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Best management practices (BMP) for sustainable aquaculture management  The creation of best management practices or BMPs has the potential to reduce the unfavorable image of aquaculture and reduce the likelihood of harmful effects on the aquatic environment, which is already sensitive. Helping farmers manage their facilities more financially and efficiently while complying with wastewater discharge regulations is the major objective of BMP development. एशिया, विशेष रूप से दक्षिण एशियाई देश मुख्य रूप से भारत और बांग्लादेश, जो वैश्विक स्तर पर क्रमशः दूसरे और पांचवें स्थान पर हैं, दुनिया का लगभग 90% समुद्री भोजन पैदा करते हैं। कपड़ों के बाद मत्स्य पालन और जलीय कृषि बांग्लादेश के शीर्ष निर्यात अर्जक बने हुए हैं। 2013-14 में, देश में 630.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर आये। पिछले दस वर्षों में दक्षिण एशिया में जलीय कृषि में 6-8% की अभूत पूर्व वृद्धि देखी गई है। बहरहाल ऐसा माना जाता है कि अधिकांश जल कृषि प्रथाओं का पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है (Tucker et al., 2008; Klinger and Nylore, 2012)। अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा गुणवत्ता मानकों को सख्ती से लागू करना, कोडेक्स मानकों का कार्यान्वयन, HACCP कानून और सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयाँ वर्तमान में दक्षिण एशियाई समुद्री भोजन निर्यात व्यवसाय की मुख्य चिंताएँ हैं (Dey et al., 2005)। दक्षिण एशिया में एक्वाकल्चर एक बहुत ही अराजक उद्योग है।...

Government schemes and incentives to promote water entrepreneurship Water entrepreneurship or Aquaculture entrepreneurship is an ingenious and creative business which is engaged in fish farming or fish trading activities. It includes the breeding, raising, and harvesting of aquatic plants, fish, and shellfish. Water entrepreneurship can take place in fresh water, brackish water, and sea water. Government schemes and incentives to promote water entrepreneurship जल उद्यमिता/ एक्वाकल्चर उद्यमिता एक सरल और रचनात्मक व्यवसाय है जो मछली पालन या मछली व्यापार गतिविधियों में लगा हुआ है। इसमें जलीय पौधों, मछली और शेलफिश का प्रजनन, पालन-पोषण और कटाई शामिल है। जल उद्यमिता मीठे पानी, खारे पानी और समुद्री पानी में हो सकती है। भारत में जलीय कृषि बाजार 2022 में 12.4 मिलियन टन तक पहुंच गया और IMARC समूह को उम्मीद है कि 2028 तक बाजार 19.9 मिलियन टन तक पहुंच जाएगा। जल व्यवसाय को बढावा देने के लिए भारत सरकार अनेक प्रोतसाहन व सहायता योजनाएं चलाती है। केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली पूंजी निवेश सब्सिडी योजना पूंजी निवेश सब्सिडी की पेशकश वंचित क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने के लिए उपयोग की जाने वाली नीतिगत रणनीतियों में से एक है। इस योजना के तहत पूंजी निवेश पर सब्सिडी दी जाएगी। केंद्र और राज्य सरकारों ने जिन क्षेत्रों को अलर्ट किया है, वहां औद्योगिक इकाइयों में निवेश...

पंगेसियस मछली को तालाबों और पिंजरों में पालने की सही विधि पंगेसियस एक अत्यधिक प्रवासी नदी की प्रजाति है, और यह समग्र रूप से कृषि क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ने वाली मीठे पानी की मछली प्रजातियों में से एक है। यह मछली वियतनाम की मेकांग नदी की मूल निवासी है और पूरे महाद्वीप में एक जलीय कृषि प्रजाति के रूप में पेश की गई है। हाल ही में, कैटफ़िश ने विश्व जलीय कृषि में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभानी शुरू कर दी है। पंगेसियस की खेती दुनिया भर में तेजी से विकसित होने वाले जलीय कृषि प्रकारों में से एक माना जाता है। वैश्विक वार्षिक कैटफ़िश उत्पादन (FAO, 2014) में पंगेसियस का लगभग 40% योगदान है। FAO के अनुसार, २०१८ में पंगेसियस ने कुल वैश्विक जलीय कृषि में 4.3% का योगदान दिया है और 2015 से 2030 तक एशियाई क्षेत्र में और बढ़ने की उम्मीद है। जलीय कृषि भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्र में से एक है जो हाल के दिनों में प्रजातियों के विविधीकरण (नई प्रजातियों की शुरूआत) और नई कृषिप्रणाली के कारण 6-7% प्रति वर्ष की दर से बढ़ा है। भारत में मीठे पानी की जलीय कृषि, कुल जलीय कृषि उत्पादन में 95% से अधिक का योगदान करती है। पंगेसियस में कई गुण हैं जो इसे जलीय कृषि के लिए...

