29 Jul धनिया की उत्पादन तकनीक
Production technology of Coriander धनिया अम्बेलीफेरी या एपिएसी कुल का पौधा है। इसके वंश को कोरिएन्डम एवं प्रजाति सटाइवम है। इसका गुणसूत्र संख्या 2n = 22 होता है। धनिया के पौधे चिकनी सतह वाले 20-90 सेमी0 ऊॅंचाई के होते हैं। इसके नीचे की पत्तियाँ साधारणतया 2.5-10 सेमी0 लम्बी एवं 2.75 सेमी0 चौड़ी होती है। ऊपर की पत्तियाँ छोटे-छोटे भागों में विभक्त होकर पतले पर्ण फलकों में बदल जाती है। इसके पुष्प छोटे आकार के छत्रक में आते हैं। पत्ती वाली सब्जियों में धनिया का प्रमुख स्थान है। इसकी मुलायम पत्तियाँ को चटनी एवं सॉस आदि बनाने में प्रयोग किया जाता है। इसकी हरी पत्तियों को सब्जी एवं अन्य व्यजंनों को सुगन्धित करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसके दाने को मसाले के रूप् में प्रयोग किया जाता है। धनिया की पत्तियाँ पोषण की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी, कैरोटीन एवं अन्य खनिज तत्व पाये जाते हैं। इसकी पत्तियों में पाये जाने वाले पोषक तत्व की सारणी निम्नलिखित है पौष्टिक तत्व पत्ती (प्रति 100 ग्राम खाने योग्य भाग) नमी 86.3 ग्राम प्रोटीन 3.3 ग्राम वसा 0.6 ग्राम खनिज लवण 2.3 ग्राम रेशा 1.2 ग्राम कार्बोहाइडेटस 6.3 ग्राम ऊर्जा 44 किलो कैलोरी कैल्शियम 184 मि0ग्रा0 फास्फोरस 7.0 मि0ग्रा0 आयरन 1.42 मि0ग्रा0 कैरोटीन 6918 माइक्रोग्राम मैग्नीशियम 31.0 मि0ग्रा0 सोडियम 583 मि0ग्रा0 पोटैशियम 256 मि0ग्रा0 कॉपर 0.14 मि0ग्रा0 मैंगनीज 0.50 मि0ग्रा0 मालिब्डेनम 1.12 मि0ग्रा0 जिंक 0.32 मि0ग्रा0 क्रोमियम 0.014 मि0ग्रा0 सल्फर 49.0 मि0ग्रा0 क्लोरीन 43.0 मि0ग्रा0 धनिये की खेती के लिए जलवायु एवं भूमि: धनिया की खेती शीतोष्ण एवं उपोष्ण दोनों प्रकार की जलवायु में की जाती...