06 Oct Feed Cost Calculator – पशुओं के चारे का खर्च निकालें
Feed Cost Calculator से गाय, भैंस, बकरी और अन्य पशुओं का daily, monthly और yearly feed cost आसानी से निकालें। Kg, bag, quintal और tonne price calculation....
Feed Cost Calculator से गाय, भैंस, बकरी और अन्य पशुओं का daily, monthly और yearly feed cost आसानी से निकालें। Kg, bag, quintal और tonne price calculation....
ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चारा भंडारण संरचनाऐं साइलेज और 'हे' बनाने के अलावा कृषि प्रणालियों में भूसा या पुआल और कड़वी शुष्क पदार्थ का एक प्रमुख स्रोत हैं। ऐसी सामग्री का उचित भंडारण आवश्यक है। इसके भंडारण हेतु स्थायी और अस्थायी प्रकारों सहित विभिन्न संरचनाओं का उपयोग किया जाता है। धान के भूसे, गेहूं के भूसा को स्टोर करने के लिए विभिन्न तरीके अपनाये जाते है। धान के भूसे का भंडारण आमतौर पर ढेर के रूप में ऊपरी भूमि पर किया जाता है। ढेर के ऊपरी हिस्से को शंक्वाकार आकार दिया जाता है जो पानी को ढेर में प्रवेश करने से रोकता है । गेहूँ का भूसा उत्तरी भारत में पशुओं के चारे के लिए मुख्य फसल अवशेष है । भूसा संग्रहण संरचना सामान्यतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में फसल के भूसे को संरक्षित व संग्रहित करने के लिए अरहर या अन्य पोधो की पतली हल्की लकड़ियों से घेरा या गुम्बद या शंकुवाकर संरचना का निर्माण किया जाता है। शंकु की गोलाई दस या बारह या चौदह फ़ीट व ऊंचाई दस से पंद्रह फ़ीट व भूमि सतह से ऊंचाई एक से डेढ फ़ीट व घेरा की चौड़ाई छह से दस फ़ीट रखी जाती है । शंकुवाकर बनावट में संरचना को ऊपर से खुला छोड़ देते है एवं गुम्बदाकार बनावट में संरचना को ऊपर से खुला...
DWRB.137: Barley's high productive, anti yellow-rustic and six-line new variety जौ का उपयोग प्राचीन समय से ही भोजन एवं पशु चारा के लिए किया जाता रहा है । पुरातन समय मैं जौ का उपयोग योद्धाओं द्वारा शक्ति विकास एवं पोषण के लिए किया जाता था । वर्तमान मैं भी जौ की फसल एक बहुविकल्पीय फसल है क्योंकि यह अन्य रबी खाधान्नों की अपेक्षा कम लागत मे तैयार हो जाती है एवं यह लवणीय और क्षारीय भूमि एवं शुष्क क्षेत्रों के लिए भी वरदान है। जौ के निरंतर प्रयोग से यह एक औषधि का भी काम करती है और इसके रोजाना उपयोग कुछ बिमारियों जैसे मधुमेह, कोलेस्ट्रोल मे कमी एवं मूत्र रोग मैं फायदा होता है । जौ के उत्पादन को बढाने और रोगरोधिता को उन्नत बनाने के क्राम मैं भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान में संकरण विधि (डी.डब्ल्यू.आर.बी.२८/डी.डब्ल्यू.आर.यु.बी.६४) द्वारा जौ की उच्च उत्पादक, रोगरोधी किस्म डी.डब्ल्यू.आर.बी.137 को तैयार किया गया है । यह किस्म अत्याधिक उत्पादक एवं पीला रतुआ के लिए रोधी होने के साथ-साथ इसकी दाना गुणवत्ता भी अच्छी है । इन्ही गुणों को ध्यान मैं रखते हुए डी.डब्ल्यू.आर.बी.137 को 56 वीं गेहूं एवं जौ कार्यशाला की बैठक मे चिन्हित किया गया । तत्पश्चात सी वी आर सी की ७९ वीं बैठक मैं गज़ट नंबर १३७९ (ई) दिनांक २७ मार्च २०१८...
Azolla production techniques and benefits of Azolla कृषि उत्पादों की कीमत में अनिश्चितता और कृषि आदानों की तेजी से बढ़ती लागत, भूजल स्तर में गिरावट के कारण कृषि लागत बढ़ गई है, यही कारण है पिछले कुछ वर्षो में पेशे के रूप में खेती के प्रति किसानों का आकर्षण कम हो रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए अजोला की खेती बहुत ही लाभकारी हो सकती है। अजोला एक महत्वपूर्ण बहुगुणी फर्न है जिसका उपयोग पशुओं, मछली एवं कुक्कुट के चारे के रूप में उपयोग किया जाता है और इसकी कास्त लागत भी बहुत कम (एक रुपय प्रति कि.ग्रा.) होती है। अजोला तेजी से बढ़ने वाली एक प्रकार की जलीय फर्न है, जो पानी की सतह पर छोटे - छोटे समूह में सघन हरित गुच्छ की तरह तैरती रहती है। भारत में मुख्य रूप से अजोला की जाति अजोला पिन्नाटा पायी जाती है। यह गर्मी सहन करने वाली किस्म है । अजोला की पंखुड़ियो में एनाबिना नामक नील हरित काई के जाति का एक सूक्ष्मजीव होता है जो सूर्य के प्रकाश में वायुमण्डलीय नत्रजन का यौगिकीकरण करता है और हरे खाद की तरह फसल को नत्रजन की पूर्ति करता है। अजोला की विशेषता यह है कि यह अनुकूल वातावरण में 5 दिनों में ही दो गुना हो जाता है। यदि इसे पूरे वर्ष बढ़ने दिया जाये तो 300 टन से भी अधिक सेन्द्रीय पदार्थ प्रति...