09 Jan Diet management for milch animals
दुधारू पशुओं के लिए आहार प्रबंधन डेयरी व्यवसाय के लिए उत्तम नस्ल के साथ-साथ आहार प्रबंध अति आवश्यक है। उचित आहार प्रबंध से न केवल पशु अधिक दूध देते हैं बल्कि उसकी शारीरिक बढ़वार, प्रजनन क्षमता एवं स्वास्थ्य पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है। लाभप्रद डेयरी व्यवसाय हेेतुु पशु को बचपन से लेकर वृद्धि की विभिन्न अवस्थओ, प्रजनन काल एवं उत्पादन काल के दौरान समुचित पोषण उपलब्ध होना चाहिए। बछड़े-बछड़ियों की उनकी आरंभिक अवस्था में वृद्धि एवं मृत्यूू, गर्भकाल में माँ केे आहार प्रबंधन से प्रभावित होता है । बछड़ियों को जन्म के 2 घंटे के अंदर माँ का खीस पिलाना आवश्यक है। खीस की मात्रा निर्धारण बछड़ियों के शारीरिक भार पर निर्भर करता है। जब बछड़ियों को माँ के साथ रखा जाता हैं, तो आवश्यकतानुसार वे माँ से पोषण ले लेती हैं। परन्तु यदि कृत्रिम विधि से पाला जा रहा है, तो इस बात का महत्व और भी अधिक हो जाता है। आरंभिक अवस्था में दूध बच्चे के लिए सम्पूर्ण आहार का कार्य करता है इसलिए उसे समुचित मात्रा में दूध उपलब्ध होना चाहिए। नवजात के पालन - पोषण में सबसे महत्वपूर्ण स्थान खीस पिलाने का है। खीस न मिलने से बछड़े-बछियों में रोगो से लड़ने की क्षमता का विकास नही हो पाता हैै, साथ ही बीमार होने की संभावना बढ़ जाती...