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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)  की समीक्षा Farmers' produce is insured by the Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (PMFBY). PMFBY is being restructured through several initiatives such as introduction of competitive bidding for premium quotes from insurers and use of artificial intelligence (AI) based technologies for timely assessment of crop , yield data for quick claim settlement. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)  की समीक्षा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) द्वारा किसानों की उपज का बीमा किया जाता है।  Pradhanmantri Fasal Bima Yojana को 18 फरवरी, 2016 को पेश किया गया था। इसका उद्देश्य किसानों पर प्रीमियम के वित्तीय बोझ को कम करना और पूरी बीमा राशि के लिए फसल बीमा दावों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करना है। किसानों की आय को स्थिर करने के लिए, PMFBY का इरादा फसल की विफलता के खिलाफ एक व्यापक बीमा कवर की पेशकश करना है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का उद्देश्य पिछले दो कार्यक्रमों ,राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (NAIS) और संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (MNAIS), को बदलना और उनके बेहतरीन तत्वों को जोड़कर और उनकी खामियों को दूर करना था।  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) ने जमा किए गए किसान आवेदनों के मामले में दुनिया की अन्य सभी फसल बीमा योजनाओं को पीछे छोड़ दिया है। यह योजना अपनी पूर्ववर्ति कृषि बीमा योजनाओ की तुलना...

Prime Minister Crop Insurance Scheme - Brief Description प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भारत सरकार ने किसानों की हो रही फसल की बर्बादी की पूर्ति के लिए और फसल बर्बादी की वजह से किसानों के द्वारा हो रही आत्महत्या को रोकने के लिए लागू किया गया। सन 1965 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश को ‘‘जय जवान जय किसान‘‘ नारा दिया था  परन्‍तू इतना समय बीत जाने के बावजूद आज भी कि‍सानो की हालत बहुत अच्‍छी नही है। इसका एक प्रमुख कारण खेती मे मौसम संबधि‍त जोखि‍म तथा खेती का अनिश्चितताओं से भरा होना है। कभी सूखा , कभी बाढ तो कभी बीमारी या टि‍ड्डी प्रकोप जैसी अनेक अनिश्चितताऐ कि‍सान की आय को लगातार प्रभावि‍त करती है ।  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्या है ? प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भारत सरकार द्वारा किसानों के फसलों की रक्षा के लिए चलाई जा रही है इस योजना के अंतर्गत कृषक समाज के लोग अपनी फसल का बीमा सस्ते दरों में करा सकते हैं। इस योजना को सफल बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों अपना योगदान देती है।अर्थात बजट का हिस्सा भारत सरकार और राज्य सरकार दोनों वहन करती है। किसानों द्वारा इस योजना के अंतर्गत फसल का बीमा कराने पर बीमा की भुगतान की जिम्मेदारी कृषि बीमा कंपनी के कंधों पर...

Livestock insurance scheme पशुधन बीमा योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है जो 10वीं पंचवर्षीय योजना के वर्ष 2005-06 तथा 2006-07 और 11वीं पंचवर्षीय योजना के वर्ष 2007-08 में प्रयोग के तौर पर, देश के 100 चयनित जिलों में क्रियान्वित की गई थी। यह योजना देश के 300 चयनित जिलों में नियमित रूप से चलाया जा रहा है। पशुधन बीमा योजना की शुरुआत दो उद्देश्यों के लि‍ए कि‍या गया है। 1. किसानों तथा पशुपालकों को, पशुओं की मृत्यु के कारण हुए नुकसान से, सुरक्षा मुहैया करवाने हेतु तथा 2. पशुधन तथा उनके उत्पादों के गुणवत्तापूर्ण विकास के चरम लक्ष्य के साथ लोकप्रिय बनाना । योजना के अंतर्गत देशी व संकर दुधारू मवेशियों और भैंसों का बीमा उनके अधिकतम वर्तमान बाजार मूल्य पर किया जाता है। बीमा का प्रीमियम 50 प्रतिशत तक अनुदानित होता है। अनुदान की पूरी लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाती है। अनुदान का लाभ अधिकतम दो पशु प्रति लाभार्थी को अधिकतम तीन साल की एक पॉलिसी के लिए मिलता है। यह योजना गोवा को छोड़कर सभी राज्यों में संबंधित राज्य पशुधन विकास बोर्ड द्वारा क्रियान्वित की जा रही है। योजना में शामिल पशु तथा लाभार्थियों का चयन देशी संकर दुधारू मवेशी और भैंस योजना की परिधि के अंतर्गत आएंगे। दुधारू पशु भैंस में दूध देनेवाले और नहीं देनेवाले के अलावा वैसे गर्भवती मवेशी, जिन्होंने कम...

National Agricultural Insurance Scheme for Profitable Farming राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के उद्देश्य निम्नलिखित है- प्राकृतिक आपदा, कीट या बीमारी के कारण किसी भी अधिसूचित फसल के बर्बाद होने की स्थिति में किसानों को बीमा का लाभ और वित्तीय समर्थन देना। किसानों को खेती के प्रगतिशील तरीके, उच्च मूल्य (आगत) इनपुट और कृषि में उच्चतर तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना। खेती से होनेवाली आय को विशेष रूप से आपदा के वर्षों में स्थायित्व देने में मदद करना। इसके अधीन फसलें निम्नलिखित वृहत समूहों की फसल, जिनके बारे में (1) फसल कटाई प्रयोग के बारे में समुचित वर्षों के आंकड़े उपलब्ध हैं और (2) प्रस्तावित मौसम में उत्पादन की मात्रा के आकलन के लिए आवश्यक फसल कटाई प्रयोग किये गये हों- खाद्य फसलें (अनाज, घास और दाल) तिलहन गन्ना, कपास और आलू (वार्षिक वाणिज्यिक या वार्षिक बागवानी फसलें) अन्य वार्षिक वाणिज्यिक या वार्षिक बागवानी फसलें, बशर्ते उनके बारे में पिछले तीन साल का आँकड़ा उपलब्ध हो। जिन फसलों को अगले साल शामिल किया जाना है, उनकी सूचना चालू मौसम में ही दी जायेगी। इसके अधीन लाये जानेवाले राज्य व क्षेत्र यह योजना सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में लागू है। जो राज्य या संघ शासित प्रदेश योजना में शामिल होने का विकल्प चुनते हैं, उन्हें योजना में शामिल की जानेवाली फसलों की सूची तैयार करनी होगी। निकास नियम- जो राज्य इस योजना...