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खरपतवारनाशी Tag

Justified use and precautions of pesticide chemicals किटनाशको का स्वभाव जहरीला होने के कारण उनके उपयोग के दौरान किसानो, खेत में काम करने वाले मजदूरो एवं जनवरो के स्वास्थ पर बुरा असर होने का खतरा बना रहता है। किटनाशको का संतुलित एवं अनुचित मात्रा पर्यावरणीय घटकों पर प्रतिकुल प्रभाव डालता है। इसलिए किटनाशको को कृषि वैज्ञानिक के सलाह परामर्श से न्यायसंगत उपयोग व स्वास्थ की सुरक्षा को देखते हुऐ इस्तेमाल करना चाहिए। लेकिन बहुत से किसानों को किटनाशको कि उचित मात्रा व सुरक्षा के बारे में ज्ञान नही होता है। या इसे महत्व नही देते है। किटनाशको से स्वास्थ कि सुरक्षा एवं प्र्यावरण को टिकाऊ बनाये रखने के लिए कृषि प्रसार सेवको, उद्योगो एवं खेतो में काम करने वाले मजदूरों का यह एक कर्तव्य है। कि किटनाशको से सुरक्षा के उपायो को जन जन तक पहुँचाये। फुटपाथ डीलरों या गैर-लाइसेंस प्राप्त व्यक्ति से कीटनाशक न खरीदें। पूरे सीजन के लिए थोक में कीटनाशक न खरीदें। कंटेनर पर बिना अनुमदित लेबल के कीटनाशक न खरीदें। कभी भी समाप्त हो चुकी अवधि वाला कीटनाशक न खरीदें। लीक/ढीले/गैर-सीलबंद कंटेनर वाले कीटनाशक न खरीदें। घर के परिसर में कीटनाशक कभी भी संग्रहित न करें। कभी भी मूल कंटेनर से कीटनाशक दूसरे कंटेनर में स्थानांतरित न करें। खरपतवारनाशक के साथ कीटनाशक को संग्रहित न करें। बच्चों को संग्रहण वाली जगह पर प्रवेश न करने दें। कीटनाशक धूप या...

Weed management in major cereals and pulses crops of Kharif season खरीफ मौसम कीे प्रमुख धान्य एवं दलहनी फसलों में बाजरा, मक्का, ज्वार, अरहर, मूंग, उडद एवं ग्वार की खेती की जाती है। किसान, उन्नत किस्म के बीज, उपयुक्त उर्वरक, नियमित सिंचाई तथा पादप सुरक्षा के विभिन्न उपाय एवं  उत्पादन की वैैज्ञानिक विधियॉ अपनाकर भ्‍ाी कृषि से भरपूर उत्‍पादन प्राप्त करने में अब भी पूर्णतया सफल नहीं हो पा रहे हैं। इसका एकमात्र कारण है कि वे उन्नतशील साधनों को अपनाने के साथ-साथ खरपतवारों के नियंत्रण पर पूर्ण ध्यान नहीं देते। यदि किसान को अपनी फसल से भरपूर उपज प्राप्त करनी है तो इन फसलों के शत्रु खरपतवारों पर नियंत्रण पाने के महत्व को समझकर उनको समय पर नष्ट करना होगा। खरपतवारों की उपस्थिति फसल की उपज को 35-37 प्रतिशत तक कम कर देते हैं। खरीफ मौसम में खरपतवारों का नियंत्रण निराई-गुड़ाई एवं रसायनों के प्रयोग द्वारा आसानी से किया जा सकता है।    1. निराई गुड़ाई खरीफ मौसम की प्रमुख धान्य एवं दलहनी फसलों की अच्छी बढवार के लिए खरपतवारों को निकालनें के लिए निराई-गुड़ाई करें, इससें खरपतवार तो नष्ट होतें ही है, साथ ही मिटटी में हवा का संचार होता है और उपरी पपडी के टूटनें से नमी का संचार बढता है। वर्षां के अभाव में निराई-गुड़ाई वरदान से कम नही होती। यह खरपतवारों पर नियंत्रण पाने...

Precautions in using agricultural chemicals आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती के युग में अधिक पैदावार लेने के लिए फसल सुरक्षा अति आवश्‍यक है। कीटनाशी (Insecticide), फफूंदनाशी (Fungicides) एवं अन्य कृषि रसायन जो फसल सुरक्षा में प्रयोग होते हैं, प्राय: बहुत जहरीले व हानिकारक होते हैं। इन रसायनों का प्रयोग करते समय सावधानी रखना भी उतना ही आवष्यक हैं, जितना कि इनसे फसल सुरक्षा व अधिक पैदावार एवं अच्छी गुणवत्ताा वाली फसल लेकर अधिक लाभ उठाना। फसलों की पैदावार में कमी होने के कई कारणो में से कीट व बिमारियाँ मुख्य भूमिका निभाते है। अधिक उत्पादन लेने हेतु बुआई से पूर्व बीजोपचार तथा बुवाई के उपरान्त कीट नियन्त्रण एवं समय-समय पर बीमारियों से बचाव हेतु विभिन्न रासायनिक दवाओं का प्रयोग किया जाता है। जिनमें से अधिकांश रसायन अति विषाक्त होते है। जितनी आवश्‍यकता इनके प्रयोग करने की हैं उससे कहीं अधिक आवष्यकता इनके प्रयोग में सावधानी रखने की है। जैवनाशकों (antibiotic) को निर्धारित मात्रा से अधिक या गलत तरीके से या  असावधानी से प्रयोग करने पर कई हानिकारक परिणाम हो सकते हैं। जैवनाशक रसायन न केवल मनुष्यों बल्कि पशुओं पक्षियों इत्यादि के लिए भी अति हानिकारक होते है। इन जैवनाशक रसायनों के प्रयोग सें किसी भी प्रकार की दुर्घटना या हानि से बचने के लिए या इनका पर्यावरण पर कोई बुरा असर ना पड़ें इसलिए कुछ बातों का...