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खाद्य सुरक्षा Tag

बानयार्ड मिल्लेट - पोषण सुरक्षा की भविष्य The crop of Sanwa is capable of withstanding difficult conditions and giving high yield. Being a C4 crop, its grain and fodder yield is higher than other cereals. The duration of harvesting of sorghum is 75 to 100 days and the average yield is up to 2200 kg/ha. बानयार्ड मिल्लेट - पोषण सुरक्षा की भविष्य खाद्य सुरक्षा की परिभाषा सन 1970 के हरित क्रांति से ही विकसित होती आई है। खाद्य सुरक्षा का अर्थ शुरुवात मे हर व्यक्ति को अन्न पर्याप्त मात्र और वहनयोग मे मिलना था। परिस्थिति बदली है की खाद्य सुरक्षा अन्न पर्याप्त  मात्रा के साथ साथ  अच्छे गुणवत्ता से मिलना भी है। ऐसे अन्न देश के हर नागरिक पूरे गरिमा के साथ पाने का तरीका ढूंढ निकालना भी ज़रूरी है। भारतीय सरकार लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के माध्यम से पौषिक खाद्यन्नों को रियायती मूल्य मे व्यापक जनसंख्या को प्रदान करती आई है। इतने महतपूर्ण कदमो के बाद भी देश में थोड़े बहुत जनसंख्या कुपोषण और मोटापा (Obesity) से पीड़ित है। भारत मे एक तिहाई बच्चों की आबादी कुपोषण और एक तिहाई महिला अनीमिया से ग्रस्त हैं। इसके उपरांत देश के 14% महिला और 18% पुरुषों की आबादी मोटापा के वश में है।  इसी के साथ साथ लोगों में डायबिटीज़ की रोग भी तीव्र गति...

Agriculture in India, challenges and opportunities for global food security विकासशील और विकसित दोनों देशों के लिए कृषि हमेशा से एक महत्वपूर्ण स्तंभ और विकास और अर्थव्यवस्था का चालक रहा है। भारत भी, 1960 के दशक में हरित क्रांति की गति के कारण उत्पादन और उत्पादकता के मामले में कई गुना बढ़ गया है। हालांकि, अब समय आ गया है कि हम हरित क्रांति के बाद के कृषि परिदृश्य और मिट्टी, पौधे और मानव स्वास्थ्य की उभरती चिंता पर फिर से विचार करें। हमें अपनी वैज्ञानिक, तकनीकी और सामाजिक चुनौतियों को फिर से परिभाषित करने की जरूरत है। भारत में कृषि की वर्तमान स्थिति 1.27 बिलियन की आबादी और 159.7 मिलियन हेक्टेयर भूमि के साथ भारत विशाल कृषि-पारिस्थितिक विविधता का घर है। विश्व के भूमि क्षेत्र का केवल 2.4 प्रतिशत होने के कारण, भारत में सभी दर्ज प्रजातियों का लगभग 8% हिस्सा है, जिसमें 45,000 से अधिक पौधे और 91,000 पशु प्रजातियां शामिल हैं। भारत दूध, पशुधन का शीर्ष उत्पादक है। मसाले, दालें, चाय, काजू और जूट, और चावल, गेहूं, तिलहन, फल ​​औरसब्जियां, गन्ना और कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक। देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन 296.65 मिलियन टन होने का अनुमान है, जिसमें चावल का उत्पादन 118.43 मिलियन टन, गेहूं 107.59 मिलियन टन, पोषक/ मोटा अनाज 47.48 मिलियन टन, दलहन 23.15 मिलियन टन, तिलहन...

Wheat's contribution in prevention of malnutrition विश्व में गेहूँ सबसे व्यापक रूप से खेती की जाने वाली खाद्यान्न फसल है। यह दुनिया की 40 प्रतिशत आबादी के लिए कुल आहार कैलोरी एवं प्रोटीन का 20 प्रतिशत योगदान देने वाला एक मुख्य भोजन है। भारत में उत्पादित कुल खाद्यान्न में 36.7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ खाद्य टोकरी की खपत में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा गेहूँ को बड़े पैमाने पर खरीदा जाता है, जिसे खाने के लिए अधिकांश आबादी को वितरित किया जाता है। अनाजों से मिलने वाली ऊर्जा में गेहूँ सबसे सस्ते स्रोतों में से एक है, इसकी खपत से प्रोटीन (20 प्रतिशत) और कैलोरी (19 प्रतिशत) उपयोग का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है। मनुष्यों के समुचित विकास एवं उचित वृद्धि के लिए पौष्टिक आहार अत्यन्त महत्वपूर्ण है। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए शरीर के चयापचय को बनाए रखने के अलावा, बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। भोजन हमारी दैनिक उपापचय आवश्यकता को पूरा करने के लिए ऊर्जा, प्रोटीन, आवश्यक वसा, विटामिन, एंटीऑक्सिडेंट एवं खनिज लवण प्रदान करता है। इनमें से अधिकांश को मानव शरीर में संश्लेषित नहीं किया जा सकता है, इसलिए आहार के माध्यम से पूरा किया जाता है। इसके अतिरिक्त, इसमें मौजूद पोषण-विरोधी तत्व मानव...

Biofortification technology to improve food security and fight malnutrition सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी शरीर को विभिन्न तरीकों से प्रभावित करती है जिसे दूसरे शब्दों में कुपोषण भी कहते हैं।  कुपोषण हमारे दैनिक आहार में पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है। दुनिया की लगभग आधी आबादी को अपने आहार में सूक्ष्म पोषक तत्वों, प्रोटीन, विटामिन और अन्य आवश्यक तत्वों की कमी का सामना करना पड़ता है। कुपोषण मानव की क्षमता के विकास में बाधक तो है ही उसके साथ-साथ ये देश में खासकर औरतों एवं बच्चों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को भी रोकता है। मनुष्यों को उनकी सेहत के लिए कम से कम 22 खनिज तत्वों की आवश्यकता होती है। उपयुक्त आहार द्वारा इसकी आपूर्ति की जा सकती है। एक अनुमान के अनुसार दुनिया के 60 अरब लोगों में से 60 प्रतिशत में लौह तत्व की कमी है, 30 प्रतिशत से अधिक में जिंक तत्व की कमी, 30 प्रतिशत में आयोडीन और 15 प्रतिशत जनसंख्या में सेलेनियम की कमी है। सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के परिणामस्वरूप उच्च रुग्णता, उच्च मृत्यु दर, कम संज्ञानात्मक क्षमता, कार्य क्षमता में हास, और विकास क्षमता में कमी जैसी समस्‍या होती है। बायोफोर्टिफिकेशन रणनीतियों को सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के लिए नियोजित किया जा सकता है। विकासशील देशों में पोषक तत्वों की कमी की...