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Drumstick Gum: Brief Review   Drumstick gum is the exudate product of the stems of Moringa oleifer. Drumstick Gum Major role in nutritional dietary supplements due to Vitamin B2, B6 and C (220 mg), Potassium (259 mg), Calcium (440 mg), Protein (6.6 g), Carotenoids, Vitamin A (6.780 mg) Plays. Drumstick Gum: Brief Review   हरे "जैव-आधारित" नवीकरणीय सामग्री के रूप में, प्राकृतिक गोंद  ने अपनी कम लागत, पहुंच, उत्कृष्ट गुणों और संरचनात्मक विविधता के कारण बहुत रुचि प्राप्त की है। प्राकृतिक गोंद पॉलीसेकेराइड ने हाल ही में पर्यावरण, खाद्य प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और दवा उद्योगों में उनके संभावित उपयोग के लिए बहुत अधिक ध्यान प्राप्त कर लिया है। सहजन गोंद (वैज्ञानिक रूप से मोरिंगा ओलिफेरा के रूप में जाना जाता है) एक प्राकृतिक बहुलक है जो मोनो-जेनेरिक परिवार (मोरिंगेसी) की विशेषता है।  सहजन गोंद को हॉर्सरैडिश ट्री, बेन ऑयल और सहजन के रूप में जाना जाता है। यह पश्चिमी और उप हिमालयी इलाकों, अफ्रीका, भारत, एशिया और पाकिस्तान से उत्पन्न हुआ है और आगे मध्य अमेरिका, कंबोडिया, कैरेबियन द्वीप समूह, फिलीपींस और उत्तरी और दक्षिण अमेरिका में फैला हुआ है।   सहजन गोंद, मोरिंगा ओलिफर के तनों का एक्सयूडेट उत्पाद है। सहजन गोंद विटामिन बी 2, बी 6 और सी (220 मिलीग्राम), पोटेशियम (259 मिलीग्राम), कैल्शियम (440 मिलीग्राम), प्रोटीन (6.6 ग्राम), कैरोटीनॉयड, विटामिन ए (6.780...

Lac production in India - brief introduction भारत में फसलों की खेती के साथ-साथ कीटों का पालन भी बडे पैमाने पर कि‍या जाता है। कीटों की खेती में मुख्यतः मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन और लाख कीटों की खेती प्रमुख  है। लाख कीट का पालन थोड़ा तकनीकी ज्ञान के साथ सीमित समय में आसानी से कि‍या जा सकता है। लाख शब्द संस्कृत के शब्द ‘‘ लाक्षा ’से व्युतपन हुआ  है जिसका अर्थ है  सौ हज़ार और इसके उत्पादन में बड़ी संख्या में कीड़े शामिल होते हैं। वैदिक कल से लाख कीट और उसके मेजबान पौधे का वर्णन- बटिया मोनोस्पर्म (लाक्षारु) अथर्ववेद में दर्ज है। महाभारत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कौरवों ने लाक्षागृह को आग लगाकर  पांडवों को शारीरिक रूप से खत्म करने के मकसद से अत्यधिक ज्वलनशील लाखगृह  (लाख  घर) का निर्माण किया था। कच्चे लाख उत्पादन की स्थिति : भारत 20,000 लाख टन  के वार्षिक उत्पादन के साथ, कच्चे लाख के उत्पादन के मामले में दुनिया भर में अग्रणी लाख उत्पादक है। दुनिया के कुल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत भारत में है और इसका 75 प्रतिशत मुख्य रूप से संसाधित और अर्ध-संसाधित रूपों में सौ से अधिक देशों को निर्यात किया जाता है। भारत के बाद, थाईलैंड में लाख का उत्पादन अधिक होता है। इनके साथ-साथ इंडोनेशिया, चीन, म्यांमार, फिलीपींस, वियतनाम और कंबोडिया...

Gum karaya, a non timber forest produce भारतीय उपमहाद्वीप जैविक विविधता और वनस्पतियों का प्रमुख केंद्र है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक जीवन में कई वन उत्पादों का महत्वपूर्ण स्‍थान है। ये वन उत्पाद काष्ठ और अकाष्ठ वन उत्पादन में वर्गीकृत है। अकाष्‍ठ उत्‍पादों में विभिन्न पेड़ाेें की जड़, तने और फल से प्राप्‍त प्राकृतिक रेजिन, गोंद, रिसाव, पत्तिया (तेंदू),  गंध-द्रव्य, तेल शामिल हैं । अकाष्‍ठ उत्‍पाद मसाले, दवाइयों, रंजक और टैनिन की प्राकृतिक स्रोत हैं। ज्यादातर अकाष्ठ वन उत्पादन निर्यात मुद्रा अर्जक हैं और कई स्थानीय लघु उद्योगों के लिए अच्छी तरह से अनुकूल हैं भारत में लाख और गम के उत्पादन वाले पेड़ों की संख्या अधिकता में हैं जिससे रेजिन और गम का रिसाव होता हैं। कराया गम एक गैर-लकड़ी के वन उत्पाद है। कराया गम की स्टेरिकुलिया प्रजातियों के पेड़ों से प्राप्त सूखे पीब है। कराया गोंद और कराया वृक्ष कराया गोंद का स्थानीय नामः - कुल्लू, कडाया, कडु, गलगला, गेंदूली, तापसी, पानरख, कंडोल के सलाद, गम कराया, एस यूरें और एस विलोसा का सूखा पीब है। यह इंडोनेशिया में एस यूरसीलाटा और एस फॉइडाडा , अफ्रीका में एसटीगेरा और ऑस्ट्रेलिया में एस कौदाटा से भी एकत्र किया गया है। यहांं भी इसे भारतीय ट्रेगैंटल नाम से जाना जाता है।              विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग काराया गम के...

