिए जाते हैं। एफ.ए.ओ. की परिभाषा के अनुसार, जैव कीटनाशकों में वो जैव नियंत्रण घटक शामिल होते हैं जो निष्क्रिय घटक हैं जो कि जैव नियंत्रण घटकों जैसे कि पैरासिटोइड, शिकारी, और कीट रोगजनक निमेटोड की कई प्रजातियां के विपरीत सक्रिय रूप से कीटों (हानिकारक जीव) की तलाश करते हैं। जैव कीटनाशकों के प्रकारः 1. सूक्ष्मजीव कीटनाशकः अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण संस्था (ईपीए) कि परिभाषा के अनुसार जैव कीटनाशक इस तरह के कीटनाशक हैं जो कुछ निश्चित प्रकार के प्राकृतिक जीवों जैसे  पशु, पौधे एवं  जीवाणुओं तथा  कुछ खनिजों से  प्राप्त  होते हैं। सूक्ष्मजीव कीटनाशकों में सक्रिय संघटक के रूप में एक सूक्ष्मजीव, जीवाणु, कवक, विषाणु, प्रोटोजोएन या शैवाल होते हैं। सूक्ष्मजीव कीटनाशक कई अलग-अलग प्रकार की कीटों को नियंत्रित कर सकते हैं। इन सूक्ष्मजीव जैव कीटनाशकों के अलग-अलग सक्रिय संघटक लक्ष्य कीट के लिए...

Entomopathogenic nematodes (EPNs) in biological pest control कीटों के आक्रमण को रोकने के लिए कीटनाशकों का उपयोग दिन - प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है । जिसके कई दुष्प्रभाव सामने आ रहे है । इन दुष्प्रभावों को कम करने में जैविक कीट नियंत्रण अहंम भूमिका निभाता है । जैविक नियंत्रण का उपयोग जीव विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में किया गया है, खासकर कीटनाशक और पौधों की वृद्धि के लिए । फसलों के नाशीजीवों को नियंत्रित करने के लिए दूसरे जीवो को प्रयोग में लाना जैव निंयत्रण कहलाता है । वर्तमान में ईपीएन जैविक नियंत्रण कारक दुनिया भर में कई महत्वपूर्ण कीटो को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है । ताकि कई महत्वपूर्ण कीट कीटनाशकों को नियंत्रित किया जा सके । कीटनाशको को नियंत्रित करने के लिए ईपीएन का उपयोग एक संभावित गैर रासायनिक दृश्टिकोण है। ईपीएन जैविक नियंत्रण गुणों के अनुकूलतम संतुलन रखने वाले एकमात्र कीट परजीवी सूत्रकृमि है । किसी विशेष कीट को नियंत्रित करने के लिए एक ईपीएन का चयन विभिन्न कारको पर आधारित है । सूत्रकृमि की मेजबान श्रृंखला, मेजबान खोज, पर्यावरणीय कारको की सहनशीलता, उत्तरजीविता और प्रभावशीलता । मृदा बनावट, तापमान और मेजबान उपलब्धता को उनके वितरण का निर्धारण करने के लिए महत्वपूर्ण कारक माना जाता है । एंटोमोपैथोजेनिक नेमाटोड्स (ईपीएन) क्या है ? ईपीएन, सूत्रकृमियो (धागे या कीड़ो)...

Pest management in crops by ecological engineering फसलों में कीट प्रबंधन के लिए पारिस्थितिक अभियांत्रिकी  हाल ही में एक नए आयाम के रूप में उभरी हे जिसमे मुख्यतया कृषिगत क्रियाओ द्वारा कीटो के निवास स्थान में हेर फेर किया जाता हे, ताकि हानिकारक कीटो का जैविक नियत्रण हो सके । यह विधि आधुनिक काल में प्रचलित अन्य तरीको जैसे संश्लेषित कीटनाशको, किट प्रतिरोधी किस्मो इत्यादि से परे, पारिस्थितिक ज्ञान पर आधारित हे। वर्तमान में बढ़ते हुए कीटनाशी रसायनो के अंधाधुन्द उपयोग से कृषि पारिस्थितिक तंत्र में मित्र कीटो की जैव विविधता में काफी कमी आई हे I इसीलिए जरुरी हे की फसलों में मित्र कीटो की जैव विविधता में बढ़ावा देने वाली क्रियाये अपने जाये जो भविष्य में कृषि क्षेत्र  में सतत  विकास के लक्ष्यो को प्राप्त करने में सक्षम हो सके I पारिस्थितिक आभियांत्रिकी क्या हे? पारिस्थितिक अभियांत्रिकी कीट नियंत्रण की एक पारिस्थितिकीय विधि हे जिसमे पराग या नेक्टर उपलब्ध करने वाली फसलों को मुख्या फसल के किनारो पर तथा मध्य में पाश फसलों, किटकारी पोधो, अंतराशस्य, मिश्रित शस्य को ढकने वाली फसलों के रूप में लगाया जाता हे ताकि यह फैसले अधिक से अधिक संख्या में मित्र कीटो को आकर्षित कर हानिकारक कीटो की समष्टि को कम कर सके।   इस विधि में मित्र कीटो को छोटा पशुधन समझा जाता हे तथा उनके लिए...

Microbial Pest management of crop diseases  अत्यधिक रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग के दुष्परिणाम अब सामने आने लगे है । किसानों को यह अनुभव होने लगा है कि रासायनिक कीटनाशक अब उन्हीं शत्रु  कीटों पर बेअसर हो रहे है, जिनपर वो रसायन प्रयोग कर पहले छुटकारा पा जाते थे। इसीलि‍ए अब किसान फसल सुरक्षा के अन्य विकल्प तलाशने लगे है | अतः यह बात अब समझ में आने लगी है कि प्रकृति के जितने समीप रहकर खेती की जाय उतनी ही समस्या कम आएगी । सूक्ष्म जैविक कीट प्रबंधन (Microbial Pest Management)  एक प्राकृतिक पारिस्थितिक घटना चक्र है , जिसमे नाशीजीवों के प्रबंधन में सफलतापूर्वक प्रयोग में लाया जा सकता है और यह एक संतुलित, स्थाई और किफायती कीट प्रबंधन का साधन हो सकता है| सुक्ष्जीवियों  का नाशीजीवों के लिए उपयोग सूक्ष्म-जैविक प्रबंधन कहलाता है | यह जैविक प्रबंधन का नया पहलु है, जिसमे नाशीजीवों के रोगाणुओं का उपयोग उनके नियंत्रण के लिए किया जाता है| इसके लिए उपयोग में लाये जाने वाले सूक्ष्मजीवों को जैविक कीटनाशक कहते है,जो वस्तुतः कम संख्या में प्रकृति में उपलब्ध रहते है| व्यवहारिक रूप से सूक्ष्म-जैविक प्रबंधन के लिए कीटों के प्राकृतिक शत्रुओं को ढूढ़कर ,पाल पोसकर (by rearing) और उनकी संख्या में वृद्धि करके उन्हें नाशीजीवों के प्रबंधन हेतु उपयोग में लाया जाता है| प्रकृति में बहुत से ऐसे सूक्ष्मजीव...