16 Aug Pulses production prospects in India
भारत में दलहन उत्पादन की संभावनाएं प्राचीन काल से ही भारत में उगाई जाने वाली फसलों में दलहनी फसलों का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रहा है। शाकाहारी भोजन में प्रोटीन का मुख्य जरीया होने के कारण दलहनी फसलों का महत्त्व काफी बढ़ जाता है। ये फसलें सामान्यतः प्रोटीन की प्रमुख स्त्रोत मानी जाती है। दलहनी फसलों के अंतर्गत प्रमुखतः अरहर, मूंग, उड़द की खेती खरीफ मौसम में तथा चना, मसूर, राजमा एवं मटर की खेती रबी मौसम में की जाती है। भारत के कई स्थानों में मूंग एवं उड़द की खेती जायद में भी की जाती है। दलहनी वर्ग की इन सभी फसलों में प्रोटीन काफी मात्रा में होने के कारण इन में नाइट्रोजन की भी जरूरत पड़ती है। इन फसलों में नाइट्रोजन की मात्रा की पूर्ति वायुमंडल में मौजूद आण्विक नाइट्रोजन से हो जाती है। दलहनी फसलें लेग्यूमेनेसी कुल की फसलें हैं। लेग्यूमेनेसी कुल की फसलों की विशेषता होती है कि उनकी फसलों की जड़ों में ग्रंथियां पाई जाती हैं तथा इन ग्रंथों में राइजोबियम नामक जीवाणु सहजीवन करता है। राइजोबियम नामक जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन का मिट्टी में स्तरीकरण करके मिट्टी को नाइट्रेट की आपूर्ति करता है और इस प्रकार से मिट्टी में नाइट्रेट की मात्रा बढ़ाकर दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती हैं। परंतु अन्य फसलें मिट्टी की उर्वरता को घटा...