16 Nov फसल अवषेश जलाने के हानिकारक प्रभाव एवं प्रबंधन
Harmful effects of burning crop residues and management of crop residues भारत में पहले खेती केवल जीविकोपार्जन के लिए किया जाती थी लेकिन धीरे धीरे खेती ने व्ययसाय का रूप ले लिया है। किसान अधिक उपज प्राप्त करने के लिय अंधाधुंध रासायनिक उर्वरक, कीटनाशकों का प्रयोग कर रहा है जिससे मृदा के साथ-साथ पर्यावरण पर भी हानिकारक प्रभाव हो रहा है फसल अवशेष को जलना भी एक पर्यावरण तथा मृदा प्रदुषण का महत्वपूर्ण कारण है। पिछले कुछ वर्षों में एक समस्या मुख्य रूप से देखी जा रही है कि जहां हार्वेस्टर के द्वारा फसलों की कटाई की जाती है उन क्षेत्रों में खेतों में फसल के तने के अधिकतर भाग खेत में खड़े रह जाते हैं तथा वहां के किसान खेत में फसल के अवशेषों को आग लगाकर जला देते हैं। क्या है फसल अवशेष फसल अवशेष पौधे का वह भाग होता है जो फसल की कटाई और गहाई के बाद खेत में छोड़ दिया जाता है। भूसा, तना, डंठल, पत्ते व छिलके आदि फसल अवशेष कहलाते हैं। सरसों, गेहूं, धान, ग्वार, मूंग, बाजरा, गन्ना व अन्य दूसरी फसलों से काफी मात्रा में फसल अवशेष मिलते हैं। सबसे ज्यादा फसल अवशेष अनाज वाली फसलों में तथा सबसे कम अवशेष दलहनी फसलों से मिलते हैं। खरीफ सीजन में 500 लाख टन फसल अवशेष का उत्पादन होता...