Cultivation of Kusumi Natural Resin (Kusumi Lac) लाख (Lac) एक प्राकृतिक राल है जो मादा लाख कीट द्वारा मुख्य रुप से प्रजनन के पश्‍चात स्त्राव के फलस्वरुप बनता है। लाख कीट की दो प्रजातियां होती हैं जिन्हें कुसमी और रंगीनी कहते हैं। प्रत्येक प्रजाति से वर्ष में दो फसलें ली जाती हैं लेकिन पष्चिम बंगाल के कुछ समुद्री क्षेत्र के आस-पास बिलायती सिरिस पर एक वर्ष में तीन फसलें भी ली जाती हैं। लाख की खेती ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत है। हमारे देष में कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहोॅं लाख का उत्पादन नियमित रुप से होता आ रहा है तथा दूसरे क्षेत्र भी हैं जहाॅं संसाधन तो उपलब्ध हैं लेकिन अज्ञानता के कारण संसाधनों का उपयोग नहीं हो रहा है। लाख उत्पादक क्षेत्रों में भी आधुनिक तकनीकी ज्ञान न होने के कारण उत्पादन उतना नहीं हो रहा है जितना हो सकता है। लाख की खेती के लिए मुख्य पोषक वृक्षों/ पौधों में कुसुम, पलास, बेर एवं सेमियालता का नाम प्रचलित है। इसके अलावा भी कई अन्य वृक्षों/ पौधों जैसे एकेसिया ऐरेबिका, ग्रेविया, अल्बीजिया ल्युसिडा, अल्बीजिया प्रोसेरा, सोरिया रोबस्टा, सोरिया तालुरा, कजानस कजन पर लाख का उत्पादन किया जाता है परन्‍तू इन वृक्षों या पौधों पर लाख का उत्पादन वाणिज्यिकी रुप से बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। लाख पोषक वृक्षों में कुसुम (श्‍लेइचेरा ओलिओसा) वृक्ष का...

गुग्‍गल की खेती कैसे करें गुगल एक छोटा पेड है जिसके पत्‍ते छोटे और एकान्‍तर सरल होते हैं। यह सिर्फ वर्षा ऋतु में ही वृद्धि करता है तथा इसी समय इस पर पत्‍ते दिखाई देते हैं। शेष समय यानि सर्दी तथा गर्मी के मौसम में इसकी वृद्धि अवरूद्ध हो जाती है तथा पर्णहीन हो जाता है। सामान्‍यत: गुग्‍गल का पेड 3-4 मीटर ऊंचा होता है। इसके तने से सफेद रंग का दूध निकलता है जो इसका का उपयोगी भाग है। प्राकृतिक रूप से गुग्‍गल भारत के कर्नाटक,राजस्‍थान,गुजरात तथा मघ्‍यप्रदेश राज्‍यों में उगता है। भारत में गुग्‍गल विलुप्‍तावस्‍था के कगार पर आ गया है, अत: बडे क्षेत्रों मे इसकी खेती करने की जरूरत है। हमारे देश में गुग्‍गल की मांग अधिक तथा उत्‍पादन कम होने के कारण अफगानिस्‍तान व पाकिस्‍तान से इसका आयात किया जाता है।  गुग्‍गल उगाने के लिए जलवायु एवं भूमि: गुग्‍गल उगाने के लिए उष्‍णकटिबंधीय,कम वर्षा वाले तथा शुष्‍क जलवायु वाले क्षेत्र उपयुक्‍त होते हैं। यह अन्‍य छायादार वृक्षों के साथ अधिक वृद्धि करता है। अत: इसे वनो या बगीचों में, खेतो की मेढों पर, छायादार पेडों के नीचे, फैंसिगं के रूप में लगाया जा सकता है। रेतीली, पहाडी मृदा जिसमें जल निथार अच्‍छा हो,इसके लिए बहुत उपयुक्‍त है। यह शुष्‍क स्‍थानों में भी अच्‍छी वृद्धि करता है इसलिए असिंचित क्षेत्रों...