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गेहूँ का रोग Tag

गेहूँ का सेहूँ रोग, जिसे सीड गॉल, ईयर कॉकल या कॉकल रोग भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण सूत्रकृमि-जनित रोग है। इसका प्रमुख कारक Anguina tritici नामक गेहूँ का सीड-गॉल सूत्रकृमि है। रोग में सामान्य दानों के स्थान पर काले या भूरे रंग की सूखी हुई गॉल (मिनियाँ/सेहूँ) बन जाती हैं। संक्रमित खेत में पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है और दाने की गुणवत्ता तथा उपज दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। भारत में यह रोग विशेष रूप से पुराने अथवा स्वयं-सहेजे गए बीज के लगातार उपयोग वाले क्षेत्रों में समस्या बन सकता है। [1–4] रोग के नाम और टुंडू रोग संबंध स्थानीय स्तर पर इस रोग के लिए सेहूँ, धानक, कॉकल तथा ईयर कॉकल जैसे नाम प्रयुक्त होते हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से ‘टुंडू/येलो स्लाइम’ रोग को केवल Anguina tritici का पर्याय मानना उचित नहीं है। Anguina tritici के साथ Rathayibacter tritici जैसे जीवाणु की सहभागिता होने पर टुंडू या येलो-स्लाइम लक्षण विकसित हो सकते हैं। इसलिए खेत में रोग की पहचान करते समय सूत्रकृमि और जीवाणु-सम्बन्धी लक्षणों में अंतर करना उपयोगी है। [1] रोग का कारक [caption id="attachment_11856" align="aligncenter" width="300"] Anguina Tritici microscopic view[/caption] इस रोग का प्रमुख कारक Anguina tritici है। इसके द्वितीय अवस्था के किशोर (J2) संक्रमण की दृष्टि से महत्वपूर्ण अवस्था हैं। संक्रमित गॉल सूखने की अवस्था में लंबे...