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लाभदायक खेती Tag

धान के खेत में मछली पालन यानी Rice Fish Farming खेती का ऐसा तरीका है जिसमें किसान धान की फसल के साथ उसी खेत के पानी का इस्तेमाल मछली पालन के लिए भी करता है। सही खेत और सही प्रबंधन हो तो एक ही जमीन से धान के साथ मछली का अतिरिक्त उत्पादन लिया जा सकता है। इसी वजह से पिछले कुछ वर्षों में Rice Fish Farming, Paddy Fish Farming और Integrated Rice-Fish Farming जैसे तरीकों पर किसानों और कृषि संस्थानों का ध्यान बढ़ा है। यह कोई नया विचार भी नहीं है। भारत में paddy-cum-fish culture पर वैज्ञानिक स्तर पर कई दशकों से काम किया जा रहा है। ICAR के दस्तावेजों में paddy-cum-fish culture के package of practices के विकास का उल्लेख 1970 से मिलता है। लेकिन एक बात शुरुआत में साफ समझ लेना जरूरी है। धान के खेत में मछली डालने का मतलब यह नहीं है कि हर किसान की कमाई अपने आप दोगुनी हो जाएगी। फायदा खेत में पानी की उपलब्धता, मछली की प्रजाति, stocking, मछली की survival और growth, चारा, श्रम, धान की खेती की लागत और स्थानीय बाजार भाव पर निर्भर करता है। सीधी बात: Rice-Fish Farming का फायदा यह है कि किसान एक ही खेत और पानी से एक से ज्यादा उत्पादन लेने की कोशिश करता है।...

Reaper binder: suitable machine for wheat harvesting रबी की सबसे महत्‍वपूर्ण फसलों में से गेंहॅू  एक है । वर्ष 2016-17 में देश में कुल 31 मिलियन हेक्‍टेयर क्षेत्रफल में गेंहॅू बोया गया तथा 98 मिलियन टन गेंहॅू का उत्‍पादन हुआ और गेंहॅू की औसत उपज 3161 कुन्‍तल/हेक्‍टेयर रही । गेंहॅू  की फसल तैयार होते-होते मौसम बदल जाता है और तेज हवाओं एवं बारिश की शंका बनी रहती है । ऐसे में किसान की चिंता होती है कि पकी फसल को काटकर जल्‍द से जल्‍द घर में लाया जाए । गेंहॅू को काटकर काटते समय ही मढ़ाई करके लाने के लिए कम्‍बाइंड हारबेस्‍टर का उपयोग बढ़ता जा रहा है । इस समय कम्‍बाइंड हारबेस्‍टर का प्रयोग रबी फसल की कटाई में खूब हो रहा है । थ्रेसिंग से निकले भूसे को खेत में छोड़ देती है । जिसकी मात्रा करीब 4 से 5 टन / हेक्‍टेयर होती है । साथ ही कम्‍बाइंड हारबेस्‍टर करीब 30 सेमी ऊपर से फसल को काटता है और कटाई के बाद फसल का ठॅूठ खेत में खड़ा रह जाता है । इससे बड़ा नुकसान होता हैं । एक तो फसल से मिलने वाले अवशेष अर्थात भूसे का नुकसान होता है जो जानवरों के खाने में प्रयोग होता है जो कि‍मती भी है और जिसकी बहुत कमी रहती है और दुसरा, ...

Modern agricultural techniques for higher production and income. भारत में खाद्य समृद्धि के बाबजूद, जनसंख्या वद्धि के कारण देश मे खाद्यान्‍न की कमी लगातार बनी हुई है इसलिए कृषि से जुड़े लोगो का अधिक उपज और समृद्ध खेती की तरफ रुझान आवश्‍सक है ।समृद्ध खेती भूमि की अवस्था, उपलब्ध उपकरण और खेत में पिछले वर्ष लगी फसल पर निर्भर करती है। खेती को लाभदायक बनाने के लिए दो ही उपाय हैं - पहला उत्पादन को बढ़ाएँ और दूसरा लागत को कम करें। कृषि की लागत नियत्रिंत करने के लिए कृषि के मुख्य आदान जैसे - बीज, उर्वरक, पोध संरक्षण रसायन और सिंचाई तंत्र का संतुलित एवं आधुनिक विधियो द्वारा प्रयोग करना चाहिए। कृषि की हरेक इकाई का सही समय पर सही तरह से उपयोग करके , इनका अपव्यय रोककर व इसके विकल्प ढुन्ड़कर खेती को लाभदायक बनाना चाहिए । निम्नलिखित सुझावो से किसानो को बेहतर एवं किफायती कृषि करने के साथ-साथ अधकि उपज लेने में मदद मिल सकती हैं । अच्छे किस्म के बीजो  का प्रयोग, बीजोपचार एवं समय पर बुआई कहते है जैसा आप बोओगे वैसा पाओगे इसलिए बीज एक ऐसा आदान है जिसकी  समृद्ध खेती में काफी अहम भूमिका होती है । बीज  के ऊपर लगभग 10 से 15 प्रतिशत लागत आती है और अच्छी पैदावार लाने के लिए यह महत्वर्पूण है की बीज उन्नत...

