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कृषि‍ रसायन Tag

बागवानी फसलों में कीटनाशकों के दुष्प्रभाव को कम करना - एक समाधान उद्यानिक फसलों में कीटनाशी रसायनों के अधिक प्रयोग से कई तरह की आर्थिक, पर्यावरणीय एवं स्वास्थ संबंधी समस्यायें सामने आ रही हैं। इन फसलों में फसल सुंरक्षा के लिए रसायनिक कीटनाशियों पर आवश्यकता से आधिक निर्भरता के कारण खेती के लागत खर्च बढ़ते चले जा रहे है जिससे किसानों का आर्थिक मुनाफा कम हो रहा है। कीटनाशकों के अनियमित एवं अनियंत्रित प्रयोग के कारण कई तरह के पर्यावरणीय समस्यायें उत्पन्न हो रही है यथा हानिकारक कीटाे के कीटनाशकोे के प्रति प्रतिरोधक क्षमता का विकसित होना, हानिकारक कीटों के प्राकृतिक शत्रुओं एवं परभक्षी जीव जन्तुओं की संख्या में कमी होना एवं पर्यावरण प्रदुषित होना शामिल है। स्वास्थ संबंधी समस्यायें मूलरूप से इसके व्यवहार की सावधानियाें एवं प्रयोग के जनकारी के आभाव के कारण हो रही है जिससे प्रयोग करने वाले किसानों को शारीरिक खतरों का सामना करना पड़ता रहता है। अनुसंशित मात्रा से अधिक प्रयोग करने के कारण इसके अवशेष सिंचाई के जल के साथ नालों के माध्यम से जल स्त्रोतों यथा तालाब, नदी, नहर और अंततः समुद्र में बहकर जातेे है जिससे इन जल स्त्रोतों के प्रदुषित होने का खतरा तो होता ही है साथ ही जलीय जीव जंतु भी आहत हो रहे है, जिससे हमारा संपूर्ण पारिस्थितकी तंत्र भी अव्यवस्थित...

कृषि में इलेक्ट्रोसपिनिंग नैनोफिब्रिज के अनुप्रयोग  Nanofibres are able to form a highly porous mesh and their large surface-to-volume ratio improves performance for many applications. Electrospinning has the unique ability to produce nanofibres of different materials in various fibrous assemblies. Electrospinning was first patented in the US in 1902. However, the process was largely forgotten until the 1990s. With interest in the field of nanoscience and nanotechnology, researchers began new investigations of nanofiber production using electrospinning (Seeram et al. 2006). The number of patents and applications for processes and applications based on electrospinning has also grown in recent years. Types of Electrospinning Although fibers produced by different electrospinning methods have attracted increasing attention in the field of biomedical applications, challenges persist for the selection of an appropriate method, as well as for optimizing multiple parameters to generate robust cargo loaded nanofibres. Electrospinning techniques can be classified into five categories: Blend electrospinning Coaxial electrospinning Emulsion electrospinning Melt electrospinning Gas jet electrospinning Blend electrospinning can be used to develop nanofibres with burst release, while co-axial and emulsion electrospinning can be used to generate core-shell nanofibres that can assist in sustained drug release. Melt electrospinning is a cleaner fabrication method that has been used extensively to produce highly ordered electrospun nanofibres. However, melt electrospinning results in the generation of fibers with a larger...

Safety measures while using insecticides पारंपरिक कृषि प्रणाली में उत्पादन कम होने के कारण किसानों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता था अतः उनका आकर्षण आधुनिक कृषि प्रणाली के तरफ बढ़ा जि‍समें किसान उच्च पैदावार वाली कि‍स्‍मों , सिंचाई सुवि‍धा, रासायनि‍क उर्वरकाेें, तथा कीटनाशक का उपयोग करके फसल उत्पादन में कई गुना वृद्धी करने में सफल रहा । उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि के साथ ही कीट का प्रकोप बढ़ा जिसके परिणाम स्वरूप कीट द्वारा होने वाले आर्थिक नुकसान में काफी वृद्धि हुई | एक अनुमान के अनुसार हरित क्रांति के पहले वर्ष 1960 से पूर्व कीट द्वारा होने वाला औसतन नुकसान (सभी मुख्य फसलों को मिलाकर) 7.2 % था जबकि हरित क्रांति के बाद वर्ष 2000 के बाद यह बढ़कर 23.3 % हो गया (धालीवाल, 2007) |  इतनी बड़ी मात्रा में होने वाले नुकसान को रोकने के लिए किसान रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग करता है। रसायनिक कीटनाशक की लोकप्रियता का मुख्य कारण है कि यह कीट प्रबंधन के तरीके जैसे भौतिक प्रबंधन, जैविक प्रबंधन, सांस्कृतिक प्रबंधन के तुलना में शीघ्र कीट  का नियंत्रण करता है | अधिक प्रकोप होने पर रासायनिक कीटनाशक केवल एकमात्र नियंत्रण का साधन संभव हो पाता है | अतः वर्तमान समय में रासायनिक कीटनाशक के बिना कृषि की कल्पना करना असंभव है | कीटनाशक जहर के अधि‍क प्रयोग से  प्रदूषण,...