Ocean Farming: Smart and Sustainable agriculture on water bodies कृषि एवं संबंधित उद्योग वैश्विक स्तर पर मौलिक और वास्तविक परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम इस अपरिहार्य परिवर्तन को समझें और कृषि में संरचनात्मक बदलाव की वैश्विक गति को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। कृषि में इस तरह के परिवर्तन के कारणों पर तीन बिन्दुओं के तहत चर्चा की जा सकती है। सबसे पहले, विश्व में मानव आबादी की निरंतर वृद्धि वास्तव में हमें 2050 (संयुक्त राष्ट्र, 2019) तक 10 बिलियन जनसंख्या तक ले जायेगी और कोविड-19 जैसी महामारी ने पहले ही वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में बहोत बडा व्यवधान पैदा किया है। दूसरा, अंधाधुंध उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग, मीठे पानी का खनन, वनों की कटाई, भूमि क्षरण, मृदा की उर्वरता में गिरावट और अत्यधिक एकल फसल पध्दती इत्यादी से वैश्विक कृषि के कार्बन फुट प्रिंट बढ रहे है और उसके द्वारा संचालित वैश्विक जलवायु परिवर्तन इस बदलाव का कारण है। तैरते कृषि का महासागरीय खेती के रूप में आभासी प्रतिनिधत्व (स्त्रोतः फोब्र्स पत्रिका 2020) तीसरा, इस संरचनात्मक कृषि परिवर्तन को नैनो-उर्वरक, परिशुद्धि खेती, ऊध्र्वाधर खेती, ड्रोन, रोबोटिक्स, उपग्रह, स्वचालित कृषि मशीनरी और मशीन लर्निंग जैसी नवीन वैज्ञानिक तकनीकों द्वारा भी संभव किया जा रहा है। वर्तमान में, वैश्विक भूमि क्षेत्र का 11 प्रतिशत क्षेत्र...

हरित जल जलीयकृषि प्रौद्योगिकी  हरित जल आमतौर पर जलीय कृषि में उपयोग की जाने वाली तकनीक है। मीठे पानी की मछली विश्व जलीय कृषि में अग्रणी क्षेत्र है, जो अन्य क्षेत्रों को बहुत पीछे छोड़ देती हैं। इन मछलियों का उत्पादन बहुत तैयार फीड का उपयोग करती है। दिलचस्प बात यह है कि, हालांकि, प्रमुख पालन मछली प्रजातियों में से कई लगभग प्लवक के लिए बाध्य है और यदि कोई जलीय चारा है तो बहुत कम खपत करते है। नील तिलापिया, रोहू कार्प, बिगहेड कार्प, कैटला और प्रमुख झींगा प्रजातियां जब जलीय चारा उनके लिए उपलब्ध है तो भी अक्सर प्राकृतिक भोजन, इसमें से आधिकांश शैवाल, उनके आहार के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से के रूप में, का उपभोग करते है, । वास्तव मे, उपरोक्त प्रजातियों के प्राकृतिक भोजन के 90% में अक्सर प्राथमिक उत्पादन (ज्यादातर शैवाल) और पादपप्लवक खाने वाले जंतु प्लवक होते है जो पानी में बढ़ते हैं जिन्हें हरित जल कहा जाता है। हरित जल प्रौद्योगिकी उपचार प्रक्रिया जल विनिमय की आवश्यकता को कम करते हुए और जल उपयोग प्रभावशीलता को अधिकतम करते हुए गुणवत्ता बनाए रखती है। चल रहे वातन और ठोस निष्कासन के माध्यम से, उच्च घनत्व और खिला दरों को संरक्षित किया जा सकता है। निलंबित कार्बनिक कणों और पादप प्लवक अवशोषण पर नाइट्रीकरण के माध्यम से पानी के स्तंभ से...

जलीय कृषि में स्वदेशी तकनीकी ज्ञान की भूमिका The Indigenous technological (ITK) in aquaculture predominantly related to farm inputs has been developed by the farmers themselves, based on their experiences. Farmer’s innovation is based on their indigenous knowledge. The indigenous knowledge is the accumulated knowledge, skills and technology of the local farmer derived from the interaction of the ecosystem. The knowledge has been inherited from generation to generation. This radically changes the use of fertilizers and devised some unique right-hand thumb rule for disease diagnosis and treatment without the costly antibiotics and chemotherapeutic agents which is mostly useful for middle fish farmers. 1. Garlic and Fenugreek- As a fish attractant - Some farmers are used garlic and fenugreek seed for easier harvesting and fish attractant. For that, 1 kg of semi-dried garlic mixture with 250 g of roasted and grind fenugreek seed. After mixing both compounds applied in a pond. After one hour, a group of fish gets attracted to it because of aroma release through this compound, and fisher catches the fish easily. This mixture is enough to a water body for the one hectare area. This combination is also used as bait or attractant for angling. 2. Application of cattle urine - Some fish farmers in India collected cow urine and sprinkled on...

जलीय कृषि‍ के लि‍ए मत्स्य आहार का चयन एवं भंडारण  जलकृषि में जलीय संवर्धन के विभिन्न तरीकों से मत्स्य उत्पादन की बढ़ती हुई क्षमता को देखते हुए मत्स्य किसानों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले संतुलित मतस्‍य आहार की काफी आवश्यकता है। जलकृषि‍ से विश्व मत्स्य उत्पादन जो ९० के दशक में लगभग १५.२ मिलियन टन था आज बढ़कर लगभग  ६३.६ मिलियन टन हो गया है (एफ.ए.ओ. ,२०१२)। विश्व मत्स्य उत्पादन में आये इस वृद्धि का मुख्य कारण जलकृषि में उत्‍तम मत्स्य आहार का इस्तेमाल है । मछलियों की उत्तम वृद्धि एवं आर्थिक रूप से पालन को सफल बनाने हेतु आहार खिलाने के तौर- तरीके एवं इसकी आवृति बहुत ही महत्वपूर्ण है । मछलियों को स्वस्थ विकास और उपापचय के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले संतुलित पोषण आहार की आवश्यकता होती है। मत्स्य आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन और खनिज जैसे आवश्यक पोषक तत्व होने चाहिए। आहार सामग्री को वैज्ञानिक रूप से विकसित अनुपात के अनुसार ही चुनाव और मिश्रित किया जाना चाहिए। जलीय संवर्धन में मत्स्य आहार के लिए चयन मापदंड : भौतिक स्थिति: पैलेट का आकार समान होना चाहिए आहार में धूल की मात्रा कम होनी चाहिए पैलेट को डूबना चाहिए पैलेट की सतह चिकनी होनी चाहिए पैलेट को सूखा होना चाहिए पानी में स्थिरता: आहार की जल स्थिरता लगभग 2-3 घंटे होनी चाहिए। आठ घंटे से अधिक की स्थिरता और...

जलीय कृषि में असवेंदनता दवाइयों का उपयोग  मछलियाँ सवेदन शील जीवों में से एक होती है इन्हे पकड़ने, यातायात एवं किसी भी बीमारी से बचाव के लिए दवाई दिए जाने के वक्त यह बहुत ही जल्दी तनाव में आ जाती है जिसके कारण कई बार मछलियों को शारीरक चोट पहुच जाती है तो कई बार मछलियों के इन तनावों के कारण मृत्यु भी हो  जाती है जिससे प्रमुख हानि मछली पालकों को होता है इन सभी हानियों को चेतना शून्य करने वाली औषधियों का उपयोग करके कम किया जा सकता है।  इस औषधि के उपयोग से मछलियों में तिलमिलाहट कम हो जाती है जिससे आसानी से मछलियों को पकड़ा एवं एक जगह से दुसरे जगह तक ले जाया सकता है! असंवेदनकारी दवाऐं, मछलीयों को बिना किसी शारीरिक जख्म एवं हानि‍ पहुचाऐ ,  हॉर्मोन या किसी बीमारी से बचाव की दवाइयों को मछलियों के शरीर में डालने के वक्त भी मददगार है यह असवेंदन दवाइयां कुछ समय तक असर करने के बाद पुन: मछलियों को उसके प्राथमिक स्तिथि की तरह ला देती है जिससे मछलियों को कोई हानि नहीं होती है एवं इसको उपयोग करने का  तरीका भी बहुत ही असान है मछली पालक इन औषधियों को आसानी से उपयोग कर सकते है परंतु इन औषधियों के उपयोग के लिए सावधानी बहुत जरूरी है।  यह औषधियां...