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Crop Cultivation
नरेन्द्र कुमार पाण्डेय
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Potato production by scientific technique in plateau areas
देश के पठारी क्षेत्रों का बड़ा भाग झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडू, उड़ीसा तथा आन्ध्रप्रदेश में है। इन राज्यों में आलू की खेती के लिए क्षेत्र-वृद्धि की अधिक संभावनाएं हैं। परन्तु अभी यहां की प्रति हेक्टेयर औसत आलू उत्पादन मात्र 13.6 टन है जो कि राष्ट्रीय औसत उत्पादन 21.0 टन प्रति हेक्टेयर से काफी कम है।
आलू की पैदावार में कमी के मुख्य कारण (i) उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के तापमान से यहां का तापमान काफी अधिक है (ii) बीज स्तर निम्न अर्थात् बढि़या किस्म का बीज उपलब्ध न होना तथा (iii) आलू की खेती के लिए सुधरे व वैज्ञानिक तकनीकों की अज्ञानता के कारण प्रयोग न करना।
पठारी क्षेत्रों में वैज्ञानिक तकनीक द्वारा आलू उत्पादन के लिए निम्नलिखित तकनीकी को अपनाएं।
आलू की किस्मे
इस क्षेत्र में आलू की कुफरी लवकार एवं कुफरी पुखराज किस्म को उगाने की सिफारिश की गई है। इसके अतिरिक्त कुफरी चन्द्रमुखी (अगेती), कुफरी ज्योति (मध्य पिछेती) किस्मों से खरीफ तथा रबी मौसम में अच्छी पैदावार प्राप्त होती है। कुछ वर्ष पूर्व जारी की गई कुफरी सूर्या (अगेती) किस्म भी पठारी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी गई है एवं इसकी औसत पैदावार 250-300 किवंटल/हेक्टेयर है।
बीज प्राप्ति स्त्रोत
अच्छी तरह से अंकुरित 25-40 ग्राम भार का बीज प्रयोग करें। बीज हमेशा विश्वसनीय स्त्रोतों...