15 May बैंगन के प्रमुख रोग – लक्षण व निदान
Major Disease of Brinjal crop- symptoms and control बैंगन भारत की कुछ प्रमुख सब्जियों मे से एक हैं। बैंगन की तीन प्रकार की प्रजातियां पाई जाती हैं (1) लम्बे फलवाली - पूसा परपल कलस्टर एवं पूसा कांति इत्यादि (2) नाषपाती आकार के फल एवं (3) गोल फल वाली प्रजातियां जैसे- पूसा पर्पिल राउण्ड, टाइप-3, पंजाब बहार, अर्का नवनीत एवं पन्त ऋतुराज इत्यादि। बैंगन का जन्म स्थान भारत एवं चीन के उष्ण कटिबन्धी प्रदेष ही माने जाते हैं। बैंगन की खेती लगभग पूरे वर्ष भर की जाती हैं। बैंगन की अच्छी पैदावार हेतु गर्म जलवायु की आवष्यकता होती हैं। तथा जल जल निकास युक्त दौमट मिट्टी इसके उत्पादन हेतु सर्वोत्ताम मानी गयी हैं। बैगन की एक हेक्टयर में पौध रोपण हेतु 400-500 ग्राम बीज की आवष्यकता होती हैं। एवं बीजों को बुवाई से पूर्व थाइराम या केप्टान नामक कवकनाषी दवा की 2 ग्राम प्रति किलों बीज की दर से उपचारित कर नर्सरी में बुवाई करनी चाहिए इसके लिए वर्षाकालीन फसल हेतु फरवरी मार्च, शरदकालीन फसल हेतु जून - जुलाई एवं बसंतकालीन फसल हेतु सितम्बर में नर्सरी में पौधे 30-40 दिन बुवाई के बाद 10-15 सें.मी. ऊंचाई के हो जायें तो कतार से कतार की दूरी 60-70 सेन्टीमीटर एवं पौधे से पौधे की दूरी 60 से.मी. ध्यान में रखते हुए रोपाई कर देनी चाहिए। आमतौर पर बैंगन...