07 Jul बारिश के मौसम में मवेशियों मे सूक्ष्म जीव जनित रोगों का हर्बल विधियों द्वारा उपचार
Treatment of microbial diseases in cattle during the rainy season by herbal methods भारत की अर्थव्यवस्था ज्यादातर पशुधन पर निर्भर करती है, जो हर साल भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 4.8-6.5 प्रतिशत का योगदान करता है। भारत कृषि प्रधान देश है, पशुधन विभिन्न साधनों के रूप में भारत के लोगों के सामाजिक उत्थान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में गाय, भैंस, बकरी और भेड़ों का ज्यादातर पालन किया जाता है। 2012 की पशुधन जनगणना के अनुसार भारत में 19 करोड़ गाय 10.8 करोड़ भैंस, 65 करोड़ भेड़ तथा 135 करोड बकरियाँ हैं। 2012 वर्ष के आकड़ों के अनुसार, बड़े जुगाली करने वाले पशु (गाय व भैंस) 50.5 प्रतिशत तथा छोटे जुगाली (भेड़ व बकरी) 39.1 प्रतिशत भारत के पशुधन में योगदान देते हैं (कृषि मत्रालय, 19वीं पशुधन गणना 2012 के अनुसार)। आमतौर पर इन पशुओं में होने वाली बिमारियाँ खुरपका एवं मुंहपका, गलघौटू, बीक्यू, बिसहरिया, टिटेनस, आर.पी., पी.पी.आर. ब्लू टंग, कृमि सक्रमंण हैं। इन बिमारियों का प्रमुख कारण अनुचित टीकाकरण, बुरी प्रबंधन प्रथायें, दुषित चराई, भीड़भाड़ तथा स्वस्थ और रोग्रस्त पशुओं का मिश्रण हो सकता है। अधिकतर निम्न स्तर भारतीय किसान 5-6 पशु पालते हैं। अधिकांश किसान अपनी आर्थिक स्थिति के कारण आधुनिक ऐलोपैथिक दवाओं का खर्च नहीं उठा सकते, जिसका परिणाम कम पशुधन उत्पादन तथा पशुओं के खराब स्वस्थ से...