17 Dec बौछारी (स्प्रिंकलर) सिंचाई तकनीक अपनाएं- भरपूर उपज पाएं
Adopt Shower (Sprinkler) irrigation techniques - get bumper crop बौछारी या स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई में पानी को छिड़काव के रूप में दिया जाता है। जिससे पानी पौधों पर वर्षा की बूंदों जैसी पड़ती हैं। पानी की बचत और उत्पादन की अधिक पैदावार के लिहाज से बौछारी सिंचाई प्रणाली अति उपयोगी और वैज्ञानिक तरीका मानी गई है। किसानों में सूक्ष्म सिंचाई के प्रति काफी उत्साह देखी गई है। इस सिंचाई तकनीक से कई फायदे हैं। हमारे यहां बौछारी या स्प्रिंकलर और बूंद.बूंद या ड्रिप सिंचाई पर ज्यादा ध्यान दिया जाए तो न केवल उत्पादन बढ़ाया जा सकता हैए बल्कि कृषि की उन्नत तकनीक भी विकसित की जा सकती है। असमतल भूमि और ऊंचाई वाले क्षेत्र में भी बौछारी प्रणाली से खेती की जा सकती है। इस तकनीक से श्रम की भी बचत होती है। बौछारी से पानी सीधी पौधों पर ही गिरता है। ऎसे में खरपतवार पर नियंत्रण रहता है। बीमारियों और कीड़े.मकोड़ों की संभावनाएं कम रहती हैं। कृषि में इस तकनीक के उपयोग से फसल पैदावार एवं गुणवत्ता में वृद्धि के साथ उत्पादन लागत में भी कमी आएगी। बौछारी सिंचाई प्रणाली के मुख्य घटक: बौछारी सिंचाई पद्धति में मुख्य भाग पम्प, मुख्य नली, बगल की नली, पानी उठाने वाली नली एवं पानी छिड़काव वाला फुहारा होता है। बौछारी सिंचाई प्रणाली की क्रिया विधि: बौछारी सिंचाई में नली...