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पशुओ में ऋणात्मक और घनात्मक आहार का महत्त्व खनिज, हड्डी के निर्माण से लेकर इलेक्ट्रोलाइट संतुलन तक सभी जैविक प्रक्रियाओं में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग लेते हैं। खनिज, घनायन और ऋणायन के रूप में आहार में पाये जाते हैं और आहार में खनिजों का सही अनुपात, विशेष रूप से जानवरों के उत्पादन के लिए घनायन और ऋणायन के बीच संतुलन आवश्यक होता है। जानवरों द्वारा ग्रहण किए गए खनिज आयन तेजी से परिसंचरण (रक्त) में पहुच जाते हैं और रक्त के समग्र पीएच को प्रभावित करते हैं। घनायन रक्त को थोड़ा क्षारीय करते हैं (पीएच को बढ़ाते हैं), जबकि ऋणायन रक्त को थोड़ा अम्लीय करते हैं (पीएच में कमी)। पशु आहार में घनायन और ऋणायन के अंतर (DCAD) का तात्पर्य कुछ आहार संबंधी घनायन और कुछ आहार संबंधीऋणायन के योग के बीच संख्यात्मक अंतर से है। प्रमुख घनायन में सोडियम और पोटेशियम आते है और प्रमुख ऋणायन में क्लोराइड और सल्फेट होते है । इस प्रकार, DCAD को (Na + + K+) - (Cl- + S2-) के मिलिइक्युवैलेन्ट का प्रति 100 ग्राम शुष्क पदार्थ के रूप में परिभाषित किया गया है। यदि सूत्र में शामिल आयनों के अवशोषण गुणांक को सम्मिलित करेंगे तो DCADकी गणना में अधिक सटीकता आयेगी। इसका मूल्य (वैल्यू) घनात्मक या ऋणात्मक हो सकता हैं। ऋणात्मक DCAD रक्त में...

आधुनिक पशु आहार में अजोला का योगदान  राजस्थान की अर्थव्यस्था में पशुपालन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है तथा पशुपालन कृषि का एक महत्वपूर्ण भाग है। पशुपालन किसानो को विभिन्न प्रकार के रोजगार के अवसर प्रदान करता है  जिससे किसानो की आय में वर्द्धि होती है एवं उनकी अर्थवयवस्था में भी  सुधार होता है। अजोला पशुओ के लिये जैविक चारे का काम करता है जिससे उनके दूध में बढ़ोतरी होती है और दूध की गुणवत्ता में भी बढ़ोतरी होती है अजोला एक जलीय फर्न है, जो पानी में तेजी से  बढ़ती है एवं पानी की सतह पर तैरती रहती है धान की फसल में अजोला को भी नील हरित शैवाल की तरह हरी खाद के रूप में उगाया जा सकता है हरी खाद भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है  तथा फसल उत्पादन भी बढ़ाती है। एजोला की सतह पर नील हरित शैवाल सहजैविक के रूप में पाया जाता है। यह अद्वितीय पारस्परिक सहजैविक संबंध अजोला को एक अदभुद पौधे के रूप में विकसित करता है, जिसमें कि उच्च मात्रा में प्रोटीन उपलब्ध होता है। अजोला प्राकृतिक रूप से उष्ण व गर्म उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। देखने में अजोला शैवाल से मिलती जुलती होती है और आमतौर पर उथले पानी में अथवा धान के खेत में पाई जाती है। अजोला के गुण:...