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सोनामुखी Tag

Zero calories medicinal plant- Stevia or sweet leaf Cultivation आजकल मधुमेह व मोटापे की समस्या के कारण न्युन कैलोरी स्वीटनर्स हमारे भोजन के आवश्यक अंग बन चुके है। बाजार मे उपलब्‍ध कृत्रि‍म उत्पाद सेहत के लि‍ए पुर्णतया सुरक्षित न होने के कारण, मधु तुलसी या स्‍टीवि‍या (Stevia) के पौधे को न्‍यून क्‍ैलोरी मि‍ठास का उत्‍तम प्राकृतिक स्त्रोत माना जाता है। यह शक्कर से लगभग 25 से 30 गुना अधिक मीठा , केलोरी रहित है व मधुमेह व उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए शक्कर के रूप मे पुर्णतया सुरक्षित है । इसके पत्तों मे पाये जाने वाले प्रमूख घटक स्टीवियोसाइड, रीबाडदिसाइड व  अन्य योगिकों में इन्सुलिन को बैलेन्स करने के गुण पाये जाते है। जिसके कारण इसे मधुमेह के लिए उपयोगी माना गया है। यह एन्टी वायरल  व एंटी बैक्टीरियल भी है तथा दांतो तथा मसूड़ो की बीमारियों से भी मूकित दिलाता है। इसमे एन्टी एजिंग, एन्टी डैन्ड्रफ जैसे गुण पाये जाते है तथा यह नॉन फर्मेंटेबल होता है। 15 आवश्यक खनिजो (मिनरल्स) तथा विटामिन से युक्त यह पौधा अत्‍यंत उपयोगी औषधीय पौधा है। स्टीविया (स्टीविया रेबव्दिअना) की खेती के लि‍ए जलवायु तथा भूमि‍ स्टीविया की खेती भारतवर्ष में पूरे साल भर में कभी भी करायी जा सकती है इसके लिये अर्धआद्र एवं अर्ध उष्ण किस्म की जलवायु काफी उपयुक्त पायीजाती है। ऐसे क्षेत्र जहाँ पर न्यूनतम तापमान शून्य से...

Cultivation technique of Swarnamukhi or Sonamukhii or Senna सोनामुखी या सनाय बहुवर्षीय कांटे रहित झाड़ीनुमा, औषधीय पौधा है जो लैग्यूमीनेसी (दलहनी) कुल के अन्तर्गत आता है। पूर्णतया बंजर भूमि में उगाये जा सकने वाले इस पौधे के लिए ज्यादा पानी एवं खाद की आवश्यकता नहीं होती है। इस प्रकार भारत के बंजर भूमि वाले भागों में सोनामुखी की खेती करके पर्याप्त लाभ कमाया जा सकता है। सोनामुखी एक औषधीय पौधा है जो एक बार लगा देने के उपरान्त 4-5 वर्ष तक उपज देता है। इसका पौधा 4 डिग्री से 50 डिग्री सेल्सियस तक तापमान सहन करने की क्षमता रखता है। एक बार लगा देने के बाद इस फसल के पौधों को न तो कोई जानवर एवं पशु पक्षियों से नुकसान होता है और ना ही कीटों का प्रकोप  बहुत होता है। दलहनी पौधा होने के कारण भूमि की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाने में सहायक होता है। इसकी पत्तिायों, फलियों को विदेशों को निर्यात करके विदेशी मुद्रा अर्जित की जाती है। सोनामुखी की खेती भारत में मुख्य रूप से होती है। देश में सोनामुखी का उत्‍पादन राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात में विशेष रूप से होता है। सनाय के लिए जलवायु एवं मृदा : सोनामुखी शुष्क जलवायु एवं कम वर्षा वाले क्षेत्रों (30-40 सेमी) के लिए उपयुक्त है। रेतीली दोमट मिट्टी जिसका पी.एच.मान 7.0-8.5 के मध्य हो उपयुक्त रहती है। सोनामुखी के खेत की तैयारी: सोनामुखी...