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डयूरम की किस्में Tag

कठिया (डयूरम) गेहूँ की विशेषताएं, उत्पाद एवं उन्नतशील प्रजातियाँ  भारत के लगभग सभी प्रान्तों मे गेहूँ की खेती सफलतापूर्वक की जाती है। भारत मे खेती करने के लिए मुख्य रूप मे दो तरह के गेहूँ प्रचलित है एक साधारण गेहूँ जिसको एस्टीवम कहते है और दूसरा कठिया गेहूँ जिसे डयूरम कहते है। गेहूँ के कुल उत्पादन में सामान्य गेहूँ (एस्टीवम) 95 प्रतिशत, एवं कठिया गेहूँ (डयूरम) का लगभग 4 प्रतिशत योगदान है। कठिया गेहूँ ट्रिटिकम परिवार मे दूसरे स्तर का महत्वपूर्ण गेहूँ है। गेहूँ के तीनो उप-परिवारो (एस्टीवम, डयूरम, डायकोकम) मे उत्पादन की दृष्टि से डयूरम का दूसरा स्थान है। भारतवर्ष मे कठिया गेहूँ की खेती लगभग 25 लाख हैक्टर में की जाती है। इसकी खेती मध्य भारत के मालवांचल, गुजरात का सौराष्ट्र और कठियावाड, राजस्थान का कोटा, मालावाड तथा उदयपुर, उत्तर प्रदेश के बुंदेलखण्ड मे की जाती है। ऐसे क्षेत्र जहां सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नही है के लिए कठिया गेहूँ एक अच्छा विकल्प हो सकता है क्योकि इसमे सामान्य गेहूँ के मुकाबले सूखा सहन करने की क्षमता अधिक होती है। कठिया गेहूँ के पौधे, सामान्य गेहूँ के मुकाबले मोटे होते है एवं इसकी पतियों भी चौडी होती है। इसके दाने अधिक कठोर, बडे आकार के, सुनहरी रंग के तथा अर्द्धपारदर्शी होते है। इसके अलावा कठिया गेहूँ मे ग्लूटन प्रोटीन की मात्रा भी...