Pesticides and Insecticides scenario in India भारत में सत्तर के दशक में हरित क्रांती के पश्चात सघन खेती का दौर शुरू हुआ जिसने फसलो की संकर किस्मो की बुआई की जाने लगी। इन संकर किस्मो मेंं कीट तथा रोगो के प्रति सहिष्णुता कम होने से इन पर कीट तथा रोगो का असर ज्यादा होता है अतः इन पर कीटनाशी तथा रोगनाशी दवाओ का ज्यादा बार छिडकाव करना पडता है तथा ज्यादा बार इस्तेमाल करना पडता है । इसके अलावा कीटो  में कीट नाशियो  के प्रति प्रतिबंधक शक्ती निर्माण होती है। इसलि‍ए फसलो पर हर बार नयी कीटनाशी तथा रोगनाशी दवाओ का ज्यादा बार छिडकाव करना पडता है तथा ज्यादा बार इस्तेमाल करना पडता है।   भारत में कीटनाशी दवाओ का उत्पादन १३९ ०००  मेट्रिक टन प्रति वर्ष है जिसने से २१९ मेट्रिक टन  कीटनाशी दवाये तकनिकी ग्रेड कि है ,जब कि आज बाजार में ४००० दवाये उपलब्ध है। भारत में कीटनाशी दवाओ का इस्तेमाल ४१.८३३ मेट्रिक टन है ।  भारत में निर्मित कुल कीटनाशी तथा रोगनाशी दवाओ का ५० प्रतिशत हिस्सा देश में ही इस्तेमाल होता है तथा बाकी निर्यात होता है। टाटा स्ट्रॅटेजी नामक संस्था द्वारा किये गये एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत मे निर्मित कुल दवाओ मे से ६० प्रतिशत  कीटनाशी दवाये है , फफूंदनाशी दवाये १८ प्रतिशत , खरपतवार दवाये १६ प्रतिशत...

Justified use and precautions of pesticide chemicals किटनाशको का स्वभाव जहरीला होने के कारण उनके उपयोग के दौरान किसानो, खेत में काम करने वाले मजदूरो एवं जनवरो के स्वास्थ पर बुरा असर होने का खतरा बना रहता है। किटनाशको का संतुलित एवं अनुचित मात्रा पर्यावरणीय घटकों पर प्रतिकुल प्रभाव डालता है। इसलिए किटनाशको को कृषि वैज्ञानिक के सलाह परामर्श से न्यायसंगत उपयोग व स्वास्थ की सुरक्षा को देखते हुऐ इस्तेमाल करना चाहिए। लेकिन बहुत से किसानों को किटनाशको कि उचित मात्रा व सुरक्षा के बारे में ज्ञान नही होता है। या इसे महत्व नही देते है। किटनाशको से स्वास्थ कि सुरक्षा एवं प्र्यावरण को टिकाऊ बनाये रखने के लिए कृषि प्रसार सेवको, उद्योगो एवं खेतो में काम करने वाले मजदूरों का यह एक कर्तव्य है। कि किटनाशको से सुरक्षा के उपायो को जन जन तक पहुँचाये। फुटपाथ डीलरों या गैर-लाइसेंस प्राप्त व्यक्ति से कीटनाशक न खरीदें। पूरे सीजन के लिए थोक में कीटनाशक न खरीदें। कंटेनर पर बिना अनुमदित लेबल के कीटनाशक न खरीदें। कभी भी समाप्त हो चुकी अवधि वाला कीटनाशक न खरीदें। लीक/ढीले/गैर-सीलबंद कंटेनर वाले कीटनाशक न खरीदें। घर के परिसर में कीटनाशक कभी भी संग्रहित न करें। कभी भी मूल कंटेनर से कीटनाशक दूसरे कंटेनर में स्थानांतरित न करें। खरपतवारनाशक के साथ कीटनाशक को संग्रहित न करें। बच्चों को संग्रहण वाली जगह पर प्रवेश न करने दें। कीटनाशक धूप या...

Precautions in using agricultural chemicals आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती के युग में अधिक पैदावार लेने के लिए फसल सुरक्षा अति आवश्‍यक है। कीटनाशी (Insecticide), फफूंदनाशी (Fungicides) एवं अन्य कृषि रसायन जो फसल सुरक्षा में प्रयोग होते हैं, प्राय: बहुत जहरीले व हानिकारक होते हैं। इन रसायनों का प्रयोग करते समय सावधानी रखना भी उतना ही आवष्यक हैं, जितना कि इनसे फसल सुरक्षा व अधिक पैदावार एवं अच्छी गुणवत्ताा वाली फसल लेकर अधिक लाभ उठाना। फसलों की पैदावार में कमी होने के कई कारणो में से कीट व बिमारियाँ मुख्य भूमिका निभाते है। अधिक उत्पादन लेने हेतु बुआई से पूर्व बीजोपचार तथा बुवाई के उपरान्त कीट नियन्त्रण एवं समय-समय पर बीमारियों से बचाव हेतु विभिन्न रासायनिक दवाओं का प्रयोग किया जाता है। जिनमें से अधिकांश रसायन अति विषाक्त होते है। जितनी आवश्‍यकता इनके प्रयोग करने की हैं उससे कहीं अधिक आवष्यकता इनके प्रयोग में सावधानी रखने की है। जैवनाशकों (antibiotic) को निर्धारित मात्रा से अधिक या गलत तरीके से या  असावधानी से प्रयोग करने पर कई हानिकारक परिणाम हो सकते हैं। जैवनाशक रसायन न केवल मनुष्यों बल्कि पशुओं पक्षियों इत्यादि के लिए भी अति हानिकारक होते है। इन जैवनाशक रसायनों के प्रयोग सें किसी भी प्रकार की दुर्घटना या हानि से बचने के लिए या इनका पर्यावरण पर कोई बुरा असर ना पड़ें इसलिए कुछ बातों का...