23 Apr पशु के शरीर की बाहरी रचना का आन्तरिक क्रियाओं से सम्बन्ध
Relation of Internal characters with external appearance of cattle भारतीय कृषि में आधुनीकिकरण के बाबजूद पशुओं का विशेष स्थान हैं। दैनिक कृषि कार्य या दुग्ध उद्योग में पशुधन कृषक की सम्पदा हैं। पालतू जानवरों के शरीर की बाहरी रचना का आंतरिक क्रियाओं से विशेष सम्बन्ध होता है जिसे जानना कृषक बन्धुओं के लिए अति महत्व पूर्ण है। निम्नलिखित बिन्दु इस ओर प्रकाश ड़ालते हैं - चुस्त शरीर बड़ी-बड़ी चमकीली आखें, चौकन्ने कान, पशु का स्वस्थ होना प्रदर्शित करते हैं।पशु के शरीर की सामान्य बनावट औसत कद, मुलायम त्वचा, सुविकसित अंग तथा अच्छा स्वास्थ्य पशु को अच्छा उत्पादक तथा अधिक कार्य करने वाला प्रदर्शित करते हैं।बड़े-बड़े खुले नथुने पशु के श्वसन तन्त्र का सुविकसित होना प्रगट करते हैं। चौड़ा मुंह सुदृढ़ जबड़े तथा मजबूत दांत इसके द्योतक हैं कि पशु भली भांति चबा-चबाकर खाने वाला हैं। ऐसा पशु अधिक उत्पादक होता हैं। ढ़ले हुए जोड़, अच्छी सुविकसित हड्डियाँ, दुधारू तथा अधिक कार्य करने वाले पशुओं की निशानी हैं। हल्के छोटे और गुटठ्ल सींग तथा लम्बें, पतले व नुकीले सींग क्रमश: शान्त तथा खूंखार होना प्रकट करते हैं।बैलों तथा साड़ों का ठॉठ उठा हुआ अच्छा माना जाता हैं जबकि गायों में पतली गर्दन, छोटा ठॉठ तथा मध्यम गलकम्बल दुधारू होने की निशानी है।सुदृढ़ तथा औसत लम्बाई के ऊपर से नीचे की ओर ढलवां पैर, अच्छे कार्य करने वाले...