Agriculture Knowledge for Everyone

जटामांसी Tag

शीतोष्ण जलवायु में पाए जाने वाले दस प्रमुख औषधीय पोधें  भारतवर्ष में जड़ी-बूटियों का इतिहास बहुत पुराना है। हमारे ग्रन्थों, वेदों व पुराणों में इनका विस्तृत वर्णन है। अनादिकाल से हम वनौषधियों के लिए वनों पर निर्भर रहे हैं। जड़ी-बूटियां कई लोगों की आजीविका का वैकल्पिक आधार भी रही हैं। जलवायु, मिट्टी व तापमान में विविधता के कारण औषधीय महत्व की अधिकांश जड़ी-बूटियां भारतवर्ष में पाई जाती हैं। शीतोष्ण जलवायु में पाए जाने वाले मुख्य जड़ी-बूटी पौधों की विस्तृत जानकारी नीचे दी जा रही है। 1. चिरायता  वानस्पतिक नाम: स्वर्शिया चिरायता (Swertia chirayita) प्रचलित नाम: चिरायता, चिराता, अर्धतिक्ता, किरातिक्त नाढीतिक्ता                   औषधीय महत्व: चिरायता भारत वर्ष का एक बहुमूल्य औषधीय पौधा है तथा ज्वर रोग में इसके प्रभाव की प्रशंसा एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति में की गई है। इसके औषधीय महत्व का वर्णन इण्डियन फार्माकोपिया के अलावा ब्रिटिश एवं अमेरिकन फार्माकोपिया में भी किया गया है। यह मूलत: शरीर की जीवाणुरोधी शक्ति को बढ़ाता है। प्रात:काल खाली पेट लिया गया चिरायता का काढ़ा या चूर्ण या चिरायता भिगोया जल लेने से उदरस्थ कृमि तुरन्त समाप्त हो जाते हैं तथा एक माह तक ऐसा करने पर कुष्ठ रोग पर भी नियन्त्रण पाया जा सकता है। यह मलेरिया, टायफायड, एनफलुएन्जा जैसे अलग-अलग कारणों से होने वाले ज्वरों में समान रूप से लाभकारी है। कालाजार नामक जीर्ण ज्वर रोग,...

सामान्य बीमारियों के लिए प्रमुख औषधीय पौधे प्राचीन काल से ही मनुष्य सामान्य रोगों के शमन के लिए अपने दैनिक जीवन में औषधीय पौधों का प्रयोग करते आ रहा है। इस आधार पर सामान्य रोगो के चिकित्सा को सर्वसुलभ तथा सस्ता बनाया जा सकता है। अपने पूरे जीवनकल में हम इन औषधीय पौधों का उपयोग किसी न किसी रूप में करते हैं। इनमें मारक गुण काम और शोधक अधिक होता है। ये औषधीय पौधे रोगों को दबाती नहीं, वरन उखाड़ती और भागती हैं।  जीवन-शक्ति संवर्धक औषधीय पौधे हमारे आस-पास ही खेतों, जंगलों में बहुताय उपलब्ध हैं। सही औषधीय पौधे उपुक्त क्षेत्र से, उपयुक्त मौसम में एकत्र की जाए, उन्हें सही ढंग से रखा और प्रयुक्त किया जाए तो आज भी इनका चमत्कारी प्रभाव देखा जा सकता है। आहार एवं औषधि प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त होने वाली औषधीय पौधे अपने आपमें पूर्ण हैं, इनमें प्रत्येक की संरचना अनेक यौगिकों, क्षारों, रसायनों एवं खनिजों के सम्मिश्रण से हुई हैं, इसलिए इनमें प्रत्येक औषधीय पौधे परिपूर्ण हैं। इनसे कठिन रोगों की सरल चिकित्सा संभव हैं। प्रत्येक औषधीय पौधे स्वयं में समग्र हैं। इनका प्रयोग वैधकीय सलाह से ही करें। कुछ औषधीय पौधों को अपने घर के आस-पास या गृहवाटिका में लगा कर उनका लाभ ले सकते हैं। 1. ब्राम्ही (बाकोपा मोनिएरी) - यह पौधा भारत के सभी प्रदेशों...