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तना गलन रोग Tag

Engineering of Stem rot resistance in oil seeds through biotechnology   ति‍लहनी फसलों का एक अति मत्वपूर्ण फफूंदी कारक रोग, स्क्लेरोटिनिया तना सड़न / गलन नाम से जाना जाता हैं। इसी रोग को उदाहरण के रूप में लेते हुए प्रस्तुत समीक्षा इस तथ्य को विस्तार से प्रस्तुत करेगी की, किस प्रकार कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, किसानों की समस्याओं का प्रभावी समाधान ढूंढ़ने में सक्षम है । स्क्लेरोटिनिया स्क्लेरोटियोरम बैक्‍ट्रीया जनित तना गलन रोग स्क्लेरोटिनिया स्क्लेरोटियोरम (Sclerotinia sclerotiorum (Lib) de Bary) जीवाणु एक नेक्रोट्रॉफिक पैथोजन है , यानि‍ यह अपना भोजन पौधों के सडे-गले अवशेषों से प्राप्त कर जीवित रहता है। इस जीवाणु की जीवन चक्र की चार अवस्थाएं: स्केलोरेसिया (sclerotia), एपोथेसिएम (apothecium), एस्कोस्पोर (ascospores) तथा माइसीलियम (mycelium) होती है। स्क्लेरोशिया, भूमि से विस्फोटित रूप में अंकुरित होकर माइसीलियम को उत्पन्न करते हैं, जो संवेदनशील पौधों को संक्रमित कर देते हैं। हाइफ़ा भी पहले भूमि पर पड़े अजीवित कार्बनिक पदार्थों के ऊपर अंकुरित होती है, तथा इस प्रकार मध्य कड़ी के रूप में माइसीलियम उत्पन्न करके उसके द्वारा संक्रमण फैलाती है। इसके अतिरिक्त स्क्लेरोशिया अंकुरित होकर बढ़ते हैं तथा एपोथेसिया उत्पन्न करते हैं, जो बाद में एस्कोस्पोर उत्पन्न कर उन्हें वायु में वितरित कर देते हैं।एस्कोस्पोर, अति सूक्ष्म व हलके होने के कारण दूर तक चले जाते हैं तथा पौधों के निर्जीव भागों के सम्पर्क में आने के बाद अंकुरित...