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Gum karaya, a non timber forest produce भारतीय उपमहाद्वीप जैविक विविधता और वनस्पतियों का प्रमुख केंद्र है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक जीवन में कई वन उत्पादों का महत्वपूर्ण स्‍थान है। ये वन उत्पाद काष्ठ और अकाष्ठ वन उत्पादन में वर्गीकृत है। अकाष्‍ठ उत्‍पादों में विभिन्न पेड़ाेें की जड़, तने और फल से प्राप्‍त प्राकृतिक रेजिन, गोंद, रिसाव, पत्तिया (तेंदू),  गंध-द्रव्य, तेल शामिल हैं । अकाष्‍ठ उत्‍पाद मसाले, दवाइयों, रंजक और टैनिन की प्राकृतिक स्रोत हैं। ज्यादातर अकाष्ठ वन उत्पादन निर्यात मुद्रा अर्जक हैं और कई स्थानीय लघु उद्योगों के लिए अच्छी तरह से अनुकूल हैं भारत में लाख और गम के उत्पादन वाले पेड़ों की संख्या अधिकता में हैं जिससे रेजिन और गम का रिसाव होता हैं। कराया गम एक गैर-लकड़ी के वन उत्पाद है। कराया गम की स्टेरिकुलिया प्रजातियों के पेड़ों से प्राप्त सूखे पीब है। कराया गोंद और कराया वृक्ष कराया गोंद का स्थानीय नामः - कुल्लू, कडाया, कडु, गलगला, गेंदूली, तापसी, पानरख, कंडोल के सलाद, गम कराया, एस यूरें और एस विलोसा का सूखा पीब है। यह इंडोनेशिया में एस यूरसीलाटा और एस फॉइडाडा , अफ्रीका में एसटीगेरा और ऑस्ट्रेलिया में एस कौदाटा से भी एकत्र किया गया है। यहांं भी इसे भारतीय ट्रेगैंटल नाम से जाना जाता है।              विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग काराया गम के...

Scientific Lac Cultivation and Lac Processing लाख एक प्राकृतिक राल है, जो नन्हे-नन्हे लाख कीटों द्वारा सुरक्षा हेतु अपने शरीर में उपस्थित सूक्ष्म ग्रंथियों द्वारा रेजिन्स स्त्राव के फलस्वरूप प्राप्त होता है । लाख से प्राप्त राल के हानी रहित गुणों के कारण इसका महत्व रासायनिक यौगिको के रालों से अधिक है, राल के अतिरिक्त मोम और सुन्दर लाल रंग सह उत्पाद के रूप में प्राप्त होतें है, जिनका भी व्यवसायिक महत्व है । आज न केवल लाख सज्जा के लिये उपयोगी है, अपितु औषधि खाद्य प्रसंस्करण, विधुत, सौन्दर्य प्रसाधन ,सूक्ष्म रसायन एवं सुगंध उद्योग में भी इसका इस्तेमाल होता है । कुसुमी लाख उत्पादन तकनीक ऋतुओं के आधार पर फसल चक्र - शीतकालीन (अगहनी) जुन - जुलाई में कीट संचारण एवं जनवरी - फरवरी फसल कटाई । ग्रीष्मकालीन (जेठवी) जनवरी - फरवरी में कीट संचारण एवं जून जुलाई में फसल कटाई । उपयुक्त पोषक वृक्ष  कुसुमी लाख हेतु मुख्य पोषक वृक्ष कुसुम, बेर, खैर एवं सेमियालता  है। कुसुम वृक्ष में पतझड़ कम समय का होता है, तथा यह दोनो फसल शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीम के लिये उपयुक्त है, इसकी निम्न किसमें पायी जाती है- करिया :- इस वृक्षों की पत्तियां गहरें रंग की तथा तना एवं टहनिया गहरें भुरे रंग की होती है । चरका :- इस किस्म के वृक्ष की पत्तियां पीली, हरी एवं तना तथा टहनियां प्रायः...

Cultivation of Kusumi Natural Resin (Kusumi Lac) लाख (Lac) एक प्राकृतिक राल है जो मादा लाख कीट द्वारा मुख्य रुप से प्रजनन के पश्‍चात स्त्राव के फलस्वरुप बनता है। लाख कीट की दो प्रजातियां होती हैं जिन्हें कुसमी और रंगीनी कहते हैं। प्रत्येक प्रजाति से वर्ष में दो फसलें ली जाती हैं लेकिन पष्चिम बंगाल के कुछ समुद्री क्षेत्र के आस-पास बिलायती सिरिस पर एक वर्ष में तीन फसलें भी ली जाती हैं। लाख की खेती ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत है। हमारे देष में कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहोॅं लाख का उत्पादन नियमित रुप से होता आ रहा है तथा दूसरे क्षेत्र भी हैं जहाॅं संसाधन तो उपलब्ध हैं लेकिन अज्ञानता के कारण संसाधनों का उपयोग नहीं हो रहा है। लाख उत्पादक क्षेत्रों में भी आधुनिक तकनीकी ज्ञान न होने के कारण उत्पादन उतना नहीं हो रहा है जितना हो सकता है। लाख की खेती के लिए मुख्य पोषक वृक्षों/ पौधों में कुसुम, पलास, बेर एवं सेमियालता का नाम प्रचलित है। इसके अलावा भी कई अन्य वृक्षों/ पौधों जैसे एकेसिया ऐरेबिका, ग्रेविया, अल्बीजिया ल्युसिडा, अल्बीजिया प्रोसेरा, सोरिया रोबस्टा, सोरिया तालुरा, कजानस कजन पर लाख का उत्पादन किया जाता है परन्‍तू इन वृक्षों या पौधों पर लाख का उत्पादन वाणिज्यिकी रुप से बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। लाख पोषक वृक्षों में कुसुम (श्‍लेइचेरा ओलिओसा) वृक्ष का...