06 Jun कृषि मौसम पूर्वानुमान एवं फसल प्रबन्धन
Agricultural Weather Forecasting and Crop Management किसी भी क्षेत्र का कृषि उत्पादन उस क्षेत्र विशेष में पाये जाने वाले बहुत से जैविक, अजैविक, भौतिक, सामाजिक व आर्थिक कारकों पर निर्भर करता है। मुख्यत: जैविक व अजैविक कारकों में मुख्य रूप से मौसमी तत्व, मिट्टी का स्वास्थय, जल संसाधन, फसलों के प्रकार व विभिन्न प्रजातियाँ, फसलों में होने वाली बीमारियाँ, कीट इत्यादि का प्रकोप आते है। सामाजिक व आर्थिक कारकों में कृषि प्रबन्धन को प्रभावित करने वाले कारक जैसे: कृषि लागत, संसाधनों का उपयोग, श्रमिकों की उपलब्धता, उर्वरक, रसायन, सिंचाई के जल की उपलब्धता, सरकारी नीतियाँ इत्यादि आते है। इन सभी उत्पादन के लिए जिम्मेदार कारकों में मौसमी कारक सबसे ऊपर आते है। मौसमी कारक फसल उत्पादन को दो तिहाई तक प्रभावित कर सकता है, अत: सतत उत्पादन लेने के लिए मौसमी कारकों की जानकारी अति आवश्यक है। इन कारकों की जानकारी यदि किसानों को पहले से ही मिल जाये तो किसान अपनी फसल में इन कारकों से होने वाले दुष्प्रभाव को कम कर सकता है। मौसम पूर्वानुमान मौसम के वर्तमान ओर पिछले मौसम की स्थिति का मूल्यांकन करके भविष्य में संभावित मौसम के बारे में पहले ही बता देने को ही मौसम पूर्वानुमान कहते है। यह वातावरण के अध्ययन में एक बहुत उपयोगी परिमाण है। यह भविष्य में किसानों, योजनाकारों, नीति निर्माताओं तथा कृषि वैज्ञानिकों के...