Save oil and energy in farming खेती में खनिज तेल की बहुत ज्यादा खपत है. तेल के दाम दिन प्रतिदिन बढते ही जा रहे है अतः यह आवश्यक हो गया है की इनका उपयोग किफ़ायत के साथ किया जाए. किसान भाइयो को ट्रेक्टर और इंजनों में डीजल की खपत कम करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. ये बातें निम्न हैं: प्रत्येक ट्रेक्टर और इंजन का निर्माता नए मशीन के साथ निर्देश पुस्तिका देता है. मशीनों के उपयोग करने से पहले उसकी निर्देश पुस्तिका को ध्यान से पढ़ें और उसमे लिखी सलाह के अनुसार ही मशीन का प्रयोग करें. इंजन  चालू  करने  पर यदि टैपित का शोर  सुने पड़ता है तो इसका मतलब है इंजन में  हवा कम जा रही है जिसके कारण डीजल की खपत बढ़ जाएगी .इसलिए टैपित से आवाज़ आने पर उसे फिर से बंधवाना चाहिए. इंजन से काला धुआं निकलने का मतलब है ज्यादा डीजल खर्च हो रहा है. इंजेक्टर या इन्जेक्सन पम्प की कोई खराबी इसका कारण हो सकती है. अतः ट्रैक्टरों में ६०० घंटे प्रयोग के बाद इंजेक्टर की जाँच करवा कर उसे फिर से बन्धवाएँ. इंजन से काम लेना शुरू करने पर  कुछ काला धुआं निकलता है पर यह जल्दी ही स्वयं साफ हो जाता है. यदि इंजेक्टर और इन्जेक्सन पम्प ठीक होने पर भी काला...

Increase the age of farming machines by taking proper care.  अक्सर देखा जाता है की मशीनों का उपयोग करने के बाद इसे जैसे तैसे छोड़ दिया जाता है. खेती  में प्रयुक्त होने वाले मशीनों को ज्यादा देखभाल की जरुरत होती है क्योंकि इनका संपर्क हमेशा मिटटी एवं पानी से होता रहता है. चूँकि इनमे अधिकतर पुर्जे घूमने वाले होते है अतः इनका थोड़े थोड़े दिनों में साफ सफाई करते रहना चाहिए. बहुत सारे किसान भाई मशीनों को किराए पर चलते है. अतः थोडा अच्छे से इस्तेमाल एवं धयान देने पर इन मशीनों की उम्र बढ़ सकती है . निचे कुछ मशिनो के इस्तेमाल एवं रख रखाव से सम्बंधित जानकारी दी जा रही है जिसका थोडा सा भी अनुसरण करने से किसान भाइयों क फायदा हो सकता है. मशीन का नाम रख रखाव सावधानियाँ कल्टीवेटर           आमतौर से सभी नट तथा बोल्टों की जांच करते रहना चाहिए जिससे वे हमेशा टाइट फिट रहें। सबसे बढि़या तरीका यह है कि प्रतिदिन कार्य प्रारम्भ करने से पहले इनकी जांच कर लें। फालों को घिस जाने पर पलट देना चाहिए या फिर नये फाल लगाने चाहिए। प्रतिदिनि कार्य समाप्त करने के पश्चात तथा यन्त्र के उचित भण्डारण हेतु यन्त्र की पालिश की गयी सतहों पर ग्रीस लगाना चाहिए, जिससे कि यंत्र में जंग न लगने पाये। आपरेटर को मशीन के विवरण के बारे में...