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Bacterial leaf spot disease and prevention in pumpkin crops कद्दू वर्गीय फल जिसे गोर्ड (gourd) भी कहा जाता है, विभिन्न वंशों को समाहित करती है, जिनमें अधिकांश विश्वभर में खाये जाते हैं। ये विभिन्न फाइटोकेमिकल्स के रूप में समृद्ध स्रोत के रूप में काम करते हैं, जिसमें कुकुर्बिटासिन, सापोनिन्स, कैरोटिनॉयड्स, फाइटोस्टेरोल्स, पॉलीफिनोल्स, और एंटीऑक्सीडेंट्स शामिल हैं। ये फल विभिन्न रूपों में खाए जा सकते हैं: पके हुए (उदाहरण के लिए, कद्दू), अपके हुए (जुकीनी), ताजा (तरबूज), पकाए हुए (स्क्वॉश), या आचारित (घेरकिन)। ये "पेपो" नामक बेरी श्रेणी में आते हैं। ककड़ी प्रजातियों में अक्सर पाई जाने वाली कड़वाहट कुकुर्बिटासिन के कारण होती है। बैक्टीरियल स्पॉट कद्दू वर्गीय फसलों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्वपूर्ण बीमारी है। जिसका कारण ज़ैंथोमोनास कुकर्बिटे (Xanthomonas cucurbitae) नामक जीवाणु है। यह रोग कद्दू घिया, लौकी और राम तोरी जैसी फसलों में, हानि का कारण बनता है। यह खासकर कद्दू के मामले में तकनीकी तौर पर 90% तक फसल की हानि का कारण बन सकता है। यह बीमारी बीजों से उत्पन्न होती है जीवाणु का सटीक स्थान पता नहीं होने के करण इसे प्रबंधित करना कठिन होता है। इस बीमारी के लक्षण में निम्नलिखित शामिल हैं: लौकी के मामले में, यह बीमारी पौधे के लगभग सभी भागों को प्रभावित करती है। पहले, सभी उम्र के पत्तियों के किनारों पर छोटे पीले...

ग्रीष्मकालीन मौसम में लौकी की उन्नत उत्पादन तकनीक भारतीय धार्मिक ग्रंथों में, कई प्रकार की कद्दुवर्गीय (कुक्कुरबीटीय) सब्जियों के बारे में उल्लेख किया गया था। इनमें लौकी का विशिष्ट स्थान है। लौकी की सब्ज़ी अपने पौष्टिकता से भरपूर होती है। लौकी में, फॉस्फोरस, लोहा, कैल्शियम, तांबा, पोटेशियम, प्रोटीन, विटामिन ए, बी 1, बी 2 और सी) का स्रोत है और मधुमेह, बवासीर, रक्त, और श्वसन संबंधी विकार) जैसे औषधीय गुण हैं।  लौकी की उपयुक्त किस्में / संकर: लौकी की सब्जियों में, कई उच्च उपज देने वाली किस्में (खुले परागण और संकर) के अनुसार उपलब्ध हैं जो निम्नलिखित हैं: तालिका: लौकी की फसलों की उपयुक्त किस्में और संकर: क्रमांक  किस्म का नाम  संस्थान का नाम जहां इसे विकसित किया गया  किस्म के बारे में वर्णन  1. आरएचआरबीजीएच-1 एमपीकेवी, राहुरी  फल गहरे हरे रंग के, लगभग 20.0 सेमी लंबे होते हैं।यह 200.0 क्विंटल / हेक्टेयर की औसत उपज देता है।  2. काशी गंगा  आईसीएआर - IIVR, वाराणसी (उ.प्र।)  यह 30 सेंटीमीटर लंबाई के हल्के हरे रंग के फल देता है जिसकी लंबाई 7.00 सेमी हैऔर फलों का वजन लगभग 800-900 ग्राम है। एक औसत उपज हैलगभग 480.00-550.00 0 क्विंटल / हेक्टेयर की  है।   3. अर्का बहार  आईसीएआर - आईआईएचआर, बेंगलुरु (कर्नाटक)  फल बिना टेढ़े-मेढ़े, मध्यम आकार, औसत फल वाले होते हैं। वजन 1 किलो, हल्का हरा, बहुत अच्छा खाना पकाने और गुणवत्ता रखने वाला है।उपज 400-450 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।  4. पूसा संदेश  आईसीएआर -...

वैज्ञानिक विधि से लौकी की उन्नत खेती कद्दू वर्गीय सब्जियों में लौकी का प्रथम स्थान है इसके हरे फलों से सब्जी के अलावा मिठाई रायता , कोफ्ता ,  खीर आदि बनाए जाते हैं इसकी पत्तियां तने व गूदे से अनेक प्रकार की औषधियां बनाई जाती हैं यह कब्ज को कम करने पेट को साफ करने खांसी या बलगम दूर करने में अत्यंत लाभकारी होती है इसके मुलायम फलों में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट,  विटामिंसव खनिज लवण प्रचुर मात्रा में पाई जाती हैं लौकी की खेती के लिए जलवायु लौकी की खेती के लिए गर्म एवं आद्र जलवायु की आवश्यकता होती है इसकी बुवाई गर्मी एवं वर्षा की समय में की जाती है यह पाले को सहन करने में बिल्कुल असमर्थ है कम तापमान पर पौधे की बढ़वार रुक जाती हैं। भूमि इसकी खेती विभिन्न प्रकार की घूमने की जाती है किंतु उचित जल धारण क्षमता वाली जीवाश्म युक्त हल्की दोमत भूल इसकी फसल सफल खेती के लिए सर्वोत्तम मानी गई है कुछ अम्लीय भूमियों में इसकी खेती की जा सकती है 1 जुलाई मिट्टी पलटने वाली हल्से करके फिर दो-तीन बार हैरो या कल्टीवेटर से करनी चाहिए किस्में कोयम्बटूर‐1- यह जून व दिसम्बर में बोने के लिए उपयुक्त किस्म है, इसकी उपज 280 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है जो लवणीय क्षारीय और सीमांत मृदाओं में उगाने के लिए उपयुक्त...

