05 May Improved Cultivation of Moong in Rajasthan
राजस्थान में मूँग की उन्नत खेती मूँग एक फलीदार फसल है जिसे मुख्य रूप से दाल के लिए प्रयोग किया जाता है। दाने के साथ-साथ फसल की पत्तियों और तने से पर्याप्त मात्रा में भूसा प्राप्त होता है, जो जानवरों के चारे के रूप में प्रयोग किया जाता है। भारत में लगभग 308 मिलियन हेक्टेयर में मूंग की खेती की जाती है तथा इसका उत्पादन 1.31 मिलियन टन प्रति वर्ष है। मूंग की औसत उत्पादकता 4.25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। मूंग को हरी खाद के लिए भी प्रयोग किया जाता है। मूंग की जड़ों में सूक्ष्म जीवाणु पाए जाते हैं जो वायुमंडल की नाइट्रोजन को एकत्रित करते हैं जो अगली फसल के द्वारा प्रयोग की जाती है। इसे मृदा अपरदन अवरोधी तथा कैच क्रॉप के रूप में प्रयोग करते हैं। राजस्थान में मूंग खरीफ एवं ग्रीष्म दोनों मौसमों में कम समय में पकने वाली मुख्य दलहनी फसल है। मूंग में 24- 26% प्रोटीन, 55-60% कार्बोहाइड्रेट एवं 1.3% वसा पाया जाता है। मूंग की खेती राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार तथा पश्चिमी बंगाल में प्रायः की जाती है। उत्तरी भारत में मूंग की खेती ज्यादातर खरीफ ऋतु में की जाती है। वैसे तो मूंग की खेती को तीन वर्गो में बांटा गया है 1. बसंतकालीन मूंग ( spring season moong ) - इस सीजन की अवधि फरवरी-मार्च से मई-जून तक है। 2. ग्रीष्मकालीन मूंग ( summer season moong ) - इसकी अवधि अप्रैल से जून तक होती है। 3. खरीफ ऋतु की...