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फल उत्‍पादन Tag

स्ट्रॉबेरी की खेती में मल्चिंग की भूमिका, मिट्टी की नमी संरक्षण, खरपतवार नियंत्रण, तापमान संतुलन और फलों की गुणवत्ता सुधार में इसके लाभों की जानकारी।...

7 Major diseases of papaya crop and their control पपीते का बिहार की कृषि में प्रमुख स्थान है। पपीते में 20 से अधिक रोगों का आक्रमण होता है, जिनमें कवक एवं विषाणु जनित रोग प्रमुख हैं। बिहार राज्य में सबसे अधिक समस्या विषाणु जनित रोगों की है जिसके कारण किसान पपीते की खेती में कम रूचि ले रहे हैं। पपीते के कवक जनित रोग: 1. आर्द्र गलन (डैम्पिंग आॅफ): यह पौधशाला में लगने वाला गम्भीर रोग है जिससे काफी हानि होती है। इसका कारक कवक पीथियम एफैनिडरमेटम है जिसका प्रभाव नये अंकुरित पौधों पर होता है। इस रोग में पौधे का तना प्रारम्भिक अवस्था में ही गल जाता है और पौधा मुरझाकर गिर जाता है। नियंत्रण के उपाय: पौधशाला में जल निकास का उचित प्रबंध होना चाहिए एवं इसके लिए पौधशाला की उँचाई आस-पास की सतह से उपर होनी चाहिए जिससे जल जमाव न हो। नर्सरी की मिट्टी का उपचार फार्मेल्डिहाइड के 2.5 प्रतिशत घोल से करने के बाद 48 घंटे तक पाॅलीथीन सीट से ढ़क देना चाहिए। बीजोपचाार कार्बेन्डाजिम अथवा मेटालैक्सिल $ मेन्कोजेब के मिश्रण से 2 ग्राम/किलो बीज की दर से करें। पौधशाला में लक्षण दिखते ही मेटालैक्सिल $ मेन्कोजेब के मिश्रण का 2 ग्राम/लीटर पानी से छिड़काव करंे। 2. तना तथा जड़ सड़न रोग (कालर राॅट): पपीते में तना व जड गलन यानि‍ कालर राॅट रोग में तने के...