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ऊँटों में होने वाले तीन प्रमुख रोग तथा उनसे बचाव Camel farming is an indispensable occupation of desert areas as camel is an important part of the desert ecosystem. Due to its unique bio-physical characteristics, it has become a symbol of adaptation to survive in the harshness of arid regions. Camel's milk has medicinal value and is used as a medicine in many complex diseases including diabetes, asthma, jaundice, tuberculosis, anemia, cancer and liver. ऊँटों में होने वाले तीन प्रमुख रोग तथा उनसे बचाव ऊंट पालन रेगिस्तानी क्षेत्रों का अपरिहार्य व्यवसाय है क्योकि ऊँट रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है। अपनी अनूठी जैव-भौतिकीय विशेषताओं के कारण यह शुष्क क्षेत्रों की विषमताओं में जीवनयापन के लिए अनुकूलन का प्रतीक बन गया है।  मरूधरा की कठिन जीवनयापन शैली में यह मानव का जीवन संगी है। रेत के धोरो में ऊँट के बिना जीवन बिताना दुष्कर है। रेगिस्तान का जहाज कहलाने वाला ये पशु कोई भी विकट परिस्थितियों में भी ज़िन्दा रह सकता है और इस पशु ने भार वाहन के क्षेत्र में अपरिहार्यता की हद तक पहचान बनाई है । इसके अतिरिक्त भी ऊँट की बहुत सी उपयोगिताएं हैं, जो निरन्तर सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों से प्रभावित है। ऊंटनी के दूध का ओषधिय महत्त्व होता है। इसका उपयोग मधुमेह, दमा, पीलिया, तपेदिक, एनीमिया, कैंसर और...

Camel milk contribution to milk production and its beneficial properties ऊंट रेगिस्तान का एक महत्वपूर्ण पशुधन है और उसके दूध में मानव के लि‍ए लाभकारी पोषक तत्त्व पाए जाते है। साल 2012  के सर्वेक्षण के अनुसार भारत में ऊंट की जनसँख्या 4 लाख पाई गई थी जो कि औसतन 22.63 प्रतिशत गिरावट दर्शाता है। अच्‍छी नस्‍ल के ऊंट की दुग्ध उत्पादन क्षमता 7  - 8 लीटर दूध प्रति दिन होती है। लेकिन जैसलमेरी या बिकानेरी नस्लों की औसतन उत्पादन  प्रति दिन केवल 5 - 6 लीटर है जो कि काफी कम है। ऊंट के पास किसी अन्य पशुधन की तुलना में रेगिस्तान की कठोर परिस्थितियों में लम्बे समय की अवधि तक अधिक से अधिक दूध का उत्पादन करने की क्षमता है। ऊॅट की लैक्टेशन अवधि 8 - 18 महीनों की होती है। औसतन, दैनिक दूध उत्पादन का अनुमान बेहतर खाद्य की उपलब्धता , पानी की उपलब्धता और पशु चिकित्सा  व देखभाल पर निर्भर करता है। भारत, रूस और सूडान सहित कई देशों में ऊंट के दूध का मानव उपभोग में बहुत बड़ा योगदान है। इस दूध में मानव आवश्‍यकता के सभी पोषक तत्व स्वाभाविक रूप से मौजूद होते हैं जिसमे अधिकतम मात्रा प्रोटीनों की होती है।  इसका दूध विभिन्न बीमारिया जैसे कि जलोदर, पीलिया, तपेदिक, अस्थमा और लेशमैनियासिस से उपचार के लिए लाभदाई है। ऊंट के...