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स्प्राउट ब्रोकोली: छत्तीसगढ़ सब्जी उत्पादन में रिवोल्यूशनरी उद्यम Sprout broccoli belongs to cruciferae family. Its botanical name is B. oleracea L. var. italica . Due to its cauliflower like appearance, sprouting broccoli or broccoli in the local parlance is known as ‘Hari Gobhi’, meaning green cauliflower. Broccoli with purple and white heads is grown in Italy. Broccoli is an Italian word, derived from the Latin branchium, meaning anarm or branch.  Broccoli has two distinct forms. One makes a dense, white curd like that of cauliflower and is called ‘heading broccoli’. The other makes a somewhat branching cluster of green flower buds atop a thick, green flower stalk. Small axillary heads/ sprouts arise from the stem at leaf axils. This form is called ‘sprouting broccoli’. Broccoli is an important vegetable among the Cole crops. It is a rich source of vitamins and minerals. In fact, it contains more vitamin A than cabbage and cauliflower and the highest amount of proteins among the Cole crops. It also contains anti-cancerous compounds and antioxidants. Broccoli is an excellent source of vitamins A and C and also a good source of folate. Dark green colour of broccoli is an indicator of its rich carotene content. Sulforaphane, indoles, β-carotene and phytochemicals, found in broccoli, are reported to have anti cancerous properties. Broccoli is also reported...

सब्‍जी माइक्रोग्रीनस - पोषण का एक संभावित स्रोत Microgreens are young and tender edible seedlings produced using the seeds of different species of vegetables, herbaceous plants, aromatic herbs and wild edible plants (Di Gioia and Santamaria 2015a, b). The edible portion constitutes single stem, the cotyledon leaves and, often, the emerging first true leave (Di Gioia et al. 2017). A few days of photosynthesis of microgreen is known to provide nearly 4-9 times more nutrients including antioxidants, vitamins and minerals than their mature counterparts. Microgreens first appeared in the menus of the chefs of San Francisco, in California, at the beginning of the 1980s. By geography, North America contribute ~50% of market share in 2019. . During 2020-2025, NutriGreens market at the global level is anticipated to grow at a CAGR (Compound annual growth rate) of 7.5-8.0%. Traits of Microgreens The gaining popularity of these cotyledonary leafy greens is due to their pleasing palette of colors, textures and flavors. Microgreens represent a new class of vegetables that can be considered as “functional foods”  or “super foods” (Treadwell et al. 2010), because they serve as rich source of bioactive compounds such as vitamins, minerals, and antioxidants, along with the necessary nutrients required for human body (Janovská et al., 2010; Xiao et al., 2012). Microgreens are frequently called...

ब्रोकली की उन्नत किस्में ब्रोक्कोली की बुवाई उत्तार भारत के मैदानी क्षेत्रों में सितम्बर मध्य से नवंबर अंत तक 15 -20 दिन के अंतराल पर करे जिससे दिसंबर से  फरवरी तक कटाई की जा सके । ब्रोकली  यानि‍ हरी गोभी की उन्नत किस्में, परिपक्वता की अवधि, शीर्ष भार और बीज का स्रोत  किस्में बीज का स्रोत परिपक्वता की अवधि (दिन)    शीर्ष भार  (ग्राम) उपज  (कि./है. ) शीर्ष का रंग  टिप्पणी पूसा के टी एस- 1 भा. कृ. अ. स. कटराईं 85-95 250-400 125-150 ठोस हरा स्प्रॉटिंग ब्रोकली पंजाब ब्रोकली       पंजाब कृषि विश्वविधालय,  लुधियाना 65-70 300-400 110-120 हरा स्प्रॉटिंग ब्रोकली शेर-ऐ-कश्मीर  शेर-ऐ-कश्मीर यू. एग्री. सा. टे., कश्मीर 65-70 300-400 100-110 हरा स्प्रॉटिंग ब्रोकली पालम विचित्रा       हि. प्र. कृ. वि. वि.  पालमपुर 115-120 600-700 200-220 बैंगनी हेडिंग ब्रोकली पालम समृध्दि हि. प्र. कृ. वि. वि.  पालमपुर 85-90 300-400 120-140 हरा स्प्रॉटिंग ब्रोकली पालम कंचन  हि. प्र. कृ. वि. वि.  पालमपुर 140-145 650-750 250-270 पीला हरा हेडिंग ब्रोकली पालम हरितिका हि. प्र. कृ. वि. वि.  पालमपुर 145-150 600-700 250-270 हरा हेडिंग ब्रोकली Authors श्रवण सिंह ब्रिज बिहारी शर्मा और नरेंदर  कुमार शाकीय विज्ञान संभाग, भा.कृ.अनु.पं.-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-12 Email: singhshrawan@rediffmail.com ...

जैव संवर्धित किस्में एवं उनकी प्रमुख विशेषतायें  पोषक आहार मानव शरीर की सम्पूर्ण वृद्धि व विकास के लिए आवश्यक है| पोषक आहार नही मिलने से विभिन्न सूक्ष्म तत्वों की कमी शरीर को अनेक प्रकार से प्रभावित करती है जिसको सामान्य शब्दों में कुपोषण कहा जाता है| सम्पूर्ण विश्व में लगभग 2 बिलियन जनसंख्या अपुष्ट आहार से प्रभावित है जबकि 795 मिलियन जनसंख्या कुपोषण की शिकार है| भारत में 194.6 मिलियन जनसंख्या कुपोषित है जिनमे से 44% महिलायें अनीमिया से ग्रसित है, 5 वर्ष से कम उम्र के 38.4% बच्चे छोटे कद व 35.7% बच्चे कम वजन के है| जैव संवर्धित किस्मों का विकास कर कुपोषण की स्थिति से बचा जा सकता है| यह सबसे सस्ता और सरल उपाय है| पारम्परिक प्रजनन (जैव प्रौद्योगिकी के साथ या इसके बिना, फसल मानचित्रण और मार्कर समर्थित प्रजनन) या मेटाबोलिक प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से खाद्य फसल की सूक्ष्म पोषक तत्वों का संवर्धन जैव संवर्धन कहलाता है|  भारतीय कृषि अंनुसंधान परिषद ने जैव संवर्धित विधि से धान्य, दलहन, तिलहन, सब्जी और फल वाली फसलो में उच्च पैदावार व उच्च पोषक गुणवत्ता वाली विभिन्न जैव संवर्धित किस्मों का विकास किया है| इन किस्मों के बारे में संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है: धान की जैव संवर्धित किस्में 1. सी आर धान 310: यह किस्म राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक (2016) द्वारा विकसित की...

पोषण उद्यान में कोल फसलों का उत्पादन   फूलगोभी, पत्ता गोभी, ब्रोकली, ब्रसेल स्प्राउट्स, केल्स और गांठगोभी इत्त्यादि ठंडी फसलें हैं। ये फसलें ठंडी जलवायु को पसंद करती हैं और आकारिकी, उत्पादन तकनीक, बीमारियों और कीट संवेदनशीलता के मामले में भी समान हैं। इन फसलों का आर्थिक हिस्सा फूलगोभी (अत्यधिक सुपाच्य पूर्व-पुष्पमय उपमा) , पत्ता गोभी में सिर (घेरने वाले पत्तों का मोटा होना), ब्रोकोली में सिर (अनपेक्षित फूल की कली और मांसल पुष्प डंठल), गांठगोभी में घुंडी (गाढ़ा तना) ), ब्रसेल्स में मिनी हेड या स्प्राउट्स (सूजन वाली हेड की कलियाँ), केल (मांसल पत्तियां) में होता है। इन फसलों में वांछनीय ग्लूकोसाइनोलेट्स जैसे कि विटामिन, खनिज, फाइबर और बायोएक्टिव यौगिकों की उपस्थिति के कारण अत्यधिक पोषक तत्व होते हैं, जिसमें एंटी-कार्सिनोजेनिक गतिविधि होती है। सम्पूर्ण फसलें कैंसर को रोकने में सहायता करती हैं जैसे कि कोलोन कैंसर, ब्लैडर कैंसर, स्तन कैंसर, सीरम कोलेस्ट्रॉल को कम करने के अतिरिक्त और प्रोजेरिया रोग, पुराने ऑस्टियो आर्थराइटिस के निदान में सहायता करता है। पोषण सुरक्षा हेतु किचन उद्यान, घर के पिछवाड़े में एक क्षेत्र है जहाँ परिवार के उपयोग के लिए पूरे वर्ष में विभिन्न पौष्टिक सब्जियां उगाई जा सकती हैं। यह कम लागत, पोषक, कीटनाशक मुक्त सब्जियां प्रदान करता है। किचन गार्डन में 4-5 सदस्यों के परिवार के लिए सब्जियां प्रदान करने के लिए 4 मीटर ×...

फूलगोभी की उन्नत खेती  फूलगोभी हर तरहह  की ज़मीन  मैं हो सकती है।  लेकिन रेतली ज़मीन में अच्छी पैदावार हो सकती है। फूलगोभी की फसल 6 से 7 पी एच वाली फसल में अच्छी होती है। इसकी काश्त  में  तापमान का  बहुत  बड़ा  हाथ  होता  है। फूलगोभी की पौध  तैयार  करने  के  लिए 23 डिग्री सेंटीग्रेड होना चाहिए  और  बाद  में 17 से  20 डिग्री होना उत्तम माना  जाता है। गरम इलाको में  इसकी फसल 35 डिग्री  में  भी हो  सकती  है। जबकि ठन्डे  एरिया  में 15  से  20 डिग्री में भी हो  जाती है। पहले खेत को पलेवा करें जब भूमि जुताई योग्य हो जाए तब उसकी जुताई 2 बार मिटटी पलटने वाले हल से करें इसके बाद दो बार कल्टीवेटर चलाएँ और प्रत्येक जुताई के बाद पाटा अवश्य लगाएं | फूलगोभी की  उन्नतशील प्रजातियाँ :- फूलगोभी की मौसम के आधार पर तीन प्रकार की प्रजातियाँ होती हैI जैसे की अगेती, मध्यम और पछेती प्रजातियाँ पायी जाती हैं अगेती प्रजातियाँ पूसा दिपाली,अर्ली कुवारी, अर्ली पटना, पन्त गोभी 2, पन्त गोभी 3 पूसा कार्तिक,  पूसा अर्ली सेन्थेटिक, पटना अगेती, सेलेक्सन 327 एवं सेलेक्सन 328 हैI  मध्यम प्रकार की- प्रजातियाँ पन्त शुभ्रा, इम्प्रूव जापानी, हिसार 114, एस-1, नरेन्द्र गोभी 1, पंजाब जॉइंट ,अर्ली स्नोबाल, पूसा हाइब्रिड 2, पूसा अगहनी, एवं पटना मध्यम, आखिरी में पछेती प्रजातियाँ स्नोबाल 16, पूसा स्नोबाल 1, पूसा स्नोबाल 2,...

फूलगोभी और पत्तागोभी की उत्पादन तकनीक सर्दी के मौसम में गोभी वर्गीय सब्जियों में विशेषकर फूलगोभी और पत्तागोभी का महत्वपूर्ण स्थान है। इनमे विटामिन ए, सी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और अन्य खनिज पदार्थ पर्याप्त मात्रा में पाये जाते है। इनमे कुछ औषधीय गुण भी पाये जाते है जो कैंसर रोधी होते है। सब्जी के अलावा इनका उपयोग सूप और आचार बनाने में भी किया जाता है। गोभी वर्गीय सब्जियों के लि‍ए जलवायु: गोभी वर्गीय सब्जियों के लिए ठंडी और नम जलवायु की आवश्यकता होती है। अधिक गर्मी और शुष्क स्थिति में इन सब्जियों की गुणवत्ता खराब हो जाती है। ये अधिक ठंड को सहन कर सकती है। भूमि की तैयारी: गोभी की अच्छी पैदावार के लिए अच्छे जल निकास वाली बलुई दोमट भूमि उत्तम मानी जाती है। गोभी की खेती के लिए भूमि का पी एच 5.5 से 6.8 तक अच्छा माना गया है। अम्लीय भूमि में गोभी की खेती अच्छी नहीं होती है। खेत तैयार करने के लिए सबसे पहले एक गहरी जुताई कर हैरो से मिटटी को भुरभरा बना लेना चाहिए और फिर पट्टा चलाकर भूमि को समतल बना ले। उन्नत किस्मों का चुनाव: गोभी की खेती में उन्नत किस्मों का काफी महत्व है। अगेती, मध्यम और पछेती खेती के लिए अलग अलग किस्मों का लगाना चाहिए क्योंकि मौसम के अनुसार न लगाने...

 Cultivation of cauliflower in early season in India फूलगोभी की खेती पूरे वर्ष में की जाती है। इसको सब्जी, सूप और आचार के रूप में प्रयोग करते है। इसमे विटामिन बी पर्याप्त मात्रा के साथ-साथ प्रोटीन भी अन्य सब्जियों के तुलना में अधिक पायी जाती है फूलगोभी के लिए ठंडी और आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है यदि दिन अपेक्षाकृत छोटे हों तो फूल की बढ़ोत्तरी अधिक होती है फूल तैयार होने के समय तापमान अधिक होने से फूल पत्तेदार और पीले रंग के हो जाते है अगेती जातियों के लिए अधिक तापमान और बड़े दिनों की आवश्यकता होती है फूल गोभी को गर्म दशाओं में उगाने से सब्जी का स्वाद तीखा हो जाता है | फूलगोभी की खेती प्राय: जुलाई से शुरू होकर अप्रैल तक होती है फूलगोभी की खेती के लि‍ए भूमि  जिस भूमि का पी.एच. मान 5.5 से 7 के मध्य हो वह भूमि फूल गोभी के लिए उपयुक्त मानी गई है अगेती फसल के लिए अच्छे जल निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी  तथा पिछेती के लिए दोमट या चिकनी मिट्टी उपयुक्त रहती है साधारणतया फूल गोभी की खेती बिभिन्न प्रकार की भूमियों में की जा सकती है  भूमि जिसमे पर्याप्त मात्रा में जैविक खाद उपलब्ध हो इसकी खेती के लिए अच्छी होती है हलकी रचना वाली भूमि में पर्याप्त मात्रा में जैविक खाद...