लोकी (घीया) की उन्‍नत किस्‍में Varieties प्रजाति Developed By विकसित की  yield उपज (कु./है.) Characters पूसा मेघदूत (Pusa Meghdoot) भारतीय कृषि अनुसंधान संसथान - यह प्रजाति गर्मी एवं वर्षा दोनों ऋतुओं में उगाई जाती हैं। यह संकर किस्‍म पीएसपीएल त‍था सलेक्‍शन-2 के संकरण से विक्‍सित की गयी है। इसके फल हरे लम्‍बे एवं कोमल होते हैं तथा इसकी उपज पीएसपीएल की तुलना में 50% अधिक होती है। पूसा मंजरी (Pusa Naveen) भारतीय कृषि अनुसंधान संसथान   इस किस्‍म का विकास पीएसपीआर एचं सलेक्‍सन-11 के संकरण से किया गया है। इसके फल हरे गोल एवं कोमल होते हैं। यह संकर किस्‍म पीएसपीआर की अपेक्षा 48% अधिक उपज देती है। उत्‍तर भारत में यह प्रजाति गर्मी एवं वर्षा दोनों ऋतुओं के लिए उपयुक्‍त है। पूसा नवीन (Pusa Naveen) भारतीय कृषि अनुसंधान संसथान 325 उत्‍तर भारत में यह प्रजाति गर्मी एवं वर्षा दोनों ऋतुओं में उगाई जाती हैं। इसके फल सीधे, 30-35 से.मी.लम्‍बे, बेलनाकार एवं 800 से 850 ग्राम औसत भार वाले होते हैं। डिब्‍बाबंदी एवं परिवहन के लिए यह सर्वोत्‍तम प्रजाति है। मध्‍य प्रदेश व महाराष्‍ट्र के लिए 1992 मे अनुमोदित पूसा सन्‍देश Pusa Sandesh भारतीय कृषि अनुसंधान संसथान 320 फल आकर्षक, हरा, गोल, मध्‍यम आकार का वजन 600 ग्रा. पहली तूडाई 55 से 60 दिन में (खरीफ) एवं 60 से 65 दिन (ग्रीष्‍म), उत्‍तर मैदानी भागों के लिए 1994 मे अनुमोदित हुई पंजाब कोमल (Punjab Komal) पंजाब कृषि विश्‍वविद्यालय 290 यह अगेती किस्‍म है जो 70 दिनों में...

Hybrid seed production technique of bottlegourd खेत का चुनाव : संकर बीज उत्‍पादन के लिए चुना गया खेत अवांछित पौधों से रहित होना चाहिए। खेत समतल तथा उसमें उचित जल न‍िकास की व्‍यवस्‍था होनी चाहिए। खेत की मिटटी का पीएच मान 6.5-7.5 के बीच उपयुक्‍त रहता है। खेत में सिंचाई की समुचित व्‍यवस्‍था होनी चाहिए। ऋतु (season) का चुनाव: लौकी के संकर बीज उत्‍पादन के लिए ग्रीष्‍म ऋतु की अपेक्षा खरीफ ऋतु अधिक उपचुक्‍त होती है। खरीफ ऋतु में, ग्रीष्‍म की अपेक्षा अधि‍क बीज उपज मिलती है क्‍योंकि खरीफ में फलों तथा बीजों का विकास अच्‍छा होता है।  बीज का स्रोत (Seed source):  संकर बीज उत्‍पादन के लिए पैतृक जननों (Parents) का आधारीय बीज (Foundation seed)ही प्रयोग किया जाता है जिसे सम्‍बन्धित अनुसंधान संस्‍थान या कृषि विश्‍वविद्यालयों से प्राप्‍त किया जा सकता है। पृथक्‍करण दूरी: (Sepearation)  लौकी एक पर-परागित (cross polinated) एवं उभयलिंगाश्री (नर व मादा पुष्‍प का अलग अलग भागों पर आना) फसल है। आनुवांशिक रूप से शुद्व बीज उत्‍पादन के लिए, बीज फसल, अन्‍य किस्‍मों तथा व्‍यावसायिक संकर किस्‍मों के बीच में न्‍यूनतम 1000 मीटर की दूरी होनी चाहिए। नर व मादा पैतृकों की बुवाई अलग-अलग खण्‍डों में न्‍यूनतम 5 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए।  पुष्‍प जैविकी (Floral biology):  लौकी के फूल सफेद रंग के होते हैं। फूल प्राय: दोपहर बाद, 4 से 6 बजे के बीच...