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Major seed borne diseases of cereal crops and their prevention बीज-जनित रोगजनक खेत में फसल अंकुर स्थापना के लिए एक गंभीर खतरा है।इसलिए फसल की विफलता में संभावित कारक के रूप में योगदान कर सकते हैं।बीज न केवल इन रोगजनकों के दीर्घकालिक अस्तित्व को सुरक्षित बनाते हैं, बल्कि नए क्षेत्रों में उनके आगमन और उनके व्यापक प्रसार के लिए वाहन के रूप में भी कार्य कर सकते हैं। बीज-जनित, फफूंद, जीवाणु, विषाणु, सूत्रकृमि आदि रोगजनक अनाज वाली फसलों में विनाशकारी नुकसान का कारण बन सकते हैं और इसलिए सीधे खाद्य सुरक्षा को प्रभावितकरते हैं। पौधों के संक्रमित वायवीय भागों के विपरीत, संक्रमित बीज लक्षण-रहित हो सकते हैं, जिससे उनकी पहचान असंभव हो जाती है। अनाज वाली फसलों के अन्तर्गत गेहूँ, धान, जौं, जई, बाजरा, ज्वार आदि की फसलें आती हैं। इन फसलों मेंअनेक प्रकार के रोगजनक बीज जनित बीमारियां उत्पन्न करते हैं (तालिका 1)। इन बीमारियों में कुछ प्रमुख बीज जनित रोग और उनकी रोकथाम इस प्रकार है- 1. गेहूँ का अनावृत कंड (लूज स्मट) रोग: रोग लक्षणः यह रोग अंत: बीज जनित रोग है। इसका रोग कारक अस्टीलैगो सेगेटम प्रजाति ट्रिटीसीकवक है। इस रोग के लक्षण केवल बालियां निकलने पर दृष्टिगत होते हैं। इस रोग में पूरा पुष्पक्रम (रैचिस को छोडकर) स्मट बीजाणुओं के काले चूर्णी समूह में परिवर्तित हो जाता है। यह चूर्णी समूह प्रारम